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एन. रघुरामन का कॉलम:मीट पर निर्भरता कम करने के लिए हमें ‘फार्मिंग 2.0’ की जरूरत

3 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

जहां एक ओर 28 अप्रैल से देश का ज्यादातर हिस्सा गंभीर लू की चपेट में हैं। इस रविवार को बीकानेर में देश का सर्वाधिक 47.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। और भी जगहें जैसे बाड़मेर, जोधपुर, नागपुर, अकोला, करीमनगर, दुर्ग में 44 से ऊपर तापमान रहा। भारत ही नहीं, आसपास अधिकांश देशों के यही हाल हैं। अकेले महाराष्ट्र में इससे जुड़ी 25 मौतें हुईं। तापमान बढ़ने से पूरे देश के किसान, उत्पादन में 15-20% कमी की बात कर रहे हैं।

वहीं, दूसरी ओर एक अध्ययन ने चेताया है कि सरीसृपों की पांच में से एक प्रजाति विलुप्ति की कगार पर है, जिसका धरती पर विनाशकारी असर होगा। सरीसृपों पर हुई अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च पिछले हफ्ते ‘नेचर’ में प्रकाशित हुई, इसमें पाया गया कि सांप से लेकर छिपकली तक 21% सरीसृप विलुप्ति की कगार पर हैं, जिससे इकोसिस्टम प्रभावित होगा। इनके खत्म होने से कीट बढ़ेंगे, जो सीधे खाद्य शृंखला प्रभावित करेंगे।

52 से अधिक विशेषज्ञों ने इस डेटा का विश्लेषण किया, इसमें 17 सालों तक छह महाद्वीपों के 900 वैज्ञानिकों ने योगदान दिया था। दुनिया में इन दो बड़ी घटनाओं पर जब मैं अपने दोस्त एन्वायरमेंटल साइंटिस्ट से बात कर रहा था, तो उसने दुनियाभर में ताकतवर हो रहीं बीफ कंपनियों की ओर मेरा ध्यान खींचा। पिछले साल अकेले अमेरिका ने सिर्फ एक ही देश-ब्राजील से एक लाख 60 हजार टन बीफ खरीदा। और इस साल ब्राजील से आयात दोगुना होने की उम्मीद है।

आप सोच रहे होंगे कि इसका जलवायु परिवर्तन से क्या ताल्लुक है? जवाब यहां है। अमेजन में जंगल खत्म होने के पीछे बड़े पैमाने पर पशुपालन जिम्मेदार है, और वो इस हद तक दोहन कर रहे हैं कि वैज्ञानिकों ने इससे अपरिवर्तनीय ‘डायबैक’ (पेड़ों की एक बीमारी) की चेतावनी दी है, इससे ही अधिकांश बायोम (वनस्पतियों व जीवों का प्राकृतिक आवास) होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि हद से ज्यादा मीट सेवन दुनिया के सबसे बड़े वर्षा वन की रक्षा करने में हमारी विफलता के लिए जिम्मेदार है।

आप ताज्जुब कर रहे होंगे कि ये पशु दुनिया के सबसे घने जंगलों को खत्म करने के लिए कैसे जिम्मेदार हैं? यह कहानी किसी इत्तेफाक की नहीं बल्कि इरादों से जुड़ी है। 1960 के दशक में ब्राजील पर सैन्य तानाशाही काबिज़ थी। उन्हें डर था कि अमेजन के इस बड़े व अनियंत्रित इलाके पर विदेशी आक्रमण हो सकता है, तो सेनापति उस जंगल को जीतने के लिए निकल पड़े, जो उस समय तक अजेय था। उसे जीतने का साधन बने पशु।

उनके चरने से नए जंगल बनना बंद हो गए और सस्ते में निर्यात किया जाने वाला मांस जीविका और आय दोनों देना लगा। अमीर-गरीब अमेजन की तरफ भागे, पशु जंगल में छोड़ दिए और जमीन पर दावा शुरू कर दिया। ब्राजील निर्यात करता और अमेरिका आयात। ऐसे वैश्विक हालातों में मीट की खपत कम करने के लिए हमें भारत में एक टिकाऊ कृषि प्रबंधन की जरूरत है। विभिन्न कारणों से किसानों की उपज का 30% हिस्सा गोदामों में पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है।

पर्यावरणीय व पारिस्थितिकी पर प्रभाव कम करने के लिए किसानों को अब अपनी पानी, कीटनाशक, खाद वाली सूची में ‘डाटा’ जोड़ने की जरूरत है। भविष्य में डाटा आधारित हरित क्रांति उपग्रह निगरानी सेंसर प्रबंधन, मिट्टी के प्रकार, पानी की उपलब्धता, बदलती गर्मी की स्थिति, बाढ़ की आशंका, बारिश के पूर्वानुमान और कीट ग्रस्तता को आपस में जोड़ देगी। इस सबका विश्लेषण करने से किसानों को फसल की आवृत्ति, पसंदीदा फसल व उच्च पैदावार तय करने में मदद मिलेगी।

फंडा यह है कि मीट पर निर्भरता कम करने के लिए हमें ‘फार्मिंग 2.0’ की जरूरत है, जिससे इस ग्रह को हरा-भरा रखने में मदद मिलेगी।