• Hindi News
  • Opinion
  • Om Gaur's Column Many Places Of Strategic Importance In The Country Are Indicative Of Our Military Capability

ओम गौड़ का कॉलम:देश में सामरिक महत्व के कई ठिकाने हमारी सैनिक क्षमता के परिचायक हैं

2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
ओम गौड़, नेशनल एडिटर (सैटेलाइट), दैनिक भास्कर - Dainik Bhaskar
ओम गौड़, नेशनल एडिटर (सैटेलाइट), दैनिक भास्कर

देश की सुरक्षा के लिए संजोई जा रही हमारी सामरिक ताकत का राजनीतिक प्रदर्शन देशहित में कितना है। यह रक्षा विशेषज्ञों की डिबेट का विषय हो सकता है, लेकिन क्या इस प्रदर्शन से हम दुश्मन देशों को अलर्ट तो नहीं कर रहे? हमने कहां-कहां रनवे बना रखे हैं? देश में हाईवे पर अब कितने रन वे हैं? और उनकी क्षमता कितने टन के विमान उतरने की है? यह सारे तथ्य जग जाहिर करने का क्या लाभ है?

सरकार को कम से कम सेना के राजनीतिक इस्तेमाल से दूर ही रहना चाहिए। सरकारें चाहे कांग्रेस की रही हों या भाजपा की, ये सब अपने-अपने तरीके से सत्ता के लिए सेना का इस्तेमाल करती रही हैं। कहीं फाइटर प्लेन में उड़कर नेता हाईवे पर उतरते नजर आ रहे हैं, तो कहीं हाईवे पर उतरते हवाई जहाज दिखाने के लिए लाखों की भीड़ खींचकर लाई जा रही है।

हमें हाईवे पर बने रनवे दुश्मन देशों को दिखाने की बजाए, ताकत इस बात पर लगानी चाहिए कि हमारे पड़ोसी दुश्मन देशों की इस तरह की क्या सामरिक तैयारी है? पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की तरह 21 नवंबर 2016 को अखिलेश यादव सरकार ने आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर सुखोई विमान उतरवाए थे। ये विमान जिस जगह उतरे वो बांगरमऊ विधानसभा सीट में आती है। पहले सपा की सीट थी।

2017 में विधानसभा चुनाव हुए और सपा यहां से करीब 28 हजार वोट से हार गई। देश में दूर दृष्टि से हाईवे व नेशनल हाईवे बनाना विकास की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार ने इसकी स्वागत योग्य सराहनीय पहल की है। लेकिन सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी रक्षा विशेषज्ञ बनकर इस बात का खुलासा करते नजर आते हैं कि कैसे हमारी पश्चिमी सीमा से सटी भारत माला परियोजना पर एअर स्ट्रिप बनी।

फलौदी, जम्मू कश्मीर के बीज बेहरा, चिनाब बाग में एलओसी के नजदीक रनवे बन रहे हैं। उत्तराखंड में काठगोदाम हाईवे पर चीन की सीमा के नजदीक तो बांग्लादेश की सीमा के आसपास खड़गपुर कंजार हाईवे पर एअर स्ट्रिप बन रही है। इसी तरह गडकरी ने एक एअर स्ट्रिप को छोड़कर 12 एअर स्ट्रिप की सीक्रेट का सरेआम खुलासा कर दिया है। सवाल उठता है कि क्या हमारी एअर स्ट्रिप कहां है, ये बताना जरूरी है?

अगर जरूरी है तो ये देश हित में कितना है? अगर यह खुलासा देश हित में नहीं है तो फिर राजनीतिक हित में है। हमें सैन्य क्षमता के प्रचार-प्रसार की जरूरत कब पड़ती है। हमने बिना प्रचार प्रसार के हर बार दुश्मन देशों को सबक सिखाया है। क्या हमने पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट एअर स्ट्राइक का प्रचार-प्रसार किया था। जवाब है नहीं किया, क्याेंकि प्रचार करते तो हमारे हाथ सफलता नहीं लगती। दुश्मन भी अलर्ट मोड पर आ जाता।

सामरिक महत्व के हमारे एयरबेस, जहां नागरिक यात्री विमान उतरते हैं, वहां हवाई यात्रियों को तस्वीरें लेने से रोका जाता है। वहीं दूसरी तरफ हम हाईवे के बहाने रनवे का प्रचार-प्रसार कर रहे कि किसकी कितनी क्षमता है और कितना लंबा चौड़ा है। देश में सामरिक महत्व के कई ठिकाने हैं, वे हमारी सैनिक क्षमता के परिचायक हैं।

हमारी सेना के तीनों अंगों के हौसले बुलंद हैं। वे किसी भी दुश्मन देश से लड़ने के लिए सक्षम हैं, लेकिन जब सेना का विमान राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा बन जाए तो ये ठीक नहीं है। हमें प्रदर्शन की इस नई परिपाटी को देश की सुरक्षा हित में बदलना चाहिए। देश में 10 एअर स्ट्रिप क्या, हर हाईवे पर इस तरह के रन वे का जाल बिछाएं, लेकिन प्रचार-प्रसार की बजाए सुरक्षा का ख्याल रखिए।