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एन. रघुरामन का कॉलम:अगर आप जिम्मेदार ब्रांड या व्यक्ति हैं, तो आप अपना स‌र्वश्रेष्ठ देकर अपने ऊपर निर्भर लोगों को निराश नहीं करते

16 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

गुरुवार सुबह मैं सैकड़ों छात्रों से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए ग्वालियर जा रहा था, उनके लिए यह कॉलेज जीवन का पहला दिन था। इंडिगो की उस उड़ान में मेरे साथ विभिन्न शहरों जैसे पुणे, हैदराबाद, मुंबई के यात्री थे। विमान इंदौर में अपने तय पड़ाव पर रुका और यहां से भी यात्री बैठे। ठीक उसी समय बाहर तापमान धीरे-धीरे गिरने के साथ काले बादल एयरपोर्ट रनवे की दृश्यता कम करने लगे और विमान की लैंडिंग-टेकऑफ मुश्किल हो गया।

जैसे ही बारिश शुरू हो गई, कैप्टन को सूचना मिली कि ग्वालियर में लैंडिंग के लिए दृश्यता शून्य है। कंपनी ने यात्रियों से विमान के अंदर ही दृश्यता बेहतर होने तक इंतजार करने को कहा। दिलचस्प रूप से यात्री मौसम का अनुमान बताने वाली ‌विभिन्न वेबसाइट से खुद देखकर स्टाफ को बता रहे थे कि पूरे दिन मौसम बेहतर नहीं होने वाला। 2.20 घंटे विमान में इंतजार करने के बाद इंडिगो ने फ्लाइट निरस्त की और यात्रियों को अगले दिन की फ्लाइट के लिए लौटने को कहा, खराब मौसम की भविष्यवाणी से वो भी पक्की नहीं थी।

कुछ यात्रियों के पास उस अनजान शहर में रुकने के लिए पैसे नहीं थे, तो कुछ ग्वालियर में बीमार माता-पिता से मिलने के लिए तुरंत जाना चाहते थे। पर एयरलाइन कर्मी नियम पुस्तिका से चले और ये कहते हुए अतिरिक्त मदद से मना कर दिया कि उनके हाथ बंधे हैं। पुणे-हैदराबाद के यात्रियों का भी सोचें जो मुंबई से विमान में चढ़े और पहले ही छह घंटे से ज्यादा अंदर बैठे थे।

इस बीच मैंने और मेरे सहयोगी ने इंदौर से ग्वालियर की 500 किलोमीटर की दूरी सड़क से नौ घंटे में तय करने का फैसला किया, जबकि बीच में कुछ खराब पहाड़ी रास्ता भी है। चूंकि मैंने आयोजकों को तीन महीने पहले वादा कर दिया था कि मैं इस दिन आऊंगा, मैंने ये जोखिम भरी यात्रा करने का तय किया। मैं ये बात जानता हूं कि इस तरह के कार्यक्रम घर में शादी जैसे होते हैं, जिनके पीछे कई तैयारियां होती हैं। मैं चाहता तो ये कहकर आसानी से मना कर सकता था कि ‘मुझे विमान की टिकट दो और मैं वादे के मुताबिक वहां आऊंगा।’

मैंने वैसा नहीं किया क्योंकि मैं दृढ़तापूर्वक मानता हूं कि जिम्मेदार व्यक्ति व ब्रांड्स उन पर निर्भर लोगों को कभी निराश नहीं करते। चूंकि आयोजकों ने मुझसे आशा लगाई थी, ऐसे में उन्हें मना करने का नैतिक अधिकार मेरे पास नहीं था, वो भी सिर्फ इसलिए कि फ्लाइट कैंसल हो गई। कम से कम मुझे तो बदलती परिस्थितियों से लड़ते हुए वहां तक पहुंचने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।

इसलिए मैंने दोपहर को 2.40 पर इंदौर एयरपोर्ट से ग्वालियर तक की जोखिम भरी सड़क यात्रा शुरू की और रात 12 ठीक एक मिनट पहले ग्वालियर होटल पहुंचा, शुक्रवार को कार्यक्रम शुरू होने से एक दम नौ घंटा पहले। यकीन मानें, ये कई कारणों से जोखिम भरा था। ना सिर्फ रास्ते भर बारिश होती रही, दृश्यता भी बहुत खराब थी। हमें आगे कार तक नहीं दिख रही थी, जब तक कि उसके बंपर तक नहीं पहुंच गए। ऊपर से कई ट्रक भी आगे थे, जिनमें कुछ पर ना टेल लाइट थी और ना रेडियम कि हमें चेता सकें।

ऐसे समय में मुझे हमेशा याद आता है कि कैसे मुंबई में 2008 आतंकी हमले के दौरान ताज होटल के कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए जान गंवाई। कर्मचारी हमले के दौरान भाग सकते थे, पर उन्होंने मेहमानों की जिंदगी बचाने की कोशिश की। कोई ताज्जुब नहीं कि वे हमेशा दुनिया के अग्रणी ब्रांड्स में से एक बने रहते हैं।

फंडा यह है कि अगर आप जिम्मेदार ब्रांड या व्यक्ति हैं, तो आप अपना स‌र्वश्रेष्ठ देकर अपने ऊपर निर्भर लोगों को निराश नहीं करते, भले ही इसमें कुछ जोखिम क्यों ना हो।