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पं. विजयशंकर मेहता:कोरोना के मामले में आम आदमी को समझ नहीं आ रहा कि क्या वह कुंभ और चुनाव वाली जगह नहीं जाता ?

6 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

कोरोना के इस दौर में आम आदमी से कहा गया खुश रहो, निर्भय हो जाओ, अपनी आंतरिक प्रसन्नता को भंग मत होने दो, और इस महामारी से मुकाबला करो। अब आम आदमी कहता है मैं खुश हूं, मगर आबाद नहीं हूं। कोरोना के मामले में उसे समझ नहीं आ रहा कि क्या वह कुंभ और चुनाव वाली जगह नहीं जाता? कुछ साधुओं की कृपा और कुछ नेताओं के वादे का प्रसाद कोरोना की शक्ल में आम आदमी को मिलकर रहेगा।

सारा दृश्य ऐसा हो गया है कि जिसने पीड़ा भुगती है, उसके लिए दर्दनाक, जिन्हें अपनी जिम्मेदारी समझना व निभाना चाहिए, उन कर्णधारों के लिए शर्मनाक। बस, अब खौफनाक दृश्य आना बाकी है। कोरोना से बचने के प्रयासों को कुछ राजनेताओं और नौकरशाहों ने तो तमाशा बना दिया है। व्यवस्था की जाना थी इंजेक्शन व ऑक्सीजन की, प्रदर्शन किया जा रहा है हमने यह किया-हमने वह किया। शास्त्रों में इंजेक्शन को प्रसूत कहा है और ऑक्सीजन को प्राणवायु।

संत-महात्माओं का कहना है यदि प्रसन्नता स्वयं प्रसूत नहीं हुई, तो अवसाद नाम की बीमारी जन्म लेगी और प्राणवायु समय पर उपलब्ध नहीं हुई तो मृत्यु का तांडव होगा। जिम्मेदार लोग शास्त्रों के इस पृष्ठ को फाड़कर अपनी थोथी प्रशंसा का परचम लहरा रहे हैं, आम आदमी एक बार फिर निराशा में डूबता जा रहा है।