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एन. रघुरामन का कॉलम:कलियुग में आधुनिक ज्ञानियों को सत्ता विकसित कर वह बाधा देखनी चाहिए जो उन्हें सफल होने से रोक रही

2 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

ईश्वर को पाने में ‘सत्ता’ को बाधा की तरह देखने वाले ‘ज्ञानियों’ की एक पुरानी कहानी है। वे हमेशा सत्ता से बचते हैं। उनकी इस मानसिकता को यह किस्सा साबित करता है। कहते हैं कि भगवान राम ने लक्ष्मण से ऐसे लोग खोजने कहा, जिन्हें कोई शिकायत हो, ताकि वे समाधान कर सकें। लक्ष्मण को अयोध्या में ऐसा कोई नहीं मिला। अंतत: एक कुत्ता मिला, जिसने कहा कि उसके साथ गलत हुआ है।

लक्ष्मण उसे राम के पास ले गए। कुत्ते ने कहा कि सर्वार्थसिद्धि नाम के आदमी से उसे पत्थर मारा है। राम ने सर्वार्थसिद्धि को बुलाया, जिसने अपराध स्वीकार कर लिया। उसने कहा कि वह कई समस्याओं में उलझा था और निराश होकर कुत्ते को पत्थर मार दिया। वह सजा के लिए तैयार था। राजा के सलाहकारों ने सजा का तरीका भगवान पर ही छोड़ दिया।

राम ने कुत्ते से संभावित सजा पूछी। कुत्ते ने कहा कि सर्वार्थसिद्धि को मंदिर का धर्माधिकारी बना दें। यह सजा दरबारियों को इनाम जैसी लगी, तब कुत्ते ने समझाया, ‘इसे बड़ी जिम्मेदारी वाला पद दे रहे हैं। मैं भी कभी इस पद पर था। लेकिन जब आप किसी बड़े संस्थान के प्रमुख होते हैं तो नियमों का पालन आसान नहीं होता। कभी भूलवश तो कई बार व्यक्ति के ‘मूल्यों के मापदंड’ गिरने से नियम टूट जाते हैं। मैं भी अनजाने में अपना कर्तव्य नहीं निभा पाया और इस जन्म में कुत्ता बन गया।

मैं जानता हूं कि यह व्यक्ति भी गलती करेगा और अगले जन्म में मेरी तरह पैदा होगा।’ कहानी इस संदेश के साथ खत्म होती है कि बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि सत्ता खतरनाक है और सजग न रहने पर यह कभी-कभी गलत रास्ते पर ले जाती है।

मुझे यह कहानी किसी और कारण से याद आई। जब से प्रियंका चोपड़ा ने एक विदेशी अखबार के इंटरव्यू में यूके की ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनी ‘डिलिवरू’ की तारीफ की है, मैं जानने की कोशिश कर रहा था कि इसमें ऐसा क्या है जो इसकी इतनी तारीफ होती है।

अमेरिका के विल शू द्वारा सह-स्थापित, करीब 5 अरब पाउंड की कंपनी में क्या अलग है? करोड़पति और कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव विल हर हफ्ते अंडरकवर (भेष बदलकर, छिपकर) बतौर राइडर (डिलिवरी बॉय) जाते हैं और देखते हैं कि उनका डिलिवरी सिस्टम कैसा चल रहा है। अंडरकवर ऑपरेशन उनके लिए एक्सरसाइज का अच्छा तरीका होता है और वे रेस्त्रां के तौर-तरीके भी समझ पाते हैं। उन्हें न सिर्फ राइड का मजा आता है, बल्कि बिजनेस की समझ भी बढ़ती है।

पिछले हफ्ते जब वे ग्राहक का ऑर्डर लेने गए, तो रेस्त्रां के स्टाफ ने न सिर्फ उन्हें इंतजार करवाया, बल्कि उन्हें फटकार भी दिया, जब उन्होंने बताया कि ग्राहक का खाना बिल्कुल ठंडा है। विल ने कहा, ‘ये खाना तो बहुत ठंडा है’ तो शेफ बोला, ‘जाकर डिलिवर करो दोस्त’।

उसने शायद किसी का खाना रिसायकल किया था, जिसने इसे लेने से इंकार कर दिया हो। दूसरा राइडर, जिसने विल को नहीं पहचाना था, बोला, ‘जिन रेस्त्रां का बिजनेस फिर चलने लगा है, वे पुराने ढर्रे पर आ गए हैं।’ तब विल को अहसास हुआ कि जब आप ग्राहकों को अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं देते, तब ही असफल होते हैं।

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