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थाॅमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:रिपब्लिकन्स 21वीं सदी के अमेरिका में प्रतिस्पर्धी होंगे, तभी अमेरिका 21वीं सदी की दुनिया में प्रतिस्पर्धी होगा

7 दिन पहले
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थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार - Dainik Bhaskar
थाॅमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में नियमित स्तंभकार

वामपंथी सैन फ्रांसिस्को बोर्ड ऑफ एजुकेशन, डोनाल्ड ट्रम्प की दक्षिणपंथी रिपब्लिकन पार्टी और मेरे आस-पड़ोस में घूमने वाले हिरणों में क्या समानता है? बहुत ज्यादा है। और इस पर अमेरिकी लोकतंत्र का भविष्य निर्भर करता है। मैं हिरण से शुरुआत करता हूं। वे यहां इतने सहज इसलिए हैं क्योंकि वे जानते हैं कि यहां कोई शिकारी नहीं है। इसलिए वे बीच सड़क दौड़ते हैं और हमारे फूल खा जाते हैं।

ये हिरण सैन फ्रांसिस्को बोर्ड ऑफ एजुकेशन की तरह हैं, जिसने हाल ही में उन 44 स्कूलों के नाम बदलने का फैसला लिया है, जिनके नाम, उसके मुताबिक ऐसे लोगों के नाम पर हैं कि जिनका व्यवहार नस्लभेदी रहा था। इसमें अब्राहम लिंकन तक शामिल हैं। उन्होंने बच्चों को स्कूल लौटाने से पहले इस काम को प्राथमिकता दी है। ऐसी बेवकूफी होती है क्योंकि मेरे हिरण की तरह सैन फ्रांसिस्को स्कूल बोर्ड का भी कोई राजनीतिक शिकारी नहीं है।

यहां उदारवादी डेमोक्रेट्स का दबदबा है, इसलिए उन्हें रूढ़िवादी विकल्प से कोई गंभीर खतरा नहीं है। यह ट्रम्प और उनके समर्थकों की तरह नहीं है, जिनका ट्रम्प से लगाव किसी पंथ की तरह है। इतना कि अगर कोई रिपब्लिकन नेता ट्रम्प को चुनौती देता है तो यह राजनीतिक आत्महत्या जैसा होगा। नतीजा, उनका भी कोई गंभीर शिकारी नहीं है। मेरा हिरण और सैन फ्रांसिस्को स्कूल बोर्ड स्थानीय समस्याएं हैं।

यह तथ्य एक राष्ट्रीय समस्या है कि अमेरिका की एक पार्टी, ऐसे नेता से जुड़ी रहेगी, जिसने कैपिटल पर हमले के लिए भीड़ भेजी थी। यह कैंसर की तरह है और इसके इलाज में धैर्य रखना होगा। मुझे लगता है कि इसके लिए सीनेट में लुटेरों को हटाना होगा, कोलंबिया जिले और पोर्टो रिको को राज्य का दर्जा देना होगा और मतदाताओं के दमन को रोकने के लिए नया मतदान अधिकार अधिनियम लाना होगा। तब अमेरिका की राजनीतिक सेहत सुधरेगी।

थोड़ा इतिहास जानते हैं। मिट रॉमनी जब ओबामा से हारे थे तो 2012 में एक नई रिपब्लिकन पार्टी बनने वाली थी। उनकी अफ्रीकन-अमेरिकन, एशियन और समलैंगिक वोटरों को साथ लेकर जीत हासिल करने की योजना थी। लेकिन इस योजना की जगह उन्होंने सत्ता पाने के लिए ट्रम्प नाम के आदमी को चुना, जो परोक्ष रूप से श्वेत श्रेष्ठतावादी और मतदाताओं का दमन करने वाला था।

तो फिर से ऐसा क्यों नहीं कर सकते? नैस्डैक वर्ल्ड रिइमेजिंड में योगदान देने वाले गौतम मुकुंद कहते हैं, ‘रिपब्लिकन पार्टी की इस रणनीति पर निर्भरता का नतीजा यह हुआ कि अमेरिकी सरकार के जिस तंत्र को अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण करना था, वह अल्पसंख्यकों के राज को समर्थ बनाने लगी। रिपब्लिकन्स 1989 से अब तक 2 ही बार लोकप्रिय मत से जीते हैं। डेमोक्रेट्स ऐसा 7 बार कर चुके हैं।

बहुसंख्यकों को अच्छे शासन के जरिए जीतना मुश्किल है, जबकि अल्पसंख्यकों की शिकायतों से आकर्षित करना आसान है। रिपब्लिकन्स से आसान रास्ता चुना।’ क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अमेरिकी राजनीति कितनी स्वस्थ होती, अगर हमारे पास मध्य-दक्षिणपंथी रूढ़िवादी पार्टी होती, जो विविधता, समावेशिता को अपनाती, स्वास्थ्य और आप्रावासन सुधार करती और मध्य-वामपंथी पार्टी से प्रतिस्पर्धा करती?

मैं आपको गारंटी देता हूं कि रिपब्लिकन पार्टी सैन फ्रांसिस्को और कैलिफोर्निया में सत्ता के लिए फिर चुनौती बन सकती है। डीसी और पोर्टो रिको में सीनेटर के लिए लड़ सकती है। 2020 के चुनाव में कैलिफोर्निया के मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक सांसदों की ओर से पारित कुछ उदारवादी पहलों को नकार दिया था। राष्ट्रीय स्तर पर ट्रम्प ने भी अश्वेत और लैटिनो वोटर्स में कुछ आधार बना लिया था।

यह बताता है कि मध्य-दक्षिणपंथी रूढ़िवादी पार्टी की गुंजाइश है, जो आज के अमेरिका को अपील करे। पूर्व सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जॉर्ज शुल्त्ज के पास 100 साल की उम्र में भी रिपब्लिकन को समावेशी और आज की चुनौतियों में प्रासंगिक बनाने के लिए ढेरों आइडिया थे। ट्रम्प और मैक्कॉनल की तुलना में कहीं ज्यादा। क्या आपने ट्रम्प से ऐसा एक भी आइडिया सुना था, जिसे उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में लागू करने की बात कही हो?

मुकुंद कहते हैं, ‘रिपब्लिकन्स 21वीं सदी के अमेरिका में प्रतिस्पर्धी होंगे, तभी अमेरिका 21वीं सदी की दुनिया में प्रतिस्पर्धी होगा।’ क्योंकि याद रखें, हमने भी हमारा राष्ट्रीय शिकारी खो दिया है: सोवियत संघ। सोवियत कम्युनिस्ट के खतरे ने अमेरिकियों को 40 साल तक एक बनाए रखा था।

आज वो एकता गायब है। हम बतौर राष्ट्र अपनी क्षमता तब तक नहीं समझ पाएंगे, जब तक दोनों पार्टियां साझा जुड़ाव के साथ काम नहीं करेंगी, जो ज्यादा विविध अमेरिका को 21वीं सदी की यात्रा में समर्थ बनाए। आज, दुखद यह है कि केवल एक पार्टी काम कर रही है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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