• Hindi News
  • Opinion
  • Innovation, Not Leaders, Will Save The Earth; We Need A Lot Of Elon Musk And Greta Thunberg

थाॅमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:नेता नहीं, इनोवेशन ही धरती बचाएंगे; हमें बहुत से एलन मस्क और ग्रेटा थनबर्ग की जरूरत है

18 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार - Dainik Bhaskar
थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार

मुझे तो अंत में ग्लासगो सम्मेलन का एक ही सिद्धांत-वाक्य लगा, ‘स्वर्ग सभी जाना चाहते हैं, लेकिन मरना कोई नहीं चाहता’। एक तरफ उदारवादी पर्यावरण कार्यकर्ता आपसे कहेंगे, दुनिया खत्म हो रही है लेकिन इसे बचाने के लिए हमें परमाणु ऊर्जा इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए, जो कि स्वच्छ ऊर्जा का भंडार है।

दूसरी तरफ रूढ़ीवादी पर्यावरण कार्यकर्ता करेंगे, दुनिया खत्म हो रही है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए लोगों पर कार्बन टैक्स का बोझ नहीं लादना चाहिए। वहीं शहरी कार्यकर्ता कहेंगे दुनिया खत्म हो रही है, लेकिन वे अपने आंगन में पवनचक्की, सौर फार्म्स या उच्च गति रेलवे लाइन नहीं चाहते।

उधर आज के ज्यादातर नेता आपसे कहेंगे, दुनिया खत्म हो रही है, इसलिए उन्होंने तय किया है कि उनके उत्तराधिकारी का उत्तराधिकारी उत्सर्जन मुक्त बिजली देने के लिए प्रतिबद्ध होगा, वह भी 2030, 2040 या 2050 तक… यानी ऐसी तारीख पर जब उन्हें अपनी जनता से कोई कष्ट उठाने नहीं कहना पड़ेगा।

मैं ग्लासगो के खिलाफ नहीं हूं। लेकिन 195 देशों के नेताओं ने मिलकर जो कार्ययोजना बनाई है, उससे हम वैश्विक अर्थव्यवस्था को कार्बनमुक्त नहीं कर पाएंगे। असंभव। हम ऐसा तभी कर पाएंगे जब जोखिम उठाने वाले उद्यमी परिवर्तनकारी तकनीकें बनाएंगे, जिनसे साधारण लोग जलवायु पर असाधारण असर डाल पाएं, वह भी बड़े त्याग के बिना।

संक्षेप में हमें कई और ग्रेटा थनबर्ग और एलन मस्क की जरूरत है। यानी जोखिम लेने वाले इनोवेटर जो आधारभूत विज्ञान को ऐसे साधनों या उपकरणों में बदलें, जो आने वाली पीढ़ी के लिए धरती की रक्षा करे। अच्छी खबर यह है कि ऐसा होने लगा है। दो उदाहरण देखिए: पहला, प्लैनेट डॉट कॉम। नासा के तीन पूर्व वैज्ञानिकों द्वारा 2010 में स्थापित ‘प्लैनेट’ के पास कक्षा में लगभग 200 अर्थ-इमेजिंग उपग्रह हैं, जो कि ब्रेड के पैकेट के आकार के हैं और पूरी धरती की समुद्र से घिरी भूमियों को हर 24 घंटे में उच्च रिज़ॉल्यूशन में देखते हैं। दुनिया की किसी भी सरकार के पास यह क्षमता नहीं है।

प्लैनेट के सह-संस्थापक और सीईओ विल मार्शल कहते हैं, ‘सैटेलाइट अब हमें हर कंपनी और हर देश की बैलेंस शीट पर प्राकृतिक पूंजी के बारे में बता रहे हैं। ये केवल आपके व्यवसाय के लाभ-हानि का हिसाब नहीं देंगे, बल्कि पर्यावरण पर आपके सभी प्रभाव भी बताएंगे।’ इस डेटा को उपभोक्ताओं में जागरूकता लाने, उत्पादों के विरोध के लिए प्रेरित करने, सरकारों को जवाबदेह ठहराने, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा आदि के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ये किसानों को भी उनकी फसल और उससे जुड़े जरूरी कदमों की जानकारी दे सकते हैं।

दूसरी कंपनी है हीलिऑन एनर्जी। यह दुनिया के पहले फ्यूजन पॉवर प्लांट पर काम कर रही है। सूर्य समेत अन्य सितारे न्यूक्लियर फ्यूजन से चलते हैं। अगर धरती पर भी इस प्रक्रिया की नकल करें तो हमें अनंत स्वच्छ, सुरक्षित व सस्ती ऊर्जा मिल सकती है। खबरों के मुताबिक हीलिऑन के मौजूदा सिस्टम का जनरेटर 40 हजार घरों को रोशन कर सकता है। इसमें एक एमएचडब्ल्यू बिजली उत्पादन की लागत मात्र 10 डॉलर है, जो कोयला संयंत्र से उत्पादन की लागत से एक तिहाई है।

हमें अपने इनोवेशन इकोसिस्टम में तेजी लाने की जरूरत है, जहां सरकारी फंड की मदद से विज्ञान की सीमाओं को तोड़ा जाए और देशों की सीमाओं से परे जाकर, दुनिया का सर्वश्रेष्ठ हुनर मिलकर स्वच्छ ऊर्जा की तकनीकों को खोजे। फिर ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए तेजी से और बड़े स्तर पर इन तकनीकों को लागू करने पर काम किया जाए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)