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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:सिनेमाघरों के सक्रिय होने की घोषणा हो चुकी है, अगले कुछ माह में भव्य बजट की दो दर्जन फिल्मों का प्रदर्शन होने जा रहा है

4 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

एक तरफ आईपीएल क्रिकेट तमाशा खाड़ी देशों में जारी है तो दूसरी तरफ भारत की महिला क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान के ऊपर बायोपिक बनाई जा रही है। कपिल देव की टीम के विश्व कप जीतने पर फिल्म ‘83’ के प्रदर्शन की भी तैयारी चल रही है। सभी प्रांतों में सिनेमाघरों के सक्रिय होने की घोषणा हो चुकी है।

अगले कुछ माह में भव्य बजट की दो दर्जन फिल्मों का प्रदर्शन होने जा रहा है। अब दर्शक के पास बहुत से विकल्प होंगे। महिला क्रिकेट और पुरुष खिलाड़ियों के लिए बनाए गए स्टेडियम लगभग समान लंबाई-चौड़ाई के होते हैं। रानी मुखर्जी अभिनीत फिल्म ‘दिल बोले हड़िप्पा’ में प्रमुख पात्र जिस क्षेत्र में रहती है वहां महिलाओं को क्रिकेट खेलने के अवसर नहीं दिए जाते। रानी मुखर्जी अभिनीत पात्र पुरुष वेश धारण करके खेलती है।

पाकिस्तान से खेले जा रहे मैच में पाकिस्तान का कप्तान यह भांप लेता है कि पुरुष वेश में जबरदस्त बल्लेबाजी करने वाली एक महिला है। वह एतराज दर्ज करता है तो रानी स्पष्ट करती है कि प्रतियोगिता की नियमावली में कोई जेंडर भेद नहीं दर्ज है। पराजय होने के डर के कारण यह तकनीकी सवाल उठाया जा रहा है। अंपायर एतराज को खारिज करता है और रानी अभिनीत पात्र एक जोरदार शॉट खेलकर अपनी टीम को विजय दिलाती है।

महिला हॉकी खेल पर बनी फिल्म ‘चक दे इंडिया’ बहुत सफल रही थी। इस फिल्म में शाहरुख खान ने कोच कबीर खान की भूमिका प्रभावोत्पादक ढंग से अभिनीत की थी। भारत में फिल्म और क्रिकेट के लिए जुनून लगभग समान है। अंग्रेज अपने हर गुलाम देश में क्रिकेट खेलते रहे। आशुतोष गोवारिकर और आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ सार्थक सफल साबित हुई। ज्ञातव्य है कि हॉकी के जादूगर माने जाने वाले ध्यानचंद पर बायोपिक के अधिकार पूजा और आरती शेट्टी के पास थे।

शेट्टी बहनों के गहरे मित्र रणबीर कपूर ने यह भूमिका अस्वीकार कर दी क्योंकि उन्हें फिल्म के लिए हॉकी खेल सीखने और शूटिंग में 3 वर्ष का समय लग सकता था। मीडिया में चल रही कुछ खबराें के अनुसार रणबीर और आलिया का विवाह रणथंभौर में संभावित है। इस समारोह में दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ भी निमंत्रित हैं? कुछ समय तक रणबीर कपूर और कटरीना कैफ साथ साथ रहे हैं।

दीपिका पादुकोण की भी रणबीर से गहरी मित्रता रही है। सभी कपूरों का मिजाज आशिकाना रहा है। उन्होंने अपने परिवार के पुरोधा राज कपूर से आशिकाना मिजाज तो ग्रहण किया परंतु दादा की सृजन शक्ति के निकट पहुंच नहीं पाए। आईपीएल तमाशे की बात आते ही बार-बार पैसे लेकर जीते हुए मैच जानकर हारे जाते हैं।

मैच फिक्सिंग पुराना रोग है। जोड़ियों को भी ऊपर वाला ही बनाता है, यह एक लोकप्रिय भ्रांति रही है। मनुष्य द्वारा किए गए काम का श्रेय हमेशा ऊपर वाले को दिया जाता है। हमारा याद रखना और भूल जाना हमारी सहूलियतें रही हैं। उम्रदराज लोग इस नियम से परे माने जा सकते हैं। हमारा सबसे अधिक प्रिय तमाशा अब चुनाव हो गया है। चुनाव के नतीजों पर भी शर्त लगाई जाती है।

सटोरिया प्रवृत्ति का तो यह हाल है कि कुछ नहीं हो रहा है तो सटोरिया चप्पल हवा में उछाल करके सीधे या उल्टे गिरने पर भी बाजी लगा लेते हैं। प्राचीन कथा में तो महिला भी दांव पर लगाई गई हैं और पांसे भी आमंत्रित किए जाते रहे हैं। जाने क्यों तंत्र-मंत्र पर विश्वास करने वाले भूभाग में गरीबी, अन्याय और असमानता मिटाने का कोई मंत्र नहीं है।

संभवतः इसलिए नीरद चौधरी ने इस भूभाग को ‘द कॉन्टिनेंट ऑफ़ सर्से’ कहा है। बहरहाल अनेक फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस प्रदर्शन मेले में एसएस राजामौली की फिल्म ‘आरआर’ का जिक्र नहीं कर पाया। फिल्मों से सामाजिक सोद्देश्यता को गायब करने वाले राजामौली बहुत से समीकरण बदल सकते हैं।

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