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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:क्रिकेट प्रेरित फिल्में, जो याद दिलाती हैं अनेक महत्वपूर्ण घटनाएं

21 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

रिलायंस फिल्म निर्माण कंपनी के लिए कबीर खान ने ‘83’ नामक फिल्म बनाई है। जिसका प्रदर्शन अगले माह होने जा रहा है। ज्ञातव्य है कि कपिल देव के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने पहला विश्व कप जीता था। प्रतियोगिता के लिए खेले गए एक मैच में भारत के पांच बल्लेबाज अत्यंत कम रन बनाकर आउट हो गए थे। सटोरियों ने भारत के जीतने की कल्पना ही नहीं की थी।

अतः भारत पर दांव लगाने वालों को एक रुपए के 100 रुपए तक के भाव दिए थे। इस दौर में सबसे मजबूत टीम वेस्टइंडीज की थी। जिसने हर प्रतियोगी टीम को भारी पराजय दी थी। भारत और वेस्टइंडीज फाइनल में पहुंचे भारतीय टीम एक साधारण से स्कोर पर आउट हो गई। सब ने यह मान लिया कि वेस्टइंडीज की जीत होगी।

मोहिंदर मदनलाल मध्यम गति के तेज गेंदबाज रहे परंतु उस दिन हवा में नमी के कारण उनकी गेंद बहुत स्विंग हो रही थी। विवियन रिचर्ड्स ने निहायत ही हिकारत से मदनलाल की गेंद को मारा। कपिल देव ने 30 गज दौड़कर कैच लिया। यह कैच ही निर्णायक साबित हुआ। भारत की टीम में नया जोश आ गया। भारत ने जीत दर्ज की और मुंबई के शिवाजी पार्क क्षेत्र में सारी रात जश्न मनाया गया।

भारत के सभी शहरों में दीपावली सा उत्सव मनाया गया। आज कपिल देव को क्रिकेट संगठन का अध्यक्ष होना चाहिए। ज्ञातव्य है कि मोहिंदर अमरनाथ के पिता लाला अमरनाथ भी अपने दौर में भारत की टीम के कप्तान रहे हैं। क्रिकेट इतिहास में सर्वकालिक महान खिलाड़ी डॉन ब्रैडमैन हुए हैं। उनके दौर में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड को लगातार हरा रहा था।

इंग्लैंड के कप्तान डगलस जार्डिन ने गेंदबाज हेरोल्ड लारवुड के साथ योजना बनाई कि लारवुड तेज गति से गेंद ब्रैडमैन के पैर की ओर डालें और एक साइड पर पांच क्षेत्र रक्षक कैच लपकने के लिए तैयार रहेंगे। इस नीति के खिलाफ इंग्लैंड के आम आदमी ने प्रदर्शन किया। बात यहां तक पहुंची कि दोनों देश के रिश्ते खराब होने का अंदेशा हुआ।

गौरतलब है कि इस घटना के बाद हेरोल्ड लारवुड ने ऑस्ट्रेलिया में बसना तय किया। वह क्रिकेट छोड़ चुका था। ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों ने कभी हेरोल्ड लारवुड को उस तरह की गेंदबाजी के लिए दोष नहीं दिया और उन्हें सामान्य नागरिक की तरह रहने दिया। एक गुजरता दौर में महाराजा होल्कर के प्रोत्साहन से होलकर क्रिकेट टीम का गठन किया गया।

खिलाड़ियों को होल्कर मानद पद दिए गए। उन्हें मासिक वेतन मिलता था। सैयद मुश्ताक अली धुआंधार बल्लेबाजी करते थे। वे एक दिवसीय खेल के अस्तित्व में आने के दशकों पूर्व ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते थे। कोलकाता में आयोजित मैच में कैप्टन मुश्ताक अली का चयन नहीं किया गया। क्रिकेट बोर्ड में राजनीति हमेशा से चलती रही है।

मैच के पूर्व बंगाल के नागरिकों ने सड़कों पर आकर नारे लगाए कि मुश्ताक नहीं तो खेल नहीं होने देंगे। तत्कालीन क्रिकेट बोर्ड को उन्हें खिलाना ही पड़ा। होल्कर टीम के कप्तान कर्नल सीके नायडू रहे। उम्रदराज होने पर उन्हें रणजी ट्रॉफी में नहीं लिया गया। 59 वर्ष के कर्नल नायडू ने उत्तर प्रदेश की टीम की ओर से खेलना जारी रखा। उस उम्र में उन्होंने शतक भी मारा।

आशुतोष गोवारीकर और आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ भी यादगार फिल्म मानी जाती है। क्रिकेट का खेल मात्र एक दर्जन देशों में ही खेला जाता है। यह खेल अंग्रेजों के गुलाम रहे देशों में खेला जाता है। चीन, अमेरिका और यूरोप में यह नहीं खेला जाता। पी जी वोडहाउस ने स्कूल में खेले गए क्रिकेट पर भी कथाएं लिखी हैं।

भारत में आम आदमी क्रिकेट के खेल से प्रेम करता है। पान बेचने वाले तक स्वयं को इस खेल का विशेषज्ञ मानते हैं। कहा जाता है कि ‘इट्स नॉट क्रिकेट’। अतः ईमानदारी से खेला गया क्रिकेट एक मुहावरा बन चुका है। इन बातों के कारण ऐसा लगता है कि कबीर खान द्वारा निर्देशित फिल्म ‘83’ बहुत ध्यान कमाएगी। ज्ञातव्य है कि सुभाष घई ने भी ‘इकबाल’ नामक क्रिकेट प्रेरित फिल्म बनाई है।