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एन. रघुरामन का कॉलम:अगर आप अलग रास्ता चुनें तो प्रतिस्पर्धा हमेशा कम मिलेगी

15 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

देहरादून एयरपोर्ट पर 40 साल के टैक्सी ड्राइवर से थोड़े-बहुत परिचय के बाद जब उसने पूछा कि क्या आप फिल्म-विज्ञापनों के लिए किसी सेट-कॉर्डिनेटर को जानते हैं, तो उसकी तरफ देखते हुए मेरे पास कोई जवाब नहीं था। मेरा चेहरा देखकर वो बोला, ‘कोई बात नहीं सर, आपने बताया कि आप दशकों से मुंबई में हैं तो मुझे लगा शायद किसी को जानते होंगे।

खासकर वेंडर्स, जो फिल्म क्रू को शूटिंग में इस्तेमाल एक्सेसरीज-बाकी सामान मुहैया कराने में मदद करते हैं।’ जब मैंने पूछा कि ये अटपटा सवाल क्यों, तो उसने तपाक से कहा, ‘सर 2015 में उत्तराखंड में सिर्फ 15 प्रोजेक्ट्स शूट हुए थे, इसमें फिल्मों के अलावा एड और वेब सीरीज भी शामिल थीं, जबकि 2021 में ये बढ़कर 217 हो गए।

इस साल अभी तक 98 प्रोजेक्ट हो चुके हैं और अब सितंबर से अप्रैल 2023 तक सीजन शुरू हो रहा है। संक्षेप में कहूं तो देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे 1800 प्रोजेक्टस शूट होंगे, इस मामले में पड़ोसी राज्य हिमाचल हमारा सबसे कड़ा प्रतिस्पर्धी है बावजूद इसके हमारे यहां कुल प्रोजेक्ट्स के 10% आएंगे।’ उसकी स्पष्टता, विचार प्रक्रिया, ये क्षेत्र, जिसे वह अपनी जीविका बनाना चाह रहा था, ये ज्ञान देखकर मैं अवाक् था।

तब मुझे कहीं पढ़ा याद आया कि उत्तराखंड बीते पांच सालों में ने‌शनल फिल्म अवॉर्ड्स की ओर से तीन बार ‘बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का खिताब जीत चुका है। अगले चंद मिनटों में उसने उत्तराखंड में शूट हुई फिल्मों की लिस्ट सुना दी, इसमें शाहिद कपूर की कबीर सिंह, बत्ती गुल मीटर चालू, आलिया भट्‌ट की सड़क, राजकुमार राव की बधाई दो, अजय देवगन अभिनीत शिवाय, जिसमें मसूरी की एक प्रसिद्ध होटल को बुल्गारिया जैसी लोकेशन के रूप में दिखाया गया।

जॉन अब्राहम की बाटला हाउस और सबसे चर्चित द कश्मीर फाइल्स के कुछ दृश्य भी यहीं शूट हुए। जब मैंने पूछा कि तुम्हें खुद इतनी गहरी जानकारी है तो फिर हम जैसे बाहरी लोगों से मदद की जरूरत क्यों है, उसने कहा, ‘ईश्वर की दया से मेरा काम अच्छा चल रहा है, पर मैं अपने बेटे को मुंबई काम करने के लिए भेजना चाहता हूं ताकि एक आइडिया लगे कि मुझे यहां कितना निवेश करने की जरूरत है ताकि अपना बिजनेस फैला सकूं।

वह बॉलीवुड में बड़े और विभिन्न प्रोडक्शन हाउस के साथ जुड़े सेट कॉर्डिनेटर से नेटवर्किंग करने के लिए किसी के साथ असिस्टेंट के रूप में काम करेगा, ताकि फिल्मों की सर्वे टीम लोकेशन पर आकर हम जैसे वेंडर्स से संपर्क करे, उससे पहले ही हम कॉन्ट्रेक्ट हासिल कर लें। मुझे बेहतर समझ आए, इसके लिए उसने ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ को केस स्टडी के रूप में बताया। उसने कहा कि फिल्म क्रू 56 दिनों तक राज्य में रहा और उनकी जरूरतों पर कुछ करोड़ खर्च किए।

आपको हैरानी होगी कि इस साल शूटिंग कारोबार 100 करोड़ रु. से ज्यादा का हो गया होगा। होटल्स के खाते में उस खर्च का अच्छा-खासा हिस्सा आता होगा, पर हम जैसे वेंडर्स का भी शेयर है। उसने आत्मविश्वास से कहा कि मैं बस उस खर्च का थोड़ा हिस्सा चाहता हूं। ऐसा नहीं है कि राज्य के कुछ लोग ही अलग सोच रहे हैं, राज्य सरकार ने भी अलग रास्ता अपनाया है।

पड़ोसी राज्य हिमाचल में ऐसे शूटिंग प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी मिलने में कठिनाइयों का अहसास होने के चलते उत्तराखंड ना केवल सिंगल-विंडो सिस्टम लाया है, बल्कि अगर निर्माता फिल्म का 75% शूट यहां करते हैं तो उन्हें सब्सिडी भी मिलेगी। आश्चर्य नहीं कि ग्लैमर इंडस्ट्री उत्तराखंड को पसंद कर रही है।

फंडा यह है कि सफल होने वाले कुछ अलग नहीं करते, वे उन्हीं चीजों को अलग तरीके से करते हैं, जैसे देहरादून के ड्राइवर ने किया।