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एन. रघुरामन का कॉलम:‘धीमे चलिए’ और ‘आगे रास्ता संकरा है’ जैसे चेतावनी बोर्ड धूल-मिट्‌टी से लथपथ हैं उन्हें ठीक से पढ़ा नहीं जा सकता

2 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

रेलवे टिकट उपलब्ध नहीं हैं और प्लेन की टिकटें विमान की गति से ऊपर जा रही हैं, कम से कम आने वाले कुछ महीनों तक यही स्थिति है। अनेक कार्यालयों के एचआर को त्योहारों-वीकएंड को मिलाकर लम्बी छुटि्टयों की अर्जी मिल रही है, ताकि आवेदक परिजनों-प्रियजनों के साथ समय बिता सकें।

इसका असर होटल आरक्षण पर पड़ रहा है, जिन्हें पिछले साल की तुलना में इस बार अक्टूबर के लिए ज्यादा बुकिंग्स मिल रही हैं। इसका कारण है कि 2021 में दीपावली नवम्बर में आई थी, जबकि इस बार अक्टूबर में है। इस कारण होटल संचालक 50% एडवांस पेमेंट लेने के बाद ही रूम बुक कर रहे हैं, और वह भी इस शर्त पर कि बुकिंग कैंसल करने पर पैसा नहीं लौटाएंगे।

अनेक कार मालिक कारों की तय सर्विसिंग को अपनी यात्राओं तक के लिए टाल रहे हैं ताकि छुटि्टयों में उन्हें कोई समस्या ना हो। सर्दियों-त्योहारों के मौसम में इधर यह ट्रेंड भी देखने को आ रहा है कि अधिकतर कार मालिक नई कार खरीदने के बाद पहले साल उसी से छुटि्टयां मनाने जाते हैं। यहां बताने की जरूरत नहीं कि इस साल कारों की बिक्री बीते साल के आंकड़े को पार कर चुकी है।

इन आंकड़ों में हम नागरिकों के लिए एक सबक है, पर लगता है नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) इससे कुछ सीखना नहीं चाहता। सबक ये है कि अब सड़क यात्राएं भी भीड़भाड़ वाली होने वाली हैं और गाड़ी चलाते समय हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि एनएचएआई पेशेवरों की हिदायतों के बावजूद हादसों के लिए जिम्मेदार दोषपूर्ण डिजाइन वाली सड़कों की मरम्मत टाल रहा है।

सूर्या रिवर ब्रिज का उदाहरण लें, जहां साइरस मिस्त्री की कार का एक्सीडेंट हुआ। पुल से पहले सड़क साढ़े तीन मीटर लम्बी तीन लेन्स में विभाजित थी, पर पुल पहुंचते-पहुंचते संकरी होकर दो लेन्स की रह जाती है। तीन लेन का अचानक दो लेन में बदलना ड्राइवरों को भ्रमित कर देता है और हादसे का कारण बन जाता है। ऐसा इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच करने वाली पुलिस के साथ ही वेस्टर्न इंडिया ऑटोमोबाइल एसोसिएशन व ऑल इंडिया वाहन चालक मालक महासंघ जैसी संस्थाओं सहित अन्य कइयों का कहना है।

चूंकि हम खबरों में मिस्त्री की मर्सिडीज कार के बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़ रहे हैं, इसलिए हम मानने लगते हैं कि ब्रेकिंग सिस्टम के संबंध में उस आलीशान कार के आंकड़े हमारी कारों पर भी लागू होंगे, जबकि यह सही नहीं है। वे कार के वजन के अनुसार अलग-अलग होते हैं, फिर भले ही कारें 100 किमी प्रतिघंटा की समान गति से दौड़ रही हों।

विभिन्न मीडिया व अध्ययनों में विशेषज्ञों के द्वारा कही बातों के अनुसार प्रीमियर लग्जरी एसयूवी कारें- वैसी जिसमें मिस्त्री यात्रा कर रहे थे- 2500 किलो तक की होती हैं और ब्रेक लगाने के 2.7 सेकंड बाद रुक जाती हैं, लेकिन इतने समय में वे 36.5 मीटर की दूरी तय कर चुकी होती हैं। जबकि एंट्री लेवल एसयूवी मॉडल- जो कि 1800 किलो की होती हैं और 3.3 सेकंड में रुक सकती हैं, 41.8 मीटर की दूरी तय कर लेती हैं।

मंझोले आकार की एसयूवी कारें 950 से 1100 किलो तक की होती हैं और वे ब्रेक लगाने के बाद रुकने से पहले 3.38 सेकंड में 42.04 मीटर तक चली जाती हैं। वहीं 850 से 1000 किलो तक की कारें 3.1 सेकंड में रुकने के बाद 43.1 मीटर की दूरी तय कर लेती हैं।

फंडा यह है कि चूंकि ‘धीमे चलिए’ और ‘आगे रास्ता संकरा है’ जैसे चेतावनी बोर्ड धूल-मिट्‌टी से लथपथ हैं और उन्हें ठीक से पढ़ा नहीं जा सकता, इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि सतर्क रहें और त्योहारों के इस मौसम में हड़बड़ी में किसी यात्रा की प्लानिंग न करें।