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एन. रघुरामन का कॉलम:भविष्य की समस्याएं झेलने में सक्षम होना चाहते हैं तो अपोजिट यानी विपरीतों को देखना सीखें

15 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

हाल ही में मैं लंदनवासी दोस्त से वीडियो कॉल पर बात कर रहा था। उसने मुझे एक बिल्ली और उसके तीन बच्चे दिखाए, जिन्हें उसने कॉलोनी की सड़क से गोद लिया था। वे स्वस्थ थे और मेरा उन्हें खिलाने का मन हो रहा था। बाद में मैंने पूछा, ‘लगता है कि तुम्हारी कॉलोनी में कचरे की समस्या है?’ उसने हैरानी से पूछा, ‘तुम्हें कैसे पता?’ मैंने कहा, ‘मैंने विपरीत देखना सीखा है।’

मैं बताता हूं कि मैंने उससे क्या कहा। क्या आपने कई लोगों के घर के बाहर लबालब भरे बिन्स (कचरे के डिब्बे) देखे हैं, जहां कार्डबोर्ड के ढेर भी खुले में या बिन्स के बगल में रखे हैं, शायद पिज्जा के खाली डिब्बे? ऐसा इसलिए क्योंकि कोविड के कारण हम में पैदा हुए ऑनलाइन शॉपिंग के उत्साह से डिलिवरी बॉक्स और प्लास्टिक कवर का बहुत-सा कचरा पैदा हो रहा है। इसमें कुछ बारिश में भीगकर खराब हो जाता है और रिसायकिलिंग लायक नहीं रह जाता। गीले कागज, कार्डबोर्ड से आमतौर पर रिसायकिलिंग नहीं होती क्योंकि ये उपकरण खराब करते हैं और इन्हें छांटना मुश्किल होता है।

फेंके गए कार्डबोर्ड बॉक्स बढ़ने से घरेलू कचरे के बढ़ते ढेरों ने कई नगर पालिकाओं और रिसायकिलिंग संस्थानों को सचेत किया है। वेस्ट प्रबंधन में इस बदलाव के कारण कई हाउसिंग सोसायटियों और बड़ी कॉलोनियों को 350 लीटर तक के बड़े बिन्स खरीदने पड़ रहे हैं, जो सामान्य बिन्स से 50% तक बड़े हैं।

पिछले 12 महीनों में बड़ी नगर पालिकाएं तक ऐसी सोसायटियों को बड़े बिन्स दे रही हैं, जिन्हें अवांछित पैकिंग सामग्रियों का ढेर गैराज आदि में रखना पड़ रहा है। लंदन में हालिया सर्वे के मुताबिक ब्रिटिश परिवार 13.5 करोड़ कार्डबोर्ड डिलिवरी बॉक्स के कचरे पर बैठे हैं। आधे ब्रिटेनवासियों को लगता है कि महामारी के बाद से उनके घरों में कार्डबोर्ड कचरा दोगुने से ज्यादा बढ़ गया है। यूके ने एक साल में 17 अरब कार्डबोर्ड बॉक्स बनाए, जो 2020 से दोगुने हैं। बढ़ती आॉनलाइन डिलिवरी ने पहले से ही चरमराते इंफ्रास्ट्रक्चर पर और दबाव डाल दिया है, फिर वह कचरा इकट्‌ठा करना हो या रिसायकिलिंग संयंत्र हों।

यहां कचरा प्रबंधन में सबकुछ बदल गया है। कचरा बढ़ता है, तो चूहों ही आबादी बढ़ती है क्योंकि उन्हें पिज्जा के डिब्बों में चिपका, बचा हुआ खाना मिलता है। फिर ज्यादा चूहे खाने से बिल्लियां स्वस्थ होती हैं और ज्यादा प्रजनन करती हैं, नतीजतन उनकी आबादी बढ़ती है। हालांकि, जब चूहों की आबादी एक सीमा से कम हो जाती है, जो बिल्लियां धीरे-धीरे मरने लगती हैं क्योंकि उन्हें खाने के लिए पर्याप्त चूहे नहीं मिलते। लेकिन यह चक्र लंबा है।

बिल्लियां और चूहे, दोनों इकोसिस्टम में शीर्ष तक पहुंचने के पैटर्न का अनुसरण करते हैं, जिसके बाद पैटर्न पलट जाता है। तब तक डस्टबिन निर्माता बड़े और महंगे बिन्स खरीदने के इस ट्रेंड का आनंद ले सकते हैं। दो विपरीतों का यह चक्रीय पैटर्न, जिसमें एक आगे या पीछे होता है, उसे विपरीतों को देखना कहते हैं।

मेरे दोस्त की गोद ली हुई बिल्लियां सुंदर दिख रही थीं क्योंकि वे खुशी-खुशी चूहों का शिकार कर रही हैं। चूहे भी खुश थे क्योंकि उन्हें पिज्जा के डिब्बों में खूब खाना मिल रहा है। अगली बार आप खूबसूरत बिल्लियां देखें तो याद रखें कि यह कॉलोनी को कचरामुक्त बनाने का समय है। वैचारिक नेतृत्वकर्ता विपरीत देखने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। अब ये बड़े डस्टबिन कचरे की अलग कहानियां बयां कर रहे हैं।