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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:गोबर जमीन पर गिरता है तो कुछ धूल लेने के बाद ही उठता है

3 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

शेयर बाजार आसमान छू रहा है। कुछ लोग इस अकल्पनीय बढ़त का श्रेय जो बाइडेन और कमला हैरिस के सत्ता में आने को दे रहे हैं। लोकप्रिय विचार है कि शेयर व्यापार का केंद्र धन है परंतु सच यह है कि अवाम की भावना ही शेयर सागर में लहरों को उत्तंग बनाती है। अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय अभिनीत मणिरत्नम की फिल्म ‘गुरु’ इस विषय पर बनी श्रेष्ठ फिल्म मानी जाती है।

विगत सदी के मध्य में बलराज साहनी अभिनीत ‘सट्टा बाजार’ भी रोचक फिल्म थी। जाने क्यों अमेरिका के शेयर बाजार केंद्र को ‘वॉल’ कहते हैं। क्या अपनी सारी पूंजी को खो देने वाले व्यक्ति दीवार ‘द वॉल’ से सिर टकरा कर लहूलुहान हो जाते हैं। मुंबई का शेयर बाजार स्थान मुंबई में दलाल स्ट्रीट पर स्थित है। भारत में दलाल हर क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।

फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ में एक युवा डाकू उम्र दराज सेवानिवृत्त डाकू से पूछता है कि अंग्रेजों का राज रहा, मुगलों का राज रहा हम डाकुओं का राज कब आएगा? अनुभवी उम्रदराज डाकू कहता है कि मूर्ख हमारा राज कब नहीं था? कुछ इसी तर्ज पर दलालों का राज कब नहीं रहा?

धीरूभाई अंबानी को श्रेय जाता है कि आम आदमी का पूंजी निवेश उन्होंने शेयर बाजार में कराया। इस तरह उन्होंने शेयर बाजार का गणतंत्रीकरण किया। आम आदमी की थोड़ी सी बचत पर उसे मुनाफा दिलाया। महान चाणक्य ने राजनीति पर लिखे अपने ग्रंथ का नाम ‘अर्थशास्त्र’ रखा। वे समझते थे कि दुनिया की तरह रुपया गोल क्यों है? चंद्रप्रकाश द्विवेदी का सीरियल ‘चाणक्य’ खूब सराहा गया था।

‘गुरु’ का नायक गुजरात के छोटे से शहर से मुंबई आता है। उसका बहुत मखौल बनाया जाता है। परंतु वह छोटी सी पूंजी से मुनाफा कमाने लगता है। धीरे-धीरे इस खेल में उसे ‘गुरु’ मान लिया जाता है। धीरे-धीरे उसे अति आत्मविश्वास हो जाता है। सफलता का घोड़ा सरपट भागता है। नायक ने सफलता मिलते ही बैंक से छेड़छाड़ शुरू कर दी और वह घोटाले में फंस गया।

फिल्म के क्लाइमैक्स में नायक एक जांच कमेटी के सामने प्रस्तुत होता है। यहीं मणिरत्नम गच्चा खा गए और उसे जांच कमेटी निर्दोष करार देती है। एक तरह से यह ठीक भी है क्योंकि घपलों का लंबा इतिहास है और कोई कभी दंडित नहीं हुआ। यह भी कमाल है कि अंबानी परिवार ने इस फिल्म के प्रदर्शन पर कोई एतराज नहीं उठाया। क्योंकि वे आग को हवा नहीं देना चाहते थे। कुछ भीतरी जानकारों का कथन है कि ‘गुरु’ में अंबानी परिवार ने ही पूंजी निवेश किया था। फिल्म के द्वारा उन्होंने मुनाफा कमाया। गोबर जमीन पर गिरता है तो कुछ धूल लेकर ही उठता है। अपने अनाधिकृत बायोपिक में पूंजी निवेश और मुनाफा कमाना चतुराई ही कहलाएगा।

इंदौर में सराफा बाजार शेयर का केंद्र रहा है। सराफा में स्वादिष्ट भोजन मिलता है। मुंबई के दलाल स्ट्रीट में भी रेस्त्रां स्वादिष्ट भोजन देते हैं, प्राय: शेयर खेलने वाले भोजन में भी रुचि लेते हैं। यह पूरा खेल जुबान (वादा करने) और जबान (स्वाद) का है। दक्षिण भारत के रहमान ने ‘गुरु’ में गुजरात लोक संगीत से प्रेरित माधुर्य रचा है। सृजन क्षेत्र में प्रांतीयता, जातिवाद इत्यादि कोई संकीर्णता नहीं होती। ‘गुरु’ का गीत ‘ओ सजना तेरे बिना बेस्वादी रतियां।’ गीत गाते हुए ऐश्वर्या राय ने गुजरात का डांडिया खेला है।

शेयर बाजार में बहार आने पर उसे ‘बुलिश’ बैल जैसा कहा जाता है और बाजार की गिरावट को ‘बीयरिश’ कहते हैं अर्थात गीदड़। हर उद्योग की भाषा में अपने शब्द होते हैं। फिल्म उद्योग की भाषा में ‘हिट’ और ‘फ्लॉप’ कहा जाता है। मृत्यु के निकट पहुंचे व्यक्ति के लिए कहते हैं कि उसका क्लाइमैक्स चल रहा है। इस खेल में चीन अभी शामिल नहीं हुआ है। बैल, भेड़िया और ड्रैगन के इर्द-गिर्द विश्व घूमता है।

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