• Hindi News
  • Opinion
  • N. Raghuraman's Column Let Everyone Be Determined To Make 2022 The Year Of Comeback For All At An Individual Level

एन. रघुरामन का कॉलम:एन. रघुरामन का कॉलम- हर कोई व्यक्तिगत स्तर पर 2022 को सबके लिए वापसी का साल बनाने की खातिर दृढ़ हो जाए

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

इस सप्ताह मुझे यह मान लेने में थोड़ा समय लगा कि मेरे पास खुद को आइसोलेट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। यह समय मैंने मुंबई में अपने घर से दूर नासिक वाले घर में अकेले ही खाना बनाकर, पढ़कर और लिखकर बिताया, क्योंकि मुझे पता था कि ओमिक्रॉन पुराने नियमों पर नहीं चलता। विदेश में टीके के तीन डोज ले चुके दोस्तों को भी इसने जकड़ लिया है।

मैंने भारी मन से नए साल की महफिलों को याद किया और पूरे सप्ताह अकेला रहा। शनिवार को जब सोकर उठा तो मुझे लगा कि मेरा निर्णय सही था क्योंकि पता चला कि बीते 48 घंटों में मुंबई और महाराष्ट्र में कोविड के मामले 100% बढ़े। 24 घंटे में 36 फीसदी की छलांग के साथ देश में ये आंकड़ा 22 हजार पार हो गया। ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र ने शुक्रवार को राज्यों को सलाह दी कि कोविड-पॉजिटिव मामलों का जल्द पता लगाने और मरीजों को अलग करने के लिए एंटीजन टेस्ट बढ़ाएं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को बुखार के साथ अगर सिरदर्द, गले में खराश, सांस फूलना, शरीर में दर्द, स्वाद या गंध की कमी जैसे दूसरे लक्षण हो या ना हों, जब तक कोरोना की पुष्टि ना हो, उसे कोविड-19 का संदिग्ध माना जाए और तुरंत आइसोलेट किया जाए। चूंकि मुझे बिजनेस मीटिंग के लिए अगले हफ्ते तीन जगह की यात्रा करनी है, इसलिए मैं मुझसे मिलने वालों की सेहत जोखिम में नहीं डाल सकता। यही वजह है कि मैं आइसोलेट हूं। कोविड ने मुझे एक बात सिखाई है।

पहले हम समाज के सदस्यों के रूप में समुदाय की खातिर मिलते थे। अब ओमिक्रॉन के दिनों में अलग होना, खासतौर पर संकट के समय में अलग रहना जरूरत बन गया है। ये भी उस समुदाय के लिए ही है, जिसमें हम रहते हैं। वैश्वीकरण के युग में हम सब इस दुनिया के वासी हैं। यानी अपनी गली, कॉलोनी या शहर के बाहर की घटनाओं से अछूते नहीं रह सकते।

इस सोच के पीछे कारण ये हो सकता है कि अलगाव के दौरान मैंने महामारी के विनाशकारी आर्थिक नतीजे देखे, आर्थिक रूप से प्रभावित लोगों को मोबाइल एप से संचालित छोटे ऋण देने वाले निजी साहूकारों से संपर्क करना पड़ा। जबकि कर्जदारों को शुरू में कहा गया कि मूल के साथ सिर्फ थोड़ा ब्याज देना होगा, लेकिन जैसे ही वे आधार-पैन कार्ड अपलोड करते हैं, कंपनियों का लहज़ा बदल जाता है।

प्रारंभिक राशि चुकाने के बाद कंपनियों ने उन्हें ऋण का तीन गुना भुगतान करने के लिए परेशान करना शुरू कर दिया। और तर्क दिया कि ये उनकी नीति है। मैंने ऐसे साहूकारों के बारे में सुना और पढ़ा था, लेकिन सामना तब हुआ जब नासिक के एक छोटे व्यापारी ने कर्ज के चंगुल से उसे निकालने के लिए एक परिचित के जरिए मुझसे संपर्क किया। पहले उन्होंने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया था, जिसने कोई मदद नहीं की।

पुलिस ने उन्हें सलाह दी कि ‘कोई अतिरिक्त राशि का भुगतान न करें और फोन बंद कर दें।’ ये कहना आसान है लेकिन अमल मुश्किल है। ये साहूकार पैसे देते समय किसी तरह फोन की पूरी संपर्क सूची ले लेते हैं और बाद में उनसे बात शुरू कर देते हैं और अगर कर्जदार ने फोन बंद कर दिया तो उन्हें गालियां भी देते हैं। कुछ मामलों में हमने पाया कि ये धोखाधड़ी से सीधे बैंक खातों से राशि निकाल रहे हैं। फिलहाल हम ऐसे लोगों के खिलाफ मजबूत केस बनाने के लिए धोखाधड़ी करने वाली कंपनी की जानकारी जुटाने में मदद कर रहे हैं।

फंडा यह है कि अगर हममें से हर कोई व्यक्तिगत स्तर पर 2022 को सबके लिए वापसी का साल बनाने की खातिर दृढ़ हो जाए, तो मानवता असल जिंदगी की परीक्षाएं पास कर सकती है।