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रुचिर शर्मा का कॉलम:पूर्वी यूरोप का पोलैंड दुनिया का अगला विकसित देश बन सकता है, संभावना है कि कुछ ही समय में यह विकसित क्लब में शामिल हो जाए

7 दिन पहले
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रुचिर शर्मा, लेखक और ग्लोबल इंवेस्टर - Dainik Bhaskar
रुचिर शर्मा, लेखक और ग्लोबल इंवेस्टर

सोवियत संघ के पतन के बाद नए लोकतंत्रों के पालने के रूप में उभरा पूर्वी यूरोप अब प्रतिक्रियावादी लोकवादी ‘इंक्यूबेटर’ के रूप में आलोचना का शिकार हो रहा है, खासतौर पर पोलैंड और हंगरी में। लेकिन राजनीतिक रूप से पतन ही इसकी आर्थिक प्रगति को और दिलचस्प बना देता है। किसी देश के लिए गरीब से अमीर बनना दुर्लभ रहा है। आईएमएफ 195 अर्थव्यवस्थाओं में से सिर्फ 39 को ‘एडवांस’ यानी विकसित मानता है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सिर्फ 18 देश विकसित हुए हैं और वे क्षेत्रीय समूह में दिखते हैं।

पहले आया दक्षिण यूरोप, जिसमें ग्रीस और पुर्तगाल हैं, फिर आया पूर्वी एशिया, जिसमें दक्षिण कोरिया और ताइवान हैं। अब पूर्वी यूरोप अगला हॉटस्पॉट है। विकसित श्रेणी में पहुंचे पिछले दस देशों में चार छोटे देश या इलाके हैं, जैसे पोर्तो रीको और सैन मरिनो। बाकी के पूर्वी यूरोप के पूर्व-कम्युनिस्ट देश हैं- चेक और स्लोवाक रिपब्लिक, लिथुआनिया, लातविया, एस्टोनिया और स्लोवेनिया। विकसित हैसियत पाने वाली पिछली बड़ी अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया (1997 में) थी और अगली शायद पूर्वी यूरोप से होगी।

विकसित देशों की प्रति व्यक्ति आय $17000 से ज्यादा होती है। इसके करीब पहुंच रहे देशों में एकमात्र बड़ा देश पोलैंड हैं, जहां प्रति व्यक्ति आय $15,000 से ज्यादा है। हंगरी में यह $16,000 और रोमानिया में $13,000 है। विकास का रहस्य है लगातार मजबूत वृद्धि। युद्ध के बाद के दशक में, अधिकांश उभरते देश विकसित दुनिया से औसत आय के मामले में पीछे रह गए। व्यापार और पूंजी प्रवाह धीमा होने के साथ-साथ वैश्वीकरण के दौर में चुनौती बड़ी हो रही है। इस परिदृश्य में पूर्वी यूरोप अलग साबित हो रहा है।

पिछले तीन दशकों में पोलैंड 4% से ज्यादा की औसत वार्षिक दर से बढ़ा है। आज पूर्वी यूरोप के पास पूर्वी एशिया का एक गुण है, जो लंबी अवधि की वृद्धि देता है। यह है विनिर्माण कौशल। क्योंकि इससे नियमित निर्यात आय मिलती है, जो दोबारा निवेश की जा सकती है। 1945 के बाद विकसित वर्ग में पहुंचने वाली 18 अर्थव्यवस्थाओं में से कोई भी तेल या कमोडिटी की निर्यातक नहीं है। चार छोटे पर्यटन या वित्तीय केंद्र हैं, जैसे मकाऊ। बाकी फैक्टरी अर्थव्यवस्थाएं हैं, जिनकी जीडीपी में 15-25% विनिर्माण की और 89% निर्यात की हिस्सेदारी है।

इस वर्ग में उभरती पूर्वी अर्थव्यवस्थाएं पश्चिमी यूरोपियन बाजारों के नजदीक स्थित निर्यात फैक्टरियों के बल पर बढ़ रही हैं। कई महंगी जर्मन कारें हंगरी या रोमानिया में बन रही हैं। पोलैंड कार पार्ट्स ले लेकर वीडियो डिस्पले तक, सबकुछ निर्यात करता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था विकसित देशों में तेजी से बढ़ रही है। पोलैंड इसमें अग्रणी है। जीडीपी में डिजिटल राजस्व की हिस्सेदारी के आधार पर वह पहले ही शीर्ष 20 वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में है। बिजनेस के लिए यात्रा करने वालों के लिए पौलेंड विश्वस्तरीय कंपनियों वाले देश की हैसियत रखता है।

आज पूर्वी यूरोप की आलोचना अदालतों और मीडिया के पतन पर केंद्रित है, लेकिन इसमें बहुत प्रगति की कमी है। अन्य पूर्व सोवियत अनुगामियों की तरह, पोलैंड ने यूरोपीय संघ में शामिल होने की कीमत के रूप में संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाया और स्थिरता तथा सब्सिडी में लाभ प्राप्त करना जारी रखा। यूरोपीय केंद्रीय बैंक का डेटा बताता है कि 1989 से 2020 के बीच 6 पूर्व-कन्युनिस्ट देश, जो हाल ही में विकसित श्रेणी में आए, उन्हें ईयू से उनकी जीडीपी की एक फीसदी से भी ज्यादा सब्सिडी मिली।

यह सोवियत साम्यवाद को छोड़ने का इनाम था। सब्सिडी पाने वालों में पोलैंड, हंगरी व रोमानिया भी थे। अनुमान है कि अगले 5 वर्ष भी ईयू की सब्सिडी जारी रहेगी। यदि आम सहमति का पूर्वानुमान सही है, तो पोलैंड की प्रति व्यक्ति आय 2022 में 17,000 डॉलर से अधिक हो जाएगी, और संभावना है कि कुछ ही समय में यह विकसित क्लब में शामिल हो जाए। वह क्षण कभी भी आए, पूर्वी एशियाई चमत्कारों के बाद, अब पूर्वी यूरोप के पूर्व-कम्युनिस्ट राज्यों ने पहले से ही खुद को विकास की सफलता की कहानियों के केंद्र में स्थापित कर लिया है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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