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इरा त्रिवेदी का कॉलम:अगर आप अपने नियमित जिम-रूटीन में योग को भी शामिल करेंगे तो इससे फायदा होगा

10 दिन पहले
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इरा त्रिवेदी, लेखिका, स्तंभकार और योग ट्रेनर - Dainik Bhaskar
इरा त्रिवेदी, लेखिका, स्तंभकार और योग ट्रेनर

यह तो सब जानते और मानते हैं कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हमें रोज किसी न किसी तरह की कसरत करनी चाहिए। यही कारण था कि बीते एक दशक में जिम कल्चर का विकास हुआ। इसके प्रभाव-क्षेत्र में केवल महानगर ही नहीं थे, बल्कि छोटे शहर और कस्बों में भी जिम खुलने लगीं।

आज के नौजवान कसरती और सुडौल देह बनाने के लिए बहुत फिजिकल और कार्डियोवैस्कुलर तनाव से गुजर रहे हैं। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि दिल की धड़कनें बढ़ा देने वाला और पसीने में तरबतर कर देने वाला वर्कआउट ही स्वस्थ रहने की इकलौती शारीरिक गतिविधि नहीं है।

इन दिनों हम अकसर ऐसी खबरें सुनते हैं कि युवा और फिट लोग भी जिम में वर्कआउट के समय हार्ट अटैक और कार्डिअक अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं। जिम एक आधुनिक परिघटना है, जिसे सैनिकों का दमखम बढ़ाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और उन्हें पहले से ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए डिजाइन किया गया था।

आज एक जिम रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधियों को मेंटेन करने और काम और सेहत के बीच संतुलन बनाने के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन अगर आप नियमित जिम-रूटीन में योग को भी शामिल करेंगे तो इससे फायदा होगा। योग जिम करने वालों के लिए इसलिए मददगार है, क्योंकि योगासनों से शरीर का लचीलापन और स्फूर्ति बढ़ती है, हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और उसमें हमारे चोटिल होने का खतरा कम रहता है।

योग एक प्राचीन और परिष्कृत विज्ञान है, जिसे हाल में आयुष मंत्रालय की सक्रियता से पूरी दुनिया में लोकप्रियता मिली है। योग के बारे में आमतौर पर कुछ गलतफहमियां रहती हैं, जैसे कि यह वजन घटाने में कारगर नहीं है, क्योंकि इसमें शारीरिक श्रम कम होता है। ये सच नहीं है, क्योंकि ऐसे अनेक योगासन हैं- जैसे कि अष्टांग विनय या सूर्य नमस्कार- जो वजन घटाने में मदद करते हैं। कुछ मानसिक क्रियाएं भी इसमें मददगार हैं।

इससे न केवल शरीर चुस्त-दुरुस्त बनता है, बल्कि आप भीतर से भी सुदृढ़ होते हैं। यह एंडोक्राइन, सर्कुलेटरी, रेस्पिरैटरी, हॉर्मोनल और डाइजेस्टिव सिस्टमों को शारीरिक क्रियाओं के लिए एक-लय में कर देता है। योग में श्वास की क्रियाएं भी हैं, जो तनाव घटाने और रिलैक्स होने में कारगर हैं। एक सूक्ष्म स्तर पर योग प्राणतत्व पर भी काम करता है, जो कि शरीर और मन को शुद्ध करने वाली ऊर्जा है।

अनेक आसनों में मोटापे, वैस्कुलर बीमारियों और हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल का इलाज करने की क्षमता है। नियमित योगासन करने से आप अपने शारीरिक तंत्र को ऊर्जावान बना सकते हैं, उसमें नए प्राण फूंक सकते हैं। हर आसन का अपना प्रभाव है। कुछ आपके अंदरूनी अंगों के लिए कारगर हैं तो कुछ तनाव घटाने के लिए। यह अकारण नहीं है कि आज योग पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया है, क्योंकि यह आधुनिक मनुष्य के अनुकूल है।

योग की खूबसूरती यह है कि इसमें लोग अपने लक्ष्यों और सामर्थ्य के हिसाब से आसनों का चयन कर सकते हैं, जबकि जिम में ऐसा नहीं होता। वहां तो सभी को समान रूप से हेवी वेट उठाना पड़ता है और अपने जॉइंट्स पर प्रेशर डालना पड़ता है। इससे चोटिल होने का अंदेशा रहता है। जबकि योग हर उम्र और हर प्रकार के लोगों के लिए है। इसे कहीं भी किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए विशेष उपकरणों की जरूरत नहीं।

दूसरी तरफ जिम तब एक अच्छा विकल्प साबित होती है, जब आप अपनी मांसपेशियों को मजबूत बनाना चाहते हों। दोनों में से कौन अधिक बेहतर है, यह कहना कठिन है, क्योंकि लोगों के लक्ष्य अलग-अलग होते हैं। दोनों की अपनी जगह है। लेकिन बेहतर होगा कि हम स्वस्थ रहने के लिए जीवन में कुछ नैसर्गिक शारीरिक गतिविधियों को शामिल कर लें, जैसे बागवानी, बच्चों के साथ खेलकूद, साइकिल चलाना आदि। क्योंकि जब तक कोई चीज रोजमर्रा का हिस्सा नहीं बनती, तब तक उसके फायदे नहीं दिखाई देते हैं।

योग जिम करने वालों के लिए इसलिए मददगार है, क्योंकि योगासनों से शरीर का लचीलापन और स्फूर्ति बढ़ती है, हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और उसमें हमारे चोटिल होने का खतरा कम रहता है।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)