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एन. रघुरामन का कॉलम:आप महात्वाकांक्षी कर्मचारी हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं तो मीटिंग में संस्थान को आगे बढ़ाने वाले आइडियाज़ पर रोशनी डालें

15 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

दोपहर के तीन बज रहे थे। मेरी नॉलेज एक्सपर्ट्स से एक घंटे की मीटिंग होनी थी, मतलब वे लोग आला दर्जे के बुद्धिजीवी थे। पारदर्शी शीशे से मैं उन सभी को बोर्ड रूम के बाहर इंतजार करते देख सकता था। उन्होंने भी देखा कि मेरी पहले वाली मीटिंग खत्म नहीं हुई थी और जारी थी। मैंने जल्द खत्म करने की कोशिश की, फिर भी उनकी मीटिंग 12 मिनट लेट हो गई।

चूंकि उन सबको मेरे पूरे दिन की मीटिंग का शेड्यूल पता था, देरी के लिए मैंने क्षमा मांगी और कहा, ‘माफ करें, सुबह 8.30 बजे से मेरी एक के बाद एक मीटिंग थी।’ उनमें एक वरिष्ठ शख्स तपाक से बोले, ‘सर, हालांकि हमारी भी एक के बाद एक मीटिंग थी और उस पर भी हममें से किसी ने लंच तक नहीं किया।’ चूंकि मैं अपने कॉर्पोरेट अवतार में था, मेरी व्यस्तता वाली बात का जवाब देने के उनके इरादे को भांप गया था और उनके लहजे से आसानी से देख पा रहा था।

उनकी ओर देखे बिना मैंने पूरी दृढ़ता से कहा, ‘आप लोगों ने लंच नहीं किया जबकि इसका समय एक बजे का है, अगर आप सोचते हैं कि ये सुनकर मैं नरम रुख रखूं तो माफ करें, ये आपका बुरा समय प्रबंधन दिखाता है और जाहिर करता है कि आप उन बिंदुओं के साथ नहीं आना चाहते जो कार्यक्षेत्र को हाईलाइट करे, जबकि लंच का कहकर आप सहानुभूति लेना चाहते हैं। क्या मैंने कहा कि मैंने लंच नहीं किया? मैंने कर लिया।

अगर मैं ऊर्जा से भरा नहीं रहूंगा, तो आपकी कोई मदद नहीं कर सकता। चूंकि इस मीटिंग में मेरा उद्देश्य मदद करना था, इसलिए मैंने समय पर खाना खा लिया था। फिर भी मैं आप सबके लिए स्नैक्स ऑर्डर कर देता हूं, चूंकि लंचटाइम पूरा हो चुका है।’ फिर मैंने बोर्डरूम के बाहर खड़े सहायक को इशारे से स्नैक्स लाने के लिए कहा। स्नैक्स आते ही मैंने मेरा स्नैक्स और चाय उनके साथ शेयर किया।

मीटिंग के अगले 45 मिनट तक वो वरिष्ठ व्यक्ति खामोश रहे। तब मैंने उस विषय पर फोकस किया, जो बोर्ड ने मुझे बताया था और चूंकि वो लोग लंच से चूक गए थे, सिर्फ इसलिए मैं किसी भी तरीके से विनम्र नहीं था। उन्हें अहसास हुआ कि मैंने दोनों चीजें की। बतौर लीडर मैंने उन्हें दिन का सबक दे दिया कि लंच नहीं करना उनकी गलती है और ठीक उसी समय कुछ खाने की पेशकश करके मैंने अपना मानवीय सरोकार भी दिखा दिया।

उस विभाग के साथ मेरी अगली मीटिंग अगले महीने तय है और उसका समय दोपहर के 3 बजे है और उसमें कोई स्नैक्स नहीं होगा, भले ही लंच न किया हो, क्योंकि मैंनेजमेंट इतना समय नहीं खर्च कर सकता कि वरिष्ठों को एक ही बात दो बार सिखाई जाए। अगर उन्हें लगता है कि उनके गैर-जिम्मेदाराना बयान पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा, तो वे असली दुनिया में नहीं हैं। याद रखें कि पांच अंकों में तनख्वाह होने से हम लीडर नहीं बन जाते।

हमारे सैनिकों के बारे में सोचें, जो युद्ध के समय सीमाओं पर कई दिनों तक बिना भोजन-पानी के रहते हैं। वे वापस आकर ये नहीं कहते कि ‘मैंने खाना नहीं खाया है।’ बोर्ड रूम कोई युद्ध क्षेत्र नहीं है। जो लोग कहते हैं कि काम में व्यस्त होने के कारण कार में पेट्रोल भराना भूल गए, इसलिए पेट्रोल खत्म होने पर धक्का लगाना पड़ा। साथी जूनियर भले धक्का लगाने की क्षमता पर आपकी तारीफ करें, पर याद रखें आपको नौकरी पर रखने वाला मैंनेजमेंट इस पर जरूर विचारेगा। अगली बार मैंनेजमेंट के सामने ऐसी फिजूल की गलतियां न दर्शाएं।

फंडा यह है कि अगर आप महात्वाकांक्षी कर्मचारी हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं तो मीटिंग में संस्थान को आगे बढ़ाने वाले आइडियाज़ पर रोशनी डालें ना कि ऐसी मामूली-सी ‘कुर्बानियों’ का बखान करें क्योंकि यह आपकी जीवनशैली में अनुशासनहीनता दिखाता है।