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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:परिवार में अगर कोई सही निर्णय ले ले तो सबको उसका मान करना चाहिए

18 दिन पहले
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पं.विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं.विजयशंकर मेहता

परिवार के सदस्यों में आपस में जब समझ और अपनापन जाग जाता है तो हर निर्णय सबको मान्य होता है। झगड़ा यहीं से शुरू होता है कि किसी एक सदस्य ने कोई निर्णय लिया, दूसरे को उसमें अपना अहित दिखा, पसंद नहीं आया। बस, झंंझट शुरू..। निर्णय लेने में एक अधिकार होता है और यदि आप परिवार में सदस्यों पर अधिकार जताना चाहते हैं तो उसी मात्रा में पहले प्रेम जताना पड़ेगा। वरना अधिकार शोषण बन जाएगा। इस मामले में सीता और रामजी की समझ बड़ी अनूठी थी।

रावण वध के बाद श्रीराम ने विभीषण, हनुमान और अंगद को कहा था कि जानकी को आदर सहित ले आओ। वे सीताजी को पालकी में बैठाकर लाने लगे तो सारे रीछ-वानर उनके दर्शन के लिए दौड़ पड़े। थोड़ी अव्यवस्था-सी हो गई। तब श्रीराम ने हंसते हुए कहा- ‘कह रघुबीर कहा मम मानहु।

सीतहि सखा पयादें आनहु।’ राम चाहते थे जिन वानर-भालुओं ने सीता के लिए रावण से युद्ध किया है, सीता भी उन्हें देख सके और वे सब भी सीता को माता के रूप में निहार सकें। इसलिए उन्होंने कहा सीता को पैदल ही लेकर आओ। वे यह भी जानते थे कि सीता को पैदल लाएंगे तो उन्हें बुरा नहीं लगेगा। यह होती है पति-पत्नी की आपसी समझ। परिवार में ऐसे और भी रिश्ते होते हैं। यदि कोई एक सदस्य सही निर्णय ले ले तो सबको उसका मान करना चाहिए।

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