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एन. रघुरामन का कॉलम:पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है जानवरों की देखभाल

8 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

कल जब मुझे पता चला कि मुंबई का मशहूर भयखला चिड़ियाघर 1 नवंबर से फिर खुल रहा है तो मुझे मिश्रित भावना महसूस हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं खुश था कि चिड़ियाघर लोगों के लिए खुल रहा है, जहां वे हमबोल्ट पेंग्युइन की कॉलोनी में जुड़े दो नए सदस्यों को देख सकेंगे। उनका परिवार लॉकडाउन के दौरान बढ़ गया, जिसे अभी मुंबईकर नहीं देख पाए हैं। लेकिन मैं दुखी था कि नगरीय प्राधिकरण ने कोविड-19 को देखते हुए बुजुर्गों और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों से चिड़ियाघर न आने की अपील की है।

साथ ही, 18 वर्ष से ऊपर सभी आगंतुकों के लिए टीकाकरण अनिवार्य है और बंद जगहों में मास्क लगाना जरूरी है। स्वाभाविक है कि चिड़ियाघर के सभी कर्मचारियों का पूर्ण टीकाकरण होगा। लेकिन मुझे यह समझ नहीं आया कि घर पर खाली बैठे ऐसे बुजुर्गों को आने की मनाही क्यों है, जो बच्चों को जानवरों का साम्राज्य दिखाने ला सकते हैं, जिसमें नवजात जानवर भी शामिल हैं।

मैंने इस भावना की चर्चा अपने परिवार से की तो उन्होंने कहा कि कोविड पीड़ित मरीज अब भी अपने कुत्तों-बिल्लियों संग खेल रहे हैं और उनमें से कुछ ही बीमार हो रहे हैं, तो नगरीय प्राधिकरण को यह चिंता क्यों है कि चिड़ियाघर की बड़ी बिल्लियां (बाघ आदि) बीमार हो जाएंगी, जो पालतू जानवरों से कहीं बड़ी और स्वस्थ हैं और इंसानी संपर्क में नहीं आती हैं? तब मैंने अपने एक ममेरे भाई से संपर्क किया, जो अमेरिका की बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी में काम करता है और हाल ही में आधिकारिक कार्य से ओकलैंड चिड़ियाघर गया था।

उसका काम चिड़ियाघर के जानवरों के लिए कोविड वैक्सीन पहुंचाना था! चूंकि उसने लॉकडाउन के बाद चिड़ियाघर के जानवर नहीं देखे थे, वह जानवरों को टीका लगाने के लिए जूकीपर के साथ गया। उसने मुझे बताया कि कैसे जूकीपर के बड़े पिंजरे के पास पहुंचते ही कई बाघों में से एक, 16 वर्षीय मॉली खड़ी हो गई। जब कीपर ने उसे आदेश दिया तो वह धीरे से बाड़े के पास आई और कोविड टीका लगवाने के लिए उसने अपनी कमर आगे कर दी! कुछ इंसानों की तरह वह सुई से डरी नहीं।

थोड़ा-बहुत सहलाने के बाद, एक पशु चिकित्सक ने उसे वैक्सीन लगा दी और अच्छे बर्ताव के लिए मॉली को कुछ खाने दिया गया। भालुओं को आइक्रीम दी गई और बंदरों को मार्शमैलो। चिड़ियाघर के लगभग सभी जानवरों को टीके का कम से कम एक डोज लग चुका है। अमेरिका के 189 चिड़ियाघरों में टीकाकरण जारी है। मेरे भाई ने मुझे समझाया, ‘जानवरों के डीएनए पर अध्ययन चल रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि अन्य स्तनधारियों की तुलना में कई जानवरों को कोविड-19 का खतरा ज्यादा है।

ऐसा इसलिए क्योंकि छोटी तथा बड़ी प्रजातियों के डीएनए अलग-अलग हैं। पालतू बिल्ली जैसी छोटी प्रजातियां ‘जीनस फेलिस’ डीएनए से आती हैं और चिड़ियाघर की शेर, बाघ जैसी प्रजातियां ‘जीनस पैंथेरा’ से हैं। इसलिए इसपर शोध चल रहा है।’ उसने कहा कि आखिरकार दुनिया को जानवरों के टीकाकरण पर ध्यान देना होगा, फिर वे पालतू हों या पिंजरे वाले क्योंकि जानवर भी इंसानों की तरह कोविड-19 वायरस से पीड़ित हैं।

फंडा यह है कि जिस तरह रविवार को विश्व नेताओं ने जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने की शपथ ली है, वैसे ही हम सभी को इस दीपावली पर हमारे आसपास के जानवरों की देखभाल की शपथ लेना चाहिए, ताकि हमारा पारिस्थितिकी तंत्र भी पूरी तरह सुरक्षित रह सके।