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एन. रघुरामन का कॉलम:अगर आप इस दुनिया में शांति चाहते हैं तो अपनी जिंदगी को खुद से परे जाकर जिएं

14 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

भगवान गणेश की कथा है, जिसमें वे धन के देवता, राजा कुबेर को सबक सिखाते हैं। कुबेर को धन पर घमंड था और उन्होंने संत की तरह पहाड़ों पर रहने वाले भगवान शिव का उपहास किया था। एक बार कुबेर ने भगवान शिव को अपनी राजधानी आमंत्रित किया लेकिन शिव ने भगवान गणेश को भेज दिया।

कथा में वर्णन है कि किस तरह भगवान गणेश ने दावत के खाने के साथ पूरे शहर का खाना खा लिया, जिससे कुबेर शर्मिंदा हुए और अपने घमंड के लिए माफी मांगी। कहानी का फंडा था, ‘हम सोचते हैं कि ‘खुशी’ के लिए बहुत कुछ इकट्ठा करना पड़ता है। किंतु अनुभव कहता है कि हकीकत में ‘खुशी’ के लिए बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है।

यह पौराणिक कथा जीवन का बड़ा सबक देती है, जो मुझे अक्सर सब्जी विक्रेता जैसे उन छोटे व्यापारियों को देखकर याद आता है, जो विभिन्न शहरों की सड़कों पर लाऊडस्पीकर और मेगाफोन इस्तेमाल करते हैं और उसी से ठेले पर उपलब्ध चीजों के रेट बताते हैं। वे यह लाऊडस्पीकर 1000-1500 रुपए में खरीदकर रोज सामान की जानकारी अपनी आवाज में रिकॉर्ड करते हैं। आज ये रिकॉर्डेड मैसेज छात्रों की ऑनलाइन कक्षा और पेशेवरों के वर्क फ्रॉम होम में बाधा बन रहे हैं। बच्चों का ध्यान भटकने पर माता-पिता नाराज होते हैं, हालांकि जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, व्यवधान कम हो जाता है।

ऐसे कम से कम 6 शहर हैं, जहां मेरे दोस्त पुलिस कंट्रोल रूम में कार्यरत हैं। वे कहते हैं कि उन्हें लगातार छोटे व्यापारियों के इस व्यवहार की शिकायत मिल रही है। कोरोना के घटते केसों के साथ शिकायतें बढ़ रही हैं। आमतौर पर ये सुबह, ऑनलाइन क्लास के समय आती हैं। मैंने स्थानीय निवासियों को व्यापारियों से शोर न करने या मेगाफोन इस्तेमाल न करने का निवेदन करते देखा है, जिसे व्यापारी अनसुना कर देते हैं। हालांकि पुलिस मेगाफोन संबंधी शिकायतें अलग से रिकॉर्ड नहीं करती, लेकिन वह उन्हें ‘सार्वजनिक उत्पात’ मानती है।

बिना अनुमति के लाऊडस्पीकर या मेगाफोन इस्तेमाल करना पुलिस अधिनियम के तहत गैरकानूनी माना जाता है। कुछ साल पहले तक वे मेगाफोन इस्तेमाल नहीं करते थे क्योंकि जरूरत ही नहीं थी। अब कई ऊंची इमारतें बन गई हैं और उन्हें जरूरी सामग्री बेचने के लिए अंदर जाने की अनुमति नहीं है। चूंकि हमने खुद को बंद सोसायटियों में कैद कर दूसरों से अलग कर लिया है, इसलिए वे अपनी आवाज पूरी बिल्डिंग तक पहुंचाने के लिए ऐसे तरीके अपनाने लगे। मेरा सवाल यह है कि क्या हम रसोई की जरूरी चीजें ऑनलाइन खरीदना बंद कर, सब्जी विक्रेताओं की मदद नहीं कर सकते, ताकि यह गरीब तबका जी सके? मुझे लगता है कि हम उनकी मदद करेंगे तो वे भी सहयोग करेंगे।

मुझे याद है कि मैंने नागपुर के पास ताडोबा सेंचुरी के बाहर ‘खाखरा’ बेच रही एक महिला से पूछा था कि वह चाय भी क्यों नहीं बेचती, जो खाखरा के साथ अच्छी लगती है। उसने दूर एक लड़के की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘अगर मैं चाय बेचने लगूंगी तो वो लड़का अपना घर कैसे चलाएगा? उसे बस चाय बनाना आता है। आप वहां चाय पी लीजिए।’ मेरी आंखें नम हो गईं। स्वाभाविक है कि जो महिला कई स्वादिष्ट चीजें बना सकती है, वह अच्छी चाय भी बनाकर ज्यादा कमाई कर सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

फंडा यह है कि जब आपको मैसेज मिले कि ‘भगवान गणेश आपको खुशी, समृद्धि और शांति दें’ तो वास्तव में इसका अर्थ होता है।

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