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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अगर हम खुशी का चयन कर लें तो अपशब्द प्रभावित नहीं करेंगे

2 महीने पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

चयन करने की आदत इंसान और जानवर दोनों में होती है। इंसान के पास बुद्धि है, विवेक है तो चयन की संभावना अधिक हो जाती है, पशु के पास कम। वैज्ञानिकों ने श्वान यानी कुत्ते पर प्रयोग किया। प्रतिदिन पहले घंटी बजाई जाती, फिर रोटी दी जाती। कुछ समय बाद जब घंटी बजाई और रोटी नहीं दी तो कुत्ते की लार टपकने लगी।

हम स्थितियों का चयन कर लेते हैं। जैसे किसी ने हमें अपशब्द कहे तो हमें क्रोध आ गया। अपशब्द से लेना-देना नहीं है, क्रोध का चयन हमें करना है। अगर हम खुशी का चयन कर लें तो अपशब्द प्रभावित नहीं करेंगे। इसलिए अपने चयन के प्रति जागरूक रहें। परेशान होना, आनंदित रहना ये हमारा चयन है।

इसलिए जब भी किसी स्थिति का चयन करना हो तो सोचें कि हमारे लिए सही, फायदेमंद क्या है? जिस स्थिति का चयन कर रहे हैं वो कितना नुकसान पहुंचा सकती है, इसको लेकर जागरूक रहें। यदि हमारा चयन सही है तो हम जिस रास्ते से निकलेंगे हमारे पैरों की आहट से रास्ते भी हंस दिया करेंगे। आपका स्वयं का चयन जिस स्थिति का होता है आप वैसे हो जाते हैं।