• Hindi News
  • Opinion
  • N. Raghuraman's Column When One Understands The Purpose Of The Power Given To Him, He Becomes A Better Person Than The Common Man

एन. रघुरामन का कॉलम:जब कोई उसे मिली शक्ति के उद्देश्य को समझ जाता है, तो वह आम इंसान से अच्छा इंसान बन जाता है

20 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाली यह बच्ची करीब 9 साल की है। लेकिन वह अभी से अपने हुनर के ज़रिए इस दुनिया को रोशन कर रही है। कैसे? आपका स्वागत है श्रुति की दुनिया में। श्रुति ने पांच साल की उम्र में एब्सट्रेक्ट पेंटिंग शुरू की। लॉकडाउन के दौरान, जब वह सात वर्ष की थी, उसने मंडाला आर्ट, एम्बॉस्ड पेंटिंग, वर्ली आर्ट, मॉडर्न आर्ट जैसी विधाएं सीखीं। लेकिन उसने शौक को खुद तक सीमित नहीं रखा।

एक सप्ताहांत उसे अनाथालय जाने का मौका मिला। उसने वहां के बच्चों की स्थिति देखने के बाद तय किया कि अपनी कला से कमाई करके बच्चों की मदद करेगी। अपनी पहली सेल में उसने पेंटिंग बेचकर अनाथालय के लिए 30 हजार रु. जुटाए। बेंगलुरु के जेपी नगर के कैपिटल पब्लिक स्कूल की छात्रा श्रुति फिर किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑनकोलॉजी गई। वहां ऐसे बच्चों से मिली जिन्हें कैंसर है।

उसने उन्हें रंगीन पेंसिल-स्केच दिए और पेंटिंग बनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी खुशी देखकर श्रुति भी बहुत खुश हुई। उसके कौशल व मंशा को पहचानकर रोटरी क्लब आगे आया और विभिन्न प्रदर्शनियों के ज़रिए उसकी 150 पेंटिंग बेचने में मदद की। इससे मिले 1,30,000 रुपए को श्रुति ने इंस्टीट्यूट ऑफ ऑनकोलॉजी के कैंसर-पीड़ित बच्चों को दान कर दिया।

मैं सबसे ज्यादा इस बात से प्रभावित हुआ कि इस नन्हीं परोपकारी का कहना है, ‘एक लाख 30 हजार देना बड़ी बात नहीं है। सिर्फ एक संस्थान के कैंसर प्रभावित बच्चों को ही एक करोड़ से ज्यादा की जरूरत है। मैं पेंटिंग बेचकर फंड जुटाना जारी रखूंगी।’

बड़े दिल वाली इस छोटी बच्ची की याद तब आई जब मैंने पढ़ा कि यूपी कैडर के एक आईएएस अधिकारी को गुजरात की असारवा और बापूनगर विधानसभा सीटों पर बतौर सामान्य पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था और अब उन्हें चुनाव ड्यूटी से हटा दिया है।

दरअसल अधिकारी ने अपनी सरकारी गाड़ी और एक पुलिस अधिकारी सहित कुछ चुनाव अधिकारियों के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। इस शुक्रवार, गुजरात के मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखे पत्र में चुनाव आयोग ने कहा कि आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह ने खुद को सामान्य पर्यवेक्षक बनाए जाने की इंस्टाग्राम पर घोषणा की और आधिकारिक पद को ‘पब्लिसिटी स्टंट’ के लिए इस्तेमाल किया। अधिकारी ने ट्विटर पर भी तस्वीरें पोस्ट कीं। साथ में लिखा था, ‘गुजरात चुनाव के लिए बतौर पर्यवेक्षक अहमदाबाद में नियुक्ति हुई।’

चुनाव आयोग के पत्र का हवाला देते हुए राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि वे मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारी को सामान्य पर्यवेक्षक पद से हटा रहे हैं। 2011 बैच के इन अधिकारी को सभी चुनाव ड्यूटियों से मुक्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्हें तुरंत अपने कैडर के नोडल अधिकारी को रिपोर्ट करने कहा गया है। चुनाव आयोग दोनों सीटों के लिए जल्द नया पर्यवेक्षक नियुक्त करेगा।

हर किसी के पास कुछ शक्तियां (पढ़ें कौशल) होती हैं क्योंकि हमें बनाने वाला किसी को खाली हाथ नहीं भेजता। कई इस कौशल को श्रुति की तरह जल्दी पहचान लेते हैं, तो कुछ इस ‘शक्ति’ को करियर में हासिल करते हैं, जैसे ऊपर बताए गए अधिकारी ने किया।

हालांकि ऐसे मामले में वे यह नहीं समझ पाते कि ईश्वर ने उन्हें इस शक्तिशाली पद के लिए क्यों चुना। इस शक्ति को देने के पीछे ईश्वर का हमेशा कोई उद्देश्य होता है। अगर आप उसे समझ जाते हैं तो दुनिया आपकी जय-जयकार करती है और नहीं समझ पाते तो दुनिया नज़रअंदाज करती है।

फंडा यह है कि जब कोई उसे मिली शक्ति (कौशल) के उद्देश्य को समझ जाता है, तो वह आम इंसान से अच्छा इंसान बन जाता है।