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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:आप ही धन का इंतजार नहीं कर रहे, सम्पत्ति भी आप की प्रतीक्षा कर रही है

16 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

अगर आप धन कमाने निकले हैं तो दो बातों का संकल्प लीजिए- ईमानदारी व परिश्रम। साथ ही दो बातें जीवन में कभी नहीं उतरने दें- भ्रष्टाचार व अपराध। इस समय देश में जो आर्थिक परिदृश्य है, उसमें धन कमाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। ये अवसर तुरंत लपक लेना चाहिए।

हमारे भीतर तीन व्यक्ति होते हैं, जो इसमें बाधा पहुंचाएंगे। इनकी प्रतीकात्मक पहचान है- लापरवाही, आलस्य और प्रमाद। लापरवाही का अर्थ है विफलता। लाभ की जगह हानि को स्वयं से आमंत्रण। आलस्य का अर्थ है सुस्ती और उत्साहहीनता। प्रमाद का मतलब एक तरह का नशा। जब आप कमा रहे हों और खर्च कर रहे हों तो हिसाब-किताब में भी सावधानी रखिए।

स्वामी विवेकानंद कहा करते थे कि यदि आपने किसी से कोई धन लिया है, वह चाहे मेहनताने के रूप में हो या दान के रूप में, हिसाब-किताब जरूर हो। जो हिसाब-किताब में कमजोर होगा, विवेकानंद उसे अपराधी मानते थे। इतनी सावधानी रखिए और जुट जाइए। आप ही धन का इंतजार नहीं कर रहे, सम्पत्ति भी आप की प्रतीक्षा कर रही है।