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एन. रघुरामन का कॉलम:युवाओं को खरीदारी के जोशीले उत्साह में फंसने से बचाएं; बीएनपीएल ट्रेंड से सिर्फ बढ़ेंगी कर्ज की चिंताएं ​​​​​​​

6 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

जब टीवी पर एक विज्ञापन कहता है, ‘डॉन्ट पे... ’ (अभी न चुकाएं), मैं तुरंत चीखता हूं, ‘सफ़र लेटर!’ (बाद में पछताएं)। ऐसा इसलिए क्योंकि ‘बीएनपीएल’ (बाय नाऊ, पे लेटर यानी अभी खरीदें, बाद में चुकाएं) का नया स्वरूप युवाओं में काफी चर्चित है। इसके पीछे तेजी से बढ़ते इंस्टॉलमेंट प्लान के ऑफर हैं, जिसके कारण दिवाली के दिनों में काफी खरीदारी हुई, इस उम्मीद में कि महामारी के हमले के बाद कुछ आनंद पाया जाए।

इस लड़की का उदाहरण देखें। इसे कुछ महीनों पहले 23 साल की उम्र में पहली नौकरी मिली। उसने मुझसे रेस्त्रां चलने कहा। मैंने इनकार कर दिया और कहा, ‘अपने खाते में एक हजार रुपए जमा करो और मुझे जमा पर्ची दिखाओ। मैं मान लूंगा तुमने मुझे पार्टी दी।’ उसने ऐसा ही किया और वॉट्सएप पर पर्ची भेजी। कल, पांच महीने बाद वह मेरे पास वित्तीय सलाह लेने आई। दिवाली से पहले अक्टूबर में उसे पैसे खर्चने की धुन सवार हुई।

उसने 10,000 रुपए के जूते, 30,000 का मोबाइल, 9000 के कपड़े खरीदे। इतना महंगा सामान खरीदने का उसे अफसोस था, इसलिए उसने माता-पिता के लिए 4500 रुपए के उपहार भी खरीद लिए। उसने विभिन्न साइट्स पर कई ऑनलाइन खरीद कीं, जिनमें आसान किश्तों के विकल्प थे। बीएनपीएल प्लान अब हर जगह हैं और इस्तेमाल में इतने आसान हैं कि ये न सिर्फ खरीदारी का चस्का बढ़ा रहे हैं, बल्कि उन लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, जो क्रेडिट कार्ड के लिए योग्य नहीं है और एक तरह से वित्तीय रूप से असुरक्षित हैं।

आमतौर पर बीएनपीएल में किसी भी खरीद पर 25% डाउनपेमेंट लगता है और शुरुआत में कोई फीस या ब्याज नहीं लगता। चूंकि वे भुगतान को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देते हैं, इससे युवाओं को लगता है कि उन्होंने लगभग कुछ खर्च नहीं किया। इससे खरीदारी की धुन पता ही नहीं चलती। धन प्रबंधन विशेषज्ञ कहते हैं, ‘छोटी राशि ही बड़ी चिंता का विषय है और मुसीबत में डालती है।’ क्रिसमस शॉपिंग आने के साथ अमेरिकी विक्रेताओं को भरोसा है कि वे बीएनपीएल से 100 अरब डॉलर का व्यापार करेंगे।

कई धन प्रबंधन विशेषज्ञ मानते हैं यह उपभोक्ता ऋण का अगला छिपा हुआ स्रोत है। जिस लड़की की मैंने चर्चा की, वह ऐसे ही हथकंडे का शिकार हुई। वह दो खरीदों की किश्तें नहीं भर पाई और अगले चार महीनों के लिए उसकी किश्तें उस मासिक आय से भी ज्यादा हो गईं, जो उसे बीमा समेत अन्य कटौतियों के बाद मिलती है। यानी उसके पास आपात स्थितियों के लिए भी पैसे नहीं बचेंगे। उसकी छोटी-छोटी खरीदारी, बड़े खतरनाक आंकड़े में बदल गई।

एक वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ‘बीएनपीएल उपभोक्ता खुद को इन मासिक भुगतानों में उलझा हुए पाकर, इन्हें चुकाने के लिए ऊंची ब्याजदर पर कर्ज लेंगे, जिससे वे कर्ज में डूबते जाएंगे। दुर्भाग्यवश, ये युवा बीएनपीएल के जोखिम भूल गए हैं।’ मैं बीएनपीएल का कंसर्ट की टिकट या महंगे हैंडबैग खरीदने तक में दुरुपयोग होते देख रहा हूं।

ऐसे युवा पेशेवर बीएनपीएल के लक्षित ग्राहक हैं, जिनके पास बचत तो नहीं है, लेकिन अपनी हैसियत दिखाने के लिए वे फैशन व आराम से जुड़ी चीजें खरीदते हैं। याद रखें, ये वही बच्चे हैं जिन्हें हमने तुरंत संतुष्टि पाने की चाह वाले माहौल में बड़ा किया है। फंडा यह है कि युवाओं को खरीदारी के जोशीले उत्साह में फंसने से बचाएं क्योंकि बीएनपीएल ट्रेंड से सिर्फ कर्ज की चिंताएं बढ़ेंगी और युवा खरीदे हुए सामान का आनंद भी नहीं ले पाएंगे।