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एन. रघुरामन का कॉलम:समस्याएं हर जगह हैं; बेहतर कॅरिअर बनाने का एकमात्र तरीका समाधान देने वाला बनना है

18 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

पिछले साल के मध्य में मेरे ममेरे भाई और उसकी पत्नी ने लंदन में वीडियो कॉल पर अपने पालतू कुत्ते को घर लाने का जश्न मनाया। पूरा परिवार कुत्ते की खूबसूरती पर हैरान था। लेकिन भाई नाराज था कि मैंने सराहना नहीं की, जो उसके लिए जरूरी थी क्योंकि परिवार में मैं ही हूं जो पिछले 40 वर्ष से कुत्ते पाल रहा हूं, वह भी जोड़े में। ऑनलाइन जश्न के बाद उसने मुझे फोन किया तो मैंने वे समस्याएं बताईं, जिनका सामना महामारी के बाद, ऑफिस जाने पर करना पड़ सकता है।

अकेले पालतू को तनाव (एंग्जायटी) की समस्या हो सकती है। अलगाव का तनाव हमेशा समस्या रहा है लेकिन मेरा अनुमान था कि महामारी स्थिति और बिगाड़ेगी क्योंकि पालतुओं के नए मालिकों में आधे लोग 16 से 35 वर्ष के हैं, यानी वे कामकाजी हैं। उनमें से कई फिलहाल महामारी के कारण घर पर हैं, जिससे पालतुओं को महसूस हो रहा है कि उनके मालिक हमेशा साथ रहेंगे।

मेरे पालतू कभी अकेले नहीं रहते क्योंकि घर पर हमेशा कोई न कोई होता है, लेकिन जब मैं सूटकेस पैक करता हूं तो वे समझ जाते हैं कि मैं जा रहा हूं। कुत्ते के घबराने का पहला संकेत है कि वे आवाज ऊंची करने लगते हैं। कई बार कूदते हैं और सूटकेस के अंदर बैठकर कपड़े रखने से रोकते हैं। वे भौंकते हैं, रोते, चीखते हैं और मुझे बताते हैं कि वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मुझे उन्हें बताना पड़ता है कि देखो घर पर कौन-कौन है और पापा काम से बाहर जा रहे हैं।

मेरे भाई के पालतू की एंग्जायटी को लेकर मेरा अनुमान पिछले महीने सच साबित हुआ। न सिर्फ मेरे भाई के कुत्ते के साथ, बल्कि ऑफिस जाना शुरू कर रहे दुनियाभर के मालिकों के पालतुओं में निर्भरता की समस्या अचानक बढ़ रही है। ऐसा मुलायम बालों वाली डॉशंड जैसी छोटे आकार की (मिनिएचर) नस्लों में ज्यादा है। इसमें हैरानी नहीं क्योंकि कई मिनिएचर्स को मूलत: कंपेनियन (साथी) डॉग की तरह पालते हैं। इसलिए अक्सर वे मालिक की गोद में दिखते हैं।

इस नई उभरती समस्या को देखते हुए ग्लासगो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ‘डॉग फोन’ बनाया है, जिससे अकेले रह रहे पालतू अपने मालिकों को दिन में काम के वक्त वीडियो कॉल कर सकें। फोन एक गेंद में छिपे एक्सेलरोमीटर से काम करते हैं, जिसके हिलने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर शुरू हो जाता है। यह उत्पाद ‘फर्बो’ नाम से बिक रहा है। हाल के वर्षों में पालतू जानवरों के लिए तकनीक का बाजार तेजी से बढ़ा है। जैसे स्मार्ट कैमरा पालतुओं पर नजर रखने में मदद करते हैं। ग्लोबल मार्केट इनसाइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक पालतुओं की टेक्नोलॉजी का बाजार 2027 तक 25 बिलियन डॉलर के पार होगा।

हालांकि इन उपकरणों को अच्छी मंशा से बनाया गया है, लेकिन पालतुओं के अकेलेपन को संभालना अलग बात है क्योंकि उन्हें अपनी डेस्क से फोन कर आप जरूर राहत महसूस करें, लेकिन कुछ पालतुओं को मालिक के आसपास न होने पर भी आवाज सुनाई देने से तनाव महसूस हो सकता है। कई मालिक यह नहीं समझ पाते कि कुत्ते जीवित और भावुक जीव हैं, कोई रोबोट नहीं। समाधान देने वाले इसपर विचार करें और मुझे यकीन है, वे बेहतर समाधान लाते रहेंगे।

फंडा यह है कि बेहतर कॅरिअर बनाने का एकमात्र तरीका समाधान देने वाला बनना है। आपको सिर्फ समस्या पहचानने वाली नजर चाहिए, फिर वह प्राकृतिक हो या इंसान द्वारा बनाई गई। यकीन मानिए आसपास कई समस्याएं मिलेंगी।