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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:मन पर अन्न का होता है बड़ा प्रभाव, अन्न को लेकर रहें संकल्पित

2 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

पिछले साल हम लोगों ने भूख को एक नए रूप में देखा था। महामारी के चलते दुनिया भले ही रुक गई थी, पर पेट की मांग लगातार चल रही थी। तालाबंदी के बीच जो लोग यहां-वहां उलझ गए थे, उन्हें तो अन्न सचमुच भगवान जैसा लगने लगा था। कल देश के अधिकांश भाग में अन्नकूट उत्सव मनाया गया। यह भूख और अन्न को एक नई दृष्टि देता है। हमारे यहां अन्नकूट का पर्व इसलिए भी मनाया जाता है कि हम अन्न के महत्व को समझ सकें।

अन्न का सबसे बड़ा महत्व यह नहीं है कि वह हमारी भूख मिटाता है, बल्कि अन्न से हमारा मन भी बनता है जो हमारी शांति और अशांति का कारण होता है। इसलिए जिन्हें शांति की तलाश हो, वे अन्न के प्रति अतिरिक्त रूप से सावधान रहें। कहते हैं जैसा अन्न, वैसा मन। तो चूंकि मन पर अन्न का बड़ा प्रभाव होता है, इसलिए अन्न को लेकर हमें दो संकल्प लेना चाहिए।

पहला यह कि स्वयं भूख से अधिक न खाएं और दूसरा, हमारे आसपास कोई भूखा न रह जाए। हम कुछ भी, कितना ही दान करें, लेने वाले को कुछ न कुछ कमी रह ही जाती है, परंतु अन्नदान ऐसा है कि जब पेट तृप्त हो जाता है तो लेने वाला और लेने से मना कर देता है। यही पूर्ण दान है। इसलिए अन्न के, अन्नदान के महत्व को समझा जाए।