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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:जो लोग अतिरिक्त रूप से जाग्रत रहेंगे फिर उनसे कोई गलत काम नहीं होगा

23 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

अधिकांश लोगों में कर्म के मामले में कुछ बातें देखी जा रही हैं। लोग जिम्मेदारी लेना नहीं चाहते। जिम्मेदारी मिल जाए तो निभाना नहीं चाहते। निभाना पड़े तो जवाबदेही से बचते हैं और जवाब देना पड़े तो झूठ बोल जाते हैं। ऐसे लोग हमारे आसपास भी होंगे। बस ध्यान रखें कहीं हम उन जैसे न हो जाएं।

जब भी कोई कर्म करें पांच बातों को मस्तिष्क में रखिए। ये पांच बातें गीता के 18वें अध्याय में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताई थीं। ‘अधिष्ठानम्, तथा, कर्ता, करणम्, च, पृृथग्विधम्। विविधा:, च, पृथक, चेष्टा:, दैवम्, च, एव, अत्र, पंचमम्।’ अधिष्ठान यानी देह। सबसे पहले शरीर की जरूरत पड़ती है। फिर कर्ता, यानी करने वाला व्यक्ति। करणम् यानी कई उपकरण लगते हैं उस काम में। चेष्टा यानी प्रयत्न करना पड़ता है और पांचवीं बात दैवम् यानी पूर्व कर्मों के संस्कार।

इन पांच बातों का तालमेल हमें ठीक से बैठाना चाहिए। इनका यदि सदुपयोग किया तो कर्म श्रेष्ठ हो जाएगा। जो लोग इनके प्रति अतिरिक्त रूप से जाग्रत रहेंगे फिर उनसे कोई गलत काम नहीं होगा।