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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:भावनाएं मनुष्य के भीतर घटती हैं और हम भावनाओं के कारण परेशान होते हैं

21 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

कोई कितना ही परिश्रमी हो, उत्साही हो, ताकतवर हो पर एक न एक दिन थकेगा जरूर। उसके अपने थकने की सीमा हो सकती है। पर बिना थके कोई कैसे रह सकता है। थकान भी दो तरह की होती है- एक शारीरिक, दूसरी मानसिक थकावट है। शारीरिक थकावट को विश्राम से दूर किया जाता है। यदि ऐसा नहीं किया तो बीमारी प्रवेश करने के लिए तैयार है।

मानसिक थकान समझदारी के साथ दूर की जाती है। यदि इसमें समझ न रखी तो मानसिक थकान अवसाद यानी डिप्रेशन में बदल सकती है। इसमें मानसिक थकान के प्रति अतिरिक्त रूप से सावधान रहिए। हमारी बाहर की दुनिया में घटनाएं घटती रहेंगी। हमारा कई परिस्थितियों और व्यक्तियों पर नियंत्रण नहीं रहता। घटनाएं संसार में घटती हैं।

भावनाएं मनुष्य के भीतर घटती हैं और हम भावनाओं के कारण परेशान होते हैं। बाहर के व्यक्तियों व परिस्थितियों के कारण उतना परेशान नहीं होते। ये भावनाएं भी मानसिक थकान से संचालित हैं। मानसिक थकान को दूर करने के लिए एक बड़ा प्यारा-सा विश्राम है जिसको योग कहते हैं। योग करते रहना चाहिए।