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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:ये लोगों की मदद करने का वक्त है, जिंदगी की रोशनी वापस लाने का वक्त है

एक महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

जिंदगी मायूसियों का मज़मा बन गई थी। अभी-अभी थोड़ी-सी रौनक आई है तो अब तमाशायी बनकर हालात मत देखना। जो लोग छिन चुकी जीवन की सुगंध, जिंदगी की रोशनी वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं, यह उनकी मदद करने का वक्त है। पिछले दिनों मेरी चर्चा एक हकीम साहब से हुई।

कुछ इलाज के बारे में चर्चा करते-करते उन्होंने एक बात बोली- आरजू को संभालो, वरना यह हसरत में बदल जाएगी और यही बीमारी की शक्ल होगी। सचमुच बात उन्होंने बड़ी गहरी बोली। आरजू का अर्थ है इच्छा, तमन्ना और हसरत का मतलब है ऐसी कामना या वासना जो पूरी न हो सके।

हमारी हसरतों का अगला कदम है यह बीमारी। आरजू दिल और दिमाग में रहती है, हसरत मन में होती है। मन तो मुर्दों को भी नहीं छोड़ता। यह किस खराब स्तर तक जा सकता है, हम कल्पना भी नहीं कर सकते। इतिहास गवाह है दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला क्लियोपैट्रा की लाश को कब्र से चोरी कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

यह घिनौनी हरकत मन ने ही करवाई थी। इतने गंदे-गंदे काम करवा देता है कि हम थककर अपने ही मन से लाचार हो जाते हैं। जरा सावधान रहिएगा। अब, जब मन को फिर मौका मिल गया है बाहर इधर-उधर घूमने का, तो कहीं वह तीसरी लहर के लिए खिड़कियां खोल देने जैसा गलत काम न करवा दे।