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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:‘प्रेमरोग’ समाज के दोहरे मापदंड पर प्रहार करती है कि साधन संपन्न व्यक्ति के लिए आम आदमी से अलग जीवन मूल्य क्यों बनाए गए

5 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

ताजा खबर यह है कि अदालत में एक महिला ने आवेदन किया है कि उसका पति मृत्यु शय्या पर है। महिला अपने प्रेम की निशानी के रूप में पति के स्पर्म से स्वयं को गर्भवती करना चाहती है। गौरतलब है कि इस विषय पर पहली फिल्म ‘विकी डोनर’ बनी थी, जिसमें आयुष्मान खुराना, यामी गौतम व अनुभवी अभिनेता अन्नू कपूर ने भी सराहनीय काम किया था। किराए की कोख जैसे विषय पर हिंदी फिल्म जगत में भी कुछ फिल्में बन चुकी हैं।

एक ऐसी ही रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ में रानी मुखर्जी, प्रीति जिंटा और सलमान खान ने अभिनय किया था, जिसका निर्देशन अब्बास मस्तान ने किया था। यह हॉलीवुड की एक चर्चित फिल्म ‘प्रीटी वुमन’ से प्रेरित फिल्म थी। बहरहाल, इटली में यह कानून रहा है कि गर्भवती स्त्री को जेल नहीं भेजा जा सकता। सोफिया लॉरेन अभिनीत इस फिल्म का नाम ‘मैरिज इटैलियन स्टाइल’ था। नियम रहा है कि शिशु के जन्म के 40 दिन बाद ही आरोपी महिला को गिरफ्तार किया जा सकता है। इस मनोरंजक फिल्म में सोफिया लॉरेन अभिनीत पात्र एक के बाद एक 5 शिशुओं को जन्म देती है।

फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है और अगली बार यह होता है कि नायिका गर्भवती नहीं होती। पुलिस उसे गिरफ्तार करने आती है, तो महिला हिकारत से अपने पति को कुछ अपशब्द कहती है। फिल्मों के कुछ संवाद लंबे समय तक याद रहते हैं। संजीव कुमार और जीनत अमान अभिनीत व शम्मी कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मनोरंजन’ में नायक को एक तवायफ से प्रेम हो जाता है।

जब उस तवायफ को अपने प्रेमी के बारे में पता चलता है कि वह किसी नौकरी पर भी जाता है, तो वह अपने प्रेमी से कहती है कि ‘इस तरह उसके काम पर जाने पर तवायफों की बस्ती में उसकी बदनामी होगी। आस-पास के लोग कहेंगे कि क्या वह अपने एक अदद प्रेमी को भी पाल नहीं सकती कि बेचारा काम पर जाए।’ ‘वॉट ए वे टू गो’ नामक एक अमेरिकन फिल्म में एक सुंदर स्त्री खूब जांच पड़ताल करके एक अमीर वृद्ध व्यक्ति को खोजती है और विवाह कर लेती है। कभी-कभी उम्रदराज व्यक्ति अपने एकांकीपन को दूर करने के लिए विवाह कर लेते हैं।

ज्ञातव्य है कि खुश रहने वाली विधवा पर कुछ किताबें भी लिखी गई हैं। राज कपूर की ‘प्रेम रोग’ विधवा के दूसरे विवाह विषय से प्रेरित एक गंभीर फिल्म थी, जिसमें एक संवाद का आशय था कि सूरज विधवा को अपनी रोशनी से वंचित नहीं रखता, हवा भी उसे उपलब्ध है जैसे सभी आम लोगों को प्राप्त है तो फिर वह दूसरा विवाह क्यों नहीं कर सकती? दरअसल ‘प्रेमरोग’ समाज के दोहरे मापदंड पर प्रहार करती है कि साधन संपन्न व्यक्ति के लिए आम आदमी से अलग जीवन मूल्य क्यों बनाए गए हैं?

टेक्नोलॉजी का विकास फिल्मकारों को नए विषय उपलब्ध कराता है। अंतरिक्ष, पर्यटन भी ऐसा ही विषय है। इस विषय पर बनी फिल्म में आवेदक से मोटी रकम लेकर उसे अंतरिक्ष यात्रा के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है, जहां अंतरिक्ष में यात्रा का अनुभव रचा गया है।

गोया की चोरी करने की कला के प्रशिक्षण के लिए बनाए गए एक केंद्र पर बांग्ला भाषा में उपन्यास ‘रात के मेहमान’ मनोज बसु ने लिखा है, जिसका हिंदी भाषा में अनुवाद भी किया गया है। भारत में बैंक से कर्ज लेकर नहीं लौटाने वाले कई लोगों ने विदेश की नागरिकता प्राप्त कर ली है। अब ये लोग अपना एक क्लब भी बना सकते हैं।

चतुर सुजान ऐसी जायदाद कागजों पर रचते हैं, जो अस्तित्व में है ही नहीं। अफसर बाकायदा इन स्थानों पर जाकर फर्जी रपट दर्ज करते हैं। चौर्य कर्म को प्राचीन किताबों में चौंसठी कला का दर्जा दिया गया है। ऐसी कोई आधुनिक विद्या नहीं है जिस पर प्राचीन किताब उपलब्ध नहीं हो।