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एन. रघुरामन का कॉलम:क्रिकेट जैसे ज्यादातर स्थापित उत्पाद वैश्विक स्तर पर जाने के लिए नया अवतार अपना रहे; नई दुनिया का सामना करने तैयार हो जाएं

2 वर्ष पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

प्रबंधन का अनुभव बताता है कि किसी भी उत्पाद को सफल होना है तो उसे किसी संस्कृति में नहीं बंधना चाहिए। वह दुनिया के केवल एक हिस्से को अपील नहीं कर सकता। क्रिकेट काफी खेला और देखा जाता है, लेकिन एक और दुनिया है जो इस खेल को नहीं समझती। आपको याद होगा कि एलबीडब्ल्यू ऐसा नियम है, जो कई क्रिकेट प्रेमियों को भी भ्रमित करता है। इसीलिए पिछले साल बना इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) क्रिकेट को बदलने जा रहा है, ताकि क्रिकेट से प्रेम न करने वाले भी इसे पसंद करें।

वे जल्द ही इस खेल से जुड़े कई शब्द बदलने वाले हैं। नए फॉर्मेट जानने के लिए तैयार हो जाएं। पहली चीज यह होगी कि ‘ओवर्स’ जैसा कुछ नहीं होगा। उन्हें बस ‘बॉल्स’ कहा जाएगा। मान लीजिए एक टीम ने 6 बॉल में 13 रन बनाए, तो कमेंटेटर एक ओवर में 13 रन की बजाय 6 बॉल में 13 रन कहेगा। साथ ही ईसीबी में 6 बॉल का एक ओवर खत्म हो जाएगा। अब ईसीबी की आठ नई टीमें 100 बॉल खेलेंगी, जिसमें 10-10 बॉल के ब्लॉक, मैदान के दोनों छोरों से बारी-बारी फेंके जाएंगे और हर बॉल को मैदान पर मौजूद बड़ी स्क्रीन पर गिना जाएगा।

ईसीबी नए दर्शक आकर्षित करने की कोशिश करेगा, इसलिए वे चाहते हैं कि टीवी चैनल पर कमेंटेटर खेल समझाने के पारंपरिक तरीकों से हटें। ‘ओवर’ की अवधारणा और शब्द को खत्म करने के साथ उन्होंने ‘विकेट’ शब्द हटाने का भी फैसला लिया है। जी हां, इसे अब ‘आउट’ कहा जाएगा। अगर टीम ने एक विकेट पर, 6 बॉल में 13 रन बनाए हैं तो इसे ‘एक आउट पर 6 बॉल में 13 रन’ कहा जाएगा। यानी क्रिकेट को रन, बॉल और आउट, इन तीन शब्दों से आसान किया जाएगा।

ये ऐसे शब्द हैं जो बेसबॉल में काफी इस्तेमाल होते हैं, जो अमेरिका जैसे गैर-क्रिकेट देशों में बहुत मशहूर है। ईसीबी को नए टीवी दर्शक हासिल करने की उम्मीद है क्योंकि बीबीसी के पास मुख्य टेरेस्टियल चैनलों पर फाइनल समेत 10 मैच दिखाने के अधिकार हैं। मैच शाम के प्राइम स्लॉट पर दिखाए जाएंगे। उधर, क्रिकेट को जेंटलमेन गेम बताने वाले पारंपरिक क्रिकेट प्रेमी नाराज हैं और इसे एक हथकंडा और ऐसे खेल के ‘अमेरिकीकरण’ का मूर्खतापूर्ण प्रयास बता रहे हैं, जिसे यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया में लाखों लोग खेलते हैं।

हालांकि आउट होने के तरीकों में से एलबीडब्ल्यू को हटाने के विचार को नकार दिया गया। लेकिन ईसीबी ने खेल आसान बनाने की पूरी तैयारी की है। दूसरे खेल पसंद करने वाले बच्चों, पुरुषों और महिलाओं को एक साथ आकर्षित करने के लिए नए टूर्नामेंट में पुरुषों और महिलाओं के मैच एक ही तारीख को, एक ही जगह होंगे और दोनों मैचों के बीच लाइव मनोरंजक कार्यक्रम भी होंगे।

भारत के आईपीएल की तरह ‘बिग बैश लीग’ आयोजित करने वाला ऑस्ट्रेलिया पहले ही कुछ नियम बदल चुका है, जैसे वहां बीच इनिंग में सब्सिट्यूट लाया जा सकता है। ईसीबी भी ऐसे बदलावों पर विचार की कोशिश कर रहा है। एशिया में आईपीएल व्यूअरशिप की सफलता के बाद ईसीबी चाहता है कि नई व्यूअरशिप के साथ ‘द हंड्रेड लीग’ भी सफल हो। यह पिछले साल शुरू होनी थी लेकिन कोविड-19 के कारण आगे बढ़ गई थी। अब यह इस साल आयोजित होगी।

फंडा यह है कि क्रिकेट जैसे ज्यादातर स्थापित उत्पाद अब वैश्विक स्तर पर जाने और नए ग्राहक आकर्षित करने के लिए नया अवतार अपना रहे हैं। तो ज्यादा ग्राहक पाने के लिए खुद को बदलने से आपको किसने रोका है? नई दुनिया का सामना करने के लिए तैयार हो जाएं।