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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:सफल हो जाएं तो अहंकार न हो और असफल हो जाएं तो अवसाद न हो

15 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

बिना संघर्ष के कुछ भी हासिल नहीं होगा। घर के बाहर की दुनिया में सारी कार्यशैली ऐसी हो गई है कि हर कदम लगता है अंगारे पर रखना पड़ेगा। लोग पानी से ज्यादा तो आग पी जाएंगे। सफलता प्राप्त करने की जलन ऐसी होगी जो किसी जल से नहीं बुझेगी। आने वाले तीन-चार साल में 75% लोग घर से काम करने लगेंगे। तो तय है कि घर का वातावरण भी उबाल लेगा।

पहले ही प्रेम-संवेदना घर से गायब हो रही थी, अब व्यवसाय प्रवेश कर गया। वर्क फ्रॉम होम, नर्क फ्रॉम होम में कब बदल जाएगा पता नहीं लगेगा। इसलिए आप जिस भी क्षेत्र में हों कुछ मौलिकताएं अपने भीतर से ढूंढो। यह समय है जब राजनेताओं के नारों में यथार्थ ढूंढा जाए, संतों की वाणी में सत्य तलाशा जाए, नौकरशाहों के निर्णयों में ईमान देखा जाए और अपने कर्म में निष्कामता उतारी जाए।

निष्कामता का अर्थ है सफल हो जाएं तो अहंकार न हो और असफल हो जाएं तो अवसाद न हो। तो संघर्ष के माहौल में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वाधिक भरोसा स्वयं पर करें और इस भरोसे को परमशक्ति से जोड़ें।