एन.रघुरामन का कॉलम:क्या आपके पास ‘मी, मायसेल्फ’ वाट्सएप ग्रुप है?

2 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

कितनी बार आपको अपने स्कूली मित्र की वेडिंग एनिवर्सरी विश करने के लिए याद दिलाया गया और आप विश करना भूल गए? कितनी बार आप अपने सेल्स स्टाफ को कहना भूल गए कि वो नए व्यक्ति से बात कर लें जो कि आपके हिसाब से भविष्य में क्लाइंट हो सकते थे?

बच्चे ने कितनी बार याद दिलाया कि उसके लिए हेयर बैंड लाना है और घर पहुंचते ही याद आता है कि आप चूक गए हैं? और कितनी बार रातें खराब हुई हैं क्योंकि आप अपने नवजात के लिए डायपर लाना भूल गए हैं और पत्नी कहते-कहते थक गईं हैं कि ‘जब तुम्हें ऑफिस के अलावा और कुछ याद नहीं रहता तो तुमने मुझसे शादी ही क्यों की थी!’

बेचारा...वह नहीं जानती कि पति आधा दिन यह याद रखने में बिता देते हैं कि उन्होंने किसको क्या काम दिया। अगर आप भी इसी तरह के मैनेजर हैं तो यह आइडिया आपके लिए है।

आप बच्चे से हमेशा माफी मांग सकते हैं और वीकेंड पर वादा पूरा कर सकते हैं। पर किसी भी सफल मैनेजर या टीम लीडर के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात उन कर्मचारियों से काम का अपडेट लेना भूल जाना है, जो आपकी दबाव में भूलने की आदत (स्वाभाविक है दबाव के कारण ना कि डिमेंशिया से) का फायदा उठाते हैं और कभी काम पूरा नहीं करते, तय समय में वापस रिपोर्ट नहीं करते।

मुझे इसका एक रास्ता अपने एक प्रकाशक मित्र डॉ. पीयूष कुमार के पास मिला, जिनके फोन में चंद वाट्सएप ग्रुप्स हैं जैसे ‘मी, मायसेल्फ’ और ‘मी, मायसेल्फ न्यूएस्ट’। उन्होंने पहला ग्रुप उन सब कर्मियों का बनाया जो उन्हें सीधे रिपोर्ट करते हैं और फिर उन्हें रिमूव कर दिया।

हालांकि फोन पर ग्रुप बना रहा जबकि बाकी लोगों ने ये सोचकर डिलीट कर दिया कि बॉस को शायद अहसास हो गया हो कि ऑफिस का ग्रुप पहले ही है, ऐसे में डुप्लीकेट की जरूरत नहीं। और फिर उन्होंने मेन ग्रुप पर काम सौंपकर, जब भी रिपोर्ट की जरूरत होती तो उसे अपने ‘मी मायसेल्फ’ ग्रुप में पोस्ट करना शुरू कर दिया।

घर लौटते समय वह कार की पिछली सीट पर बैठकर सबको एक-एक करके काम पूरे होने वाली रिपोर्ट मांगते। अगर उन्हें संतोषजनक जवाब मिलता, तो वह टास्क उस ग्रुप से डिलीट कर देते, जिसके वह इकलौते सदस्य हैं।

जब भी उन्हें नया आइडिया आता तो वह ‘मी, मायसेल्फ न्यूएस्ट’ ग्रुप में शेयर करते, जो उन्होंने पत्नी को जोड़कर बनाया था और फिर उन्हें रिमूव कर दिया था। उनका मानना है कि दिमाग सुपरकम्प्यूटर है और 24/7 सोचता है। चूंकि हम वो बिंदू लिखते नहीं, ऐसे में वे हवा में फुर्र हो जाते हैं। दो और चीजें वह करते हैं। दिन में जहां भी जाते हैं, वहां स्टीकर्स-पेंसिल्स रखते हैं, टॉयलेट में भी।

वह तुरंत लिख लेते हैं, स्टीकर को वर्क स्टेशन पर लाकर, उसकी तस्वीर खींचकर ‘मी, मायसेल्फ’ ग्रुप में डाल देते हैं। उनकी कार में एक इलेक्ट्रॉनिक स्लेट भी है जिसे उन्होंने बच्चे के लिए लिया था। जब कार सिग्नल पर होती है तो वे स्लेट पर लिखते हैं और तस्वीर खींचकर वाट्सएप पर डाल देते हैं।

और अब पूरा ऑफिस चकित है कि कैसे बॉस की याददाश्त तगड़ी हो गई है और कई आइडियाज़ हैं। उनका मानना है कि दिमाग में लाखों आइडियाज़ आते हैं, उन्हें लिखने से हम उन थोक आइडियाज़ में अच्छे बिजनेस आइडिया चुन सकते हैं।

फंडा यह है कि अगर मोबाइल पर आपका अपना ‘मी मायसेल्फ’ वाट्सएप ग्रुप है तो आप कोई भी काम याद रख सकते हैं, फिर चाहे वह करोड़ों का टेंडर भरने का काम हो या छह महीने के बच्चे के लिए डायपर खरीदना। आप जीवन में शायद ही कभी कुछ भूल सकते हैं क्योंकि आप अपना छह से सात घंटे मोबाइल फोन पर बिताते हैं!