एन. रघुरामन का कॉलम:रोचक चीजों के लिए अपनी आंखों से परे जाकर देखें

16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

क्या आपने कभी कल्पना की है कि पक्षियों के घोंसले भी हमारी अचल संपत्ति जितने ही कीमती हो सकते हैं? क्या आप इससे वाकिफ थे कि पक्षियों की दुनिया में भी पहलवान पक्षी होते हैं, जो कमजोर पक्षियों का घोंसला बलपूर्वक खाली कराकर उस पर कब्जा कर लेते हैं? और आखिर में क्या आप भरोसा कर सकते हैं कि पक्षी अपना घोंसला, अंडे व बच्चों को बचाने के लिए अपनी मौत का नाटक तक कर सकते हैं? अगर आपके पास इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहींं, तो आगे पढ़ें।

इस रविवार को मैं मुंबई के पास कर्जत स्थित फार्महाउस जाने के लिए नवी मुंबई से गुजर रहा था, कर्जत में अजय देवगन जैसे अभिनेताओं के घर हैं। जब मैं अरब सागर की खाड़ी के किनारे ड्राइव कर रहा था, तो दो अलग-अलग दृश्य देखे। सुंदर फ्लेमिंगो का एक समूह आसपास उड़ रहा था। हर साल सर्दियां शुरू होते ही देश के विभिन्न हिस्सों से करीब एक लाख फ्लेिमंगो का इस अभयारण्य में जमघट लगता है।

मेरे जैसे ढेरों पक्षी प्रेमी इन्हें देखकर खुश होते हैं, कार रोककर मोबाइल से तस्वीरें लेकर आगे बढ़ जाते हैं। नवी मुंबई में ढेरों फ्लेमिंगो की करीबन सात महीने तक उपस्थिति को देखते हुए पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे से नवी मुंबई को ‘फ्लेमिंगो सिटी’ के रूप में ब्रांड करने की मांग की है। और इस शुक्रवार को उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए पर्यावरण व वन सचिवों से इस पर विचार करने के लिए कहा है।

जहां इतनी संख्या में पक्षी उड़ रहे हों, वहां कुछ पंख मिलना आम बात है। चूंकि इंसानी दुनिया की तरह उनका कचरा इकट्ठा करने का सिस्टम नहीं होता, मैं ये देखकर चौंक गया कि छोटे पक्षी पंख इकट्ठे कर रहे थे। (वो शायद साथ उड़ रहे उनके बच्चों के रहे होंगे) शुरू में लगा कि शायद वे अपना घोंसला बना रहे हों। पर जब देखा कि वे पक्षी एक पेड़ के अासपास पंख छोड़कर आ रहे हैं, जहां उनका घोंसला है और वापस आकर नए पंख इकट्ठा कर रहे हैं, तो मैं हक्का-बक्का रह गया।

और तब पता चला कि प्रवासी पक्षियों में भी घुसपैठिए होते हैं जो आसरे की तलाश में घोंसलों पर अवैध कब्जेे की कोशिश करते हैं। पक्षियों की दुनिया में भी एेसे पक्षी होते हैं, जो खाना-सोना तो चाहते हैं, पर घोंसला बनाना नहीं चाहते। एेसे में वे कमजोर पक्षी खोज लेते हैं और घोंसले पर अधिकार जताने के लिए लड़ते हैं, फिर चाहे वह पेड़ पर हो, ठूंठ हो या दीवार की खोह पर। पक्षियों की दुनिया में स्तब्ध कर देने वाली गतिविधियों को साबित करने के लिए कनाडा में ससकाचवान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ‘पंखों का डर’ अवधारणा पर काम कर रहे हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक पक्षी भी आक्रमणकारियों को रोकने के लिए मनोवैज्ञानिक संघर्ष में लिप्त होते हैं। जाहिर है पक्षियों को पंखों से मुक्त घोंसले में जाने से कोई हिचक नहीं। पर जब वे घोंसले के इर्द-गिर्द सफेद पंखों की झलक देखते हैं, तो ये उन्हें किसी हत्या के दृश्य का संकेत लगता है। वे सोचते हैं कि सांप या कोई हत्यारा वहां छुपा हुआ है।

पक्षी अस्त-व्यस्त घोंसला देखकर घबरा जाते हैं और सांप जैसे किसी हत्यारों से मुठभेड़ में अपना जीवन खतरे में डालने के बजाय दूसरी जगह उड़ जाते हैं। दूर से आसानी से नजर आने वाले सफेद पंख, काले पंखों की तुलना में बचाव के लिए प्रभावी साबित होते हैं।

फंडा ये है कि अगली बार अपने घर या बगीचेे के आसपास पंखों के साथ लटकी सूखी घास वाला अस्त-व्यस्त घोंसला देखें, तो उसे साफ करने की कोशिश न करें, क्योंकि हो सकता है कि घुसपैठियों को चकमा देने के लिए उन्होंने अपनी मौत का झूठा नाटक किया हो। सफाई करके आप उनके अंडे और बच्चों को खतरे में डाल सकते हैं।