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  • Pt. Vijayshankar Mehta We Need Heaven So That We Become So Close To God That If We See God In Everyone, Then Discrimination Will Disappear.

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:हमें स्वर्ग की जरूरत है ताकि हम ईश्वर के इतने निकट हो जाएं कि हमें सबमें ही ईश्वर दिखने लगे तो भेदभाव मिट जाएगा

17 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

कुछ भक्त कहते हैं कि ईश्वर भेदभाव क्यों करता है? अगर ईश्वर की सुनें तो वो हमेशा से यही बोलते हैं कि मैं भाव का भूखा हूं, किसी से भेद नहीं रखता। प्राणियों के भाव के कारण भेद दिखता है। हम भगवान को जिस भाव से पूजेंगे, भगवान उसी भाव से हमारे जीवन में आएंगे।

भगवान का कहना है कि मुझे समझना चाहते हो तो ग्रंथों को जीवन में उतारो। यह सही है कि कोई भी ग्रंथ या शास्त्र आपको स्वर्ग नहीं ले जाएंगे। लेकिन यह भी सही है कि वे स्वर्ग को आप के भीतर ले आएंगे और स्वर्ग में भेदभाव नहीं होता। वहां परमात्मा की निकटता होती है। इस समय हमारा जिस तरह का जीवन है, उसमें हमें अमीर-गरीब का भेदभाव सबसे ज्यादा दिख रहा है।

उसके बाद स्त्री-पुरुष का भेदभाव हमारे जीवन को प्रभावित करता है। हमें स्वर्ग की जरूरत है ताकि हम ईश्वर के इतने निकट हो जाएं कि हमें सबमें ही ईश्वर दिखने लगे तो भेदभाव मिट जाएगा। वरना आज हमारे देश में 20 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं। 30 करोड़ की आमदनी 375 रुपए से भी कम है।

महंगाई तो माथे पर तांडव कर रही है। फैशन जीवनशैली बन गया, पहले ये सिर्फ जीवनशैली का हिस्सा था। फैशन पर लोग इतना खर्च करते हैं कि दुनिया की आधी आबादी का पेट भर जाए। यदि आप इन भेदभाव से गुजर रहे हैं तो अपने जीवन में शास्त्र उतारें और शास्त्र के राजमार्ग से परमात्मा तक पहुंचें तो शायद ये भेदभाव आपको अशांत नहीं करेगा।