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एन. रघुरामन का कॉलम:अगर आप अपने उसूलों पर जीते हैं तो इससे आपको आपका ‘ताज’ जरूर मिलेगा

8 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

हममें से कितने ऐसे हैं, जो उस चेक को ना कह सकें, जिससे मुम्बई में एक छोटा-मोटा घर खरीदा जा सकता है? और क्या कोई वैसे चेक को लेने से इनकार करेगा, जिसे किसी ने आपको रिटर्न-गिफ्ट के रूप में दिया हो क्योंकि आपके गिफ्ट ने उसे प्रेरित किया था? सबसे बड़ी बात यह कि वो चेक स्वयं रतन टाटा ने दिया हो?

क्या तब कोई ना करने का साहस कर सकेगा, जब उसकी उम्र 29 साल हो, परिवार झुग्गी बस्ती में रहता हो, मां ने पूरा जीवन मेड-सर्वेंट के रूप में काम किया हो और अब वह बूढ़ी हो गई हो और बीमार रहती हो और पत्नी और बच्चा उसकी तरफ उम्मीदों से देखते हों?

दूसरों का नहीं पता, लेकिन नीलेश मोहिते ने जरूर रतन टाटा को ना कह दिया और बदले में कोई काम देने की बात कही। कल 24 सितंबर से 2 अक्टूबर तक नीलेश ताज होटल की आर्ट गैलरी में नजर आएंगे। आप सोच रहे होंगे कि नीलेश कौन हैं और वे उस जगह पर क्या करेंगे, जहां अरबपति और करोड़पति ही जा पाते हैं? ये रही उनकी कहानी।

जब नीलेश पांच साल के थे और रायगढ़ जिले के एक गांव में रहते थे तो उनके पिता उन्हें, उनकी एक साल की बहन और उनकी मां लता को छोड़कर चले गए। वे तीनों मुम्बई आए और लता मच्छीमार कॉलोनी की एक 8 बाय 8 की झुग्गी में रहकर मेड का काम करने लगीं। महंगे शहर में रहते हुए अनेक घरों में काम करना और बच्चों को बड़ा करना आसान नहीं था।

लता की सेहत पर इसका असर पड़ा। जब नीलेश नौवीं कक्षा में पहुंचे तो उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। वे सुबह दो घंटे एक जगह ऑफिस बॉय का काम करने लगे और इसके बाद एक दूसरे ऑफिस में काम करने के बाद वे नाइट स्कूल जाते। लेकिन जब उन्हें 150 रुपयों के ऐवज में किन्हीं सैलिब्रेशंस और हाई-प्रोफ़ाइल डिनर्स में वेटर के रूप में काम करना पड़ता तो अपनी क्लासेस मिस कर जाते।

लेकिन उनका एक जुनून था, जो अकसर हाई सोसायटी का हुआ करता है- स्केचिंग और पेंटिंग। उनकी झुग्गी में इसके लिए जरूरी चीजें रखने की भी जगह नहीं थी। वे सड़क के कोने में बैठ जाते और समय मिलते ही पेंट करने लगते। इस दरमियान उन्हें क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में वेटर का काम मिल गया।

एक दिन उनके सुपरवाइजर ने उन्हें एक पेपर नेपकिन पर स्केचिंग करते देख लिया और उन्होंने उन्हें इस बात के लिए झिड़का कि उन्होंने मेहमान के चाय पिलाने के अनुरोध पर ध्यान क्यों नहीं दिया। लेकिन मेहमान खुद देखना चाहते थे कि वे क्या कर रहे हैं। उनकी कला से चकित होकर उन्होंने कहा, यह एक वेटर के रूप में क्या कर रहा है।

उन्होंने उन्हें अनेक प्रसिद्ध लोगों से मिलाया, जो आर्ट वर्क चाहते थे। उन्हें असाइनमेंट्स मिले। उद्योगपतियों ने उन्हें पैसा देने की पेशकश रखी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। रतन टाटा ने हमेशा ही उनका ध्यान खींचा था, इसलिए उन्होंने एक हवाई जहाज में प्रवेश करते हुए उनका स्केच बनाया। इसे वे उन्हें गिफ्ट करना चाहते थे, लेकिन कभी उनसे मिलने का मौका नहीं मिला।

आखिरकार उन्होंने किसी स्थानीय व्यक्ति जो टाटा के सम्पर्क में था, के माध्यम से उन्हें बर्थडे गिफ्ट के रूप में वह स्केच भिजवाया। कल से ताज होटल में उनकी एकल कला प्रदर्शनी शुरू हो रही है, जहां तक पहुंच पाना हर कलाकार के लिए सरल नहीं होता।

फंडा यह है कि अगर आप अपने उसूलों पर जीते हैं तो इससे आपको आपका ‘ताज’ (पढ़ें, पैसा और प्रसिद्धि) जरूर मिलेगा। जीवन में जीत हासिल करने के लिए एथिक्स जरूरी हैं।