पंकज बंसल का कॉलम:2023 में जॉब-मार्केट से हम क्या उम्मीदें रखें?

5 महीने पहले
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पंकज बंसल, पीपुलस्ट्रांग और वर्क, यूनिवर्स के फाउंडर - Dainik Bhaskar
पंकज बंसल, पीपुलस्ट्रांग और वर्क, यूनिवर्स के फाउंडर

वह कौन-सी चीज है, जो किसी देश के आर्थिक विकास को प्रभावित करती है, चुनावी नतीजों पर असर डालती है और जिसका नाता हर व्यक्ति की वित्तीय स्थिरता से है? इन तीनों प्रश्नों का एक ही जवाब है : रोजगार। बीता साल नौकरियों के मामले में मिला-जुला रहा था। शुरुआत अच्छी हुई और आरम्भ में ठीक-ठीक भर्तियां की गईं। लेकिन दूसरी तिमाही के बाद चीजें बदलने लगीं।

दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव और मंदी की आहटों का असर व्यापार-वर्ग पर पड़ा। बीते कुछ महीनों में पूरी दुनिया में तेजी से छंटनियां की गई हैं, विशेषकर आईटी सेक्टर में। इससे डर और अनिश्चतता का माहौल है। ऐसे में 2023 में जॉब-मार्केट से हमें क्या उम्मीदें रखना चाहिए? नए साल में भर्तियों का माहौल ठंडा होने के बावजूद ठप्प नहीं पड़ा है। भारत के रोजगार-बाजार की स्थिति मजबूत बनी हुई है। कामकाजी आबादी युवा है और 2027 तक यह दुनिया की सबसे बड़ी श्रमशक्ति बनने जा रही है।

इस साल हमें रोजगार में संतुलन की स्थिति की अपेक्षा करनी चाहिए। अनेक सेगमेंट्स में नई भर्तियों के लिए अच्छे संकेत दिखाई दिए हैं। डिकोडिंग जॉब्स इंडिया सर्वे में 45% नियोक्ताओं ने कहा कि वे नई भर्तियों में 20% तक का इजाफा करने जा रहे हैं। 2023 की दूसरी छमाही तक भारतीय प्रतिभाओं की वैश्विक मांग भले नजर आने लगे, भारत का रोजगार परिदृश्य घरेलू भर्तियों पर ही आधारित होगा। बढ़ती उद्यमशीलता इसका अहम आयाम होगा। एक-एक कर विभिन्न सेक्टर्स में नौकरियों की स्थिति का जायजा लेते हैं।

फार्मास्यूटिकल : जी-20 की अध्यक्षता मिलने के बाद डिजिटल हेल्थ इनोवेशन, यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज को अर्जित करना और समय पर दवाइयां आदि पहुंचाने का महत्व बढ़ जाएगा। आगामी छह से आठ महीनों में कामकाजी आबादी को पुश मिलेगा। मेडिकल रिसर्च, स्वास्थ्य प्रशासन, लोकस्वास्थ्य, नर्सिंग, डाटा साइंस, एपीआई, शोध-अनुसंधान आदि में नए अवसर निर्मित होने की अपेक्षा है।

मैन्युफैक्चरिंग : भू-राजनीतिक कारणों और सरकार के इंडस्ट्री 4.0 और मेक इन इंडिया कार्यक्रमों के चलते इस साल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आगे बढ़ेगा और एक घरेलू मांग निर्मित होगी। एप्पल और वोल्वो जैसे संगठन भारत में अपने इनोवेशन सेंटर स्थापित करने जा रहे हैं। पिछले साल अगस्त से अब तक इस क्षेत्र में 50 हजार नए जॉब्स सृजित किए जा चुके हैं और यह सिलसिला थमेगा नहीं।

ऑटोमोटिव : ऑटो सेक्टर गहमागहमियों से भरपूर रहेगा। प्रोडक्ट लॉन्च और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के लिए कम्पनियां नई भर्तियां निकालेंगी। सबसे ज्यादा मांग प्रोग्राम मैनेजर्स, इलेक्ट्रॉनिक एंड मेकट्रॉनिक इंजीनियर्स, सिस्टम इंजीनियर्स आदि की रहेगी। फ्यूल सेल्स में विशेषज्ञता भी कारगर रहेगी।

इंटरनेट और आईटी : लोकल ई-कॉमर्स घरेलू मांग के कारण बढ़ता रहेगा। डिलीवरी प्रोफेशनल्स की मांग, एनालायटिक्स में विशेषज्ञता और परफॉर्मेंस मार्केटिंग के चलते मौजूदा साल में रोजगार-निर्माण होता रहेगा। टेक कम्पनियां अपना ध्यान मात्रा के बजाय गुणवत्ता पर केंद्रित करेंगी। इस क्षेत्र में पहले ही बहुत भर्तियां हो चुकी हैं, लेकिन विशिष्ट कुशलताओं की मांग बनी रहने वाली है, जैसे साइबरसिक्योरिटी, ब्लॉकचेन, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन, ऑनलाइन गेमिंग स्किल्स में एआर-वीआर आदि।

जॉब-मार्केट में आने वाले समय में जो बदलाव होने जा रहे हैं, उसमें यह जरूरी है कि कर्मचारी और संगठन दोनों लचीलापूर्ण रुख अख्तियार करें और बदलावों के लिए खुद को तैयार रखें। व्हीबॉक्स, टैग्ड और सीआईआई की इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2023 के मुताबिक भारत ने पहली बार 50.3% का एम्प्लॉयबिलिटी स्कोर रिपोर्ट किया है, जिसका मतलब है प्रतिभागियों में से 50.3% को रोजगार के उपयुक्त पाया जाएगा।

इसमें भी 53.28% महिलाएं होंगी। खुद से पूछें कि क्या आपके पास उस नौकरी के लिए बेहतर स्किल्स हैं, जिसके लिए आवेदन दे रहे हैं? क्या आपको उसका नॉलेज है? नौकरी मिलने के पहले 90 दिनों में आप अपने संस्थान को कैसे बेहतर बना सकते हैं, आदि। जॉब-सर्च को केवल एचआर के नजरिए के बजाय हायरिंग-मैनेजर के नजरिये से देखना आपके लिए ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। अगर आपके पास उपरोक्त सवालों के जवाब हां में हैं तो यकीन मानिए, बेहतरीन नौकरियां इस साल आपकी राह देख रही हैं।

भारत के जॉब-मार्केट में आने वाले समय में जो महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं, उसमें यह जरूरी है कि कर्मचारी और संगठन दोनों लचीला रुख अख्तियार करें और बदलावों के लिए खुद को तैयार रखें।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)