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डॉ. वेदप्रताप वैदिक का कॉलम:दुनिया के देश जिस तरह भारत की मदद कर रहे हैं, वह हैरान करने वाला; दुश्मन समझे जाने वाले देश भी साथ आए

12 दिन पहले
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डॉ. वेदप्रताप वैदिक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष - Dainik Bhaskar
डॉ. वेदप्रताप वैदिक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष

भारत में कोरोना की महामारी से लड़ने में दुनिया के देश जितना सहयोग कर रहे हैं, वह हर्षवर्धक और आश्चर्यजनक है। अमेरिका से लेकर आस्ट्रेलिया के देशों ने भारत के लिए भंडार खोल दिए हैं। दुनिया के दर्जनभर से ज्यादा संपन्न और समर्थ देशों ने भारत को ऑक्सीजन-यंत्र, इंजेक्शन, दवाइयां, कोरोना किट्स भिजवाना शुरू कर दिया है।

एयर इंडिया के जहाज भी हजारों ऑक्सीजन मशीनें लेकर भारत पहुंच रहे हैं। ऐसा लगता है कि अगले एक-डेढ़ हफ्ते में ही ऑक्सीजन की कमी पूरी हो जाएगी, क्योंकि भारत के उद्योगपतियों और सरकारी कारखानों ने मिलकर ‘ऑक्सीजन-एक्सप्रेस’ रेलें चला दी हैं और यूरोप और दुबई से भी टैंकरों से लदे जहाज भारत पहुंच रहे हैं।

जो अमेरिका पिछले एक हफ्ते तक संकोचग्रस्त था, उसने भी सहयोग का हाथ बढ़ा दिया है। ऐसा लगने लगा था कि बाइडेन-प्रशासन ट्रम्प के पदचिह्नों पर चल रहा है, क्योंकि उसने कह दिया था कि हमारे पास चाहे 30 करोड़ टीके हों लेकिन वे पहले अमेरिकियों के लिए हैं। फिर कई मंत्रियों, दर्जनों सीनेटरों और चेंबर ऑफ कॉमर्स ने राष्ट्रपति बाइडेन को याद दिलाया कि पिछले साल जब कोरोना की महामारी से अमेरिका त्रस्त हुआ था तो भारत ने ही अपनी दवाइयां तत्काल भिजवाई थीं।

भारत ने अमेरिका समेत दुनिया के दर्जनों देशों को 6-7 करोड़ टीके भिजवाए थे। उन दिनों भारत की छवि विश्व-त्राता की बन गई थी। अमेरिका की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस तथा अन्य महत्वपूर्ण नेताओं ने थोड़ा दबाव बनाया तो बाइडेन-प्रशासन भारतीय कंपनियों को वैक्सीन के लिए जरूरी कच्चा माल देने तैयार हो गया है। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर से भरपूर मदद रवाना हो चुकी है।

भारत में महामारी के प्रकोप ने उसके दुश्मन या प्रतिद्वंद्वी समझे जाने वाले राष्ट्रों के भी दिल दहला दिए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, विपक्षी नेता मरियम नवाज, आसिफ जरदारी व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत के साथ सहानुभूति जाहिर की और मदद के प्रस्ताव दिए हैं।

कराची की अब्दुल सत्तार एधी फाउंडेशन ने कहा है कि भारत चाहे तो वह 50 एंबुलेस और दर्जनों स्वास्थ्यकर्मियों को तुरंत भिजवा सकता है। उनका इतना मानवीय रवैया देखकर लगता है कि भारत-पाकिस्तान चाहे एक-दूसरे को अपना दुश्मन समझते रहे हों, लेकिन इस संकट की घड़ी ने सिद्ध किया है कि आखिरकार ये दोनों देश एक बड़े परिवार के ही सदस्य हैं। पाकिस्तान के कई मित्रों ने फोन पर मुझे बताया कि उन्होंने चीनी टीका लगवाया है। वह बढ़िया, सस्ता और सफल है।

वे पूछ रहे हैं कि आप लोग संकट के इस वक्त में उससे परहेज़ क्यों कर रहे हैं? सच्चाई तो यह है कि चीनी विदेश मंत्रालय दो बार भारत के साथ सहयोग के संदेश भेज चुका है। लेकिन ताजा खबर यह है कि चीनी सरकार ने अपने माल ढोने वाले जहाजों की भारत-यात्रा पर 15 दिन का प्रतिबंध लगा दिया है। कुछ चीनी मित्रों ने आश्वस्त किया है कि वे इस प्रतिबंध को जल्द हटवाएंगे ताकि सिचुआन एयरलाइंस चीनी चिकित्सा सामानों को अविलंब भारत पहुंचा सके।

दोनों देशों के व्यापारी वर्ग ने भी चीनी सरकार से हस्तक्षेप का आग्रह किया है। कोरोना के इस संकट में भारत उसके प्रतिद्वंदी देशों-चीन और पाक से कोई मदद ले या नहीं, यह तो हमारा स्वास्थ्य व विदेश मंत्रालय ही तय करेंगे, लेकिन वे इतना तो कर ही सकते हैं कि इन दोनों देशों का धन्यवाद करें, उनकी सहानुभूति के लिए। इन दोनों देशों के नेताओं को पता है कि दुनिया के लगभग 80 देशों को करोड़ों टीके बांटकर भारत कितनी सराहना अर्जित कर चुका है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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