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एन. रघुरामन का कॉलम:ओमिक्रॉन के विरुद्ध खुद के और समाज के बचाव के लिए ‘स्लाइडिंग स्केल’ कारगर उपाय है

7 महीने पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के बारे में इस हफ्ते की शुरुआत में आई नई जानकारी से साफ हो गया कि ये देश बचाव की तैयारी करते, उससे पहले ही खतरा विकराल हो गया। अब साबित हो चुका है कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार की चेतावनी (24 नवंबर) से पहले ओमिक्रॉन के शुरुआती मामले उससे काफी दूर न्यूजीलैंड (19 नवंबर), जापान, फ्रांस में मिले। इसने दुनिया को फिर से सामान्य होने की उम्मीद और बुरे से बुरा आने के डर के बीच बीच धकेल दिया है।

नए वैरिएंट के बारे में बहुत कुछ अज्ञात है। जबकि डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि ओमिक्रॉन से वैश्विक खतरा बहुत ज्यादा है और सुुबूत बताते हैं कि यह ज्यादा संक्रामक हो सकता है। साउथ अफ्रीका व बोत्सवाना में तेजी से मामले मिलने के बाद आशंका है कि इस सप्ताह के अंत तक दुनिया में दोगुने या तिगुने मामले देखने को मिलेंगे।

बीती रात मैंने यूएस स्थित एक एनजीओ ‘कोविडआरएक्सएक्सचेंज’ के डॉ. शशांक हेड़ा से बात की, यह जोखिम प्रबंधन से निपटने में नीति निर्माताओं की मदद करता है। डॉ. शशांक ने बताया कि ‘हमें “स्लाइडिंग स्केल” सिद्धांत अपनाना चाहिए, इसका मतलब है माहौल के जोखिम के आधार पर एहतियाती व्यवहार बढ़ाना।’ चूंकि वैज्ञानिक मानते हैं कि बहुत ज्यादा म्यूटेशन वाला नया वैरिएंट पहले की तुलना में ज्यादा संक्रामक हो सकता है, ‘स्लाइडिंग स्केल’ सिद्धांत कारगर रहेगा, कम से कम जब तक नए वैरिएंट के रहस्य से पर्दा नहीं उठ जाता। सच कहूं तो ज्यादातर भारतीयों ने बचाव में ढील देना शुरू कर दिया है।

पूरी दुनिया में हम आज सिर्फ दो समूहों में बंटे हैं- टीके लगे हुए और बिना टीके वाले, बाकी नहीं। मैं ऐसा कोई परिवार नहीं जानता, जिसने पहली-दूसरी लहर में किसी अपने को न खोया हो। इसलिए हमारी ओर बढ़ रहे 2020 जैसे मेडिकल आपात के हालात पैदा करके हम खुद को जोखिम में नहीं डाल सकते। यहां डॉ. शशांक के पांच प्रमुख सुझाव हैं।

1. बाहर काम के दौरान मास्क लगाएं। नम कपड़े के मास्क ना पहनेंं। अच्छी गुणवत्ता के सूखे मास्क लगाएं। अगर मास्क धोकर दोबारा यूज करते हैं, तो अच्छा डिटर्जेंट, एंटीसेप्टिक प्रयोग करें और तेज धूप में सुखाएं। न सिर्फ मुंह, नाक, कान ढंकें बल्कि आंखें भी चश्मे से ढंकें। कई बार आंखों के रास्ते भी वायरस चला जाता है, ‌‌विशेषतौर पर भीड़ भरी जगहों में। अगर नंबर का चश्मा नहीं है तो सामान्य चश्मा लगाएं। यह किसी भी अनजाने संक्रमणकारी या वायुजनित कणों को आपकी आंखों में प्रवेश से बचाएगा और नासिका के रास्ते से अंदर भेज देगा।

2. भले ही दोनों टीके लगे हैं, तब भी वैसा करें जैसा मार्च-अप्रैल 2020 में करते थे। भीड़ में जाने से बचें, बार-बार हाथ धोएं, बाहर की हर चीज सैनिटाइज करें। इससे डॉक्टर के पास कम जाना पड़ेगा।

3. योग, व्यायाम जारी रखें, पर्याप्त नींद के साथ बताए विटामिन्स लेते रहें। याद रखें कोविड का कम या गंभीर होना कम इम्यूनिटी से संबंधित नहीं, यह हाइपरइम्यून प्रतिक्रिया है। (इम्यूनिटी की अत्यधिक प्रतिक्रिया) अगर आप स्वस्थ हैं, तो इम्यूनिटी बढ़ाने की जरूरत नहीं।

4. बेहद जोखिम वाले जैसे बुजुर्ग या कैंसर मरीजों से मिलने के दौरान सारी सावधानियां बरतें, क्योंकि उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता कम है।

5. अगर आप बीमार हैं, तो खुद को आइसोलेट करेंं और एक से ज्यादा बार रिपोर्ट को निगेटिव आने दें। दुनिया में ऐसे कई मामले हैं, जहां तीन बार जांचने के बाद ही लोग पॉजिटिव मिले हैं।

फंडा यह है कि आजादी जिम्मेदारी भी है, पर इस आजाद अधिकार का आनंद अपनों के साथ ही मिलता है। इसलिए खुद के और समाज के बचाव के लिए ‘स्लाइडिंग स्केल’ फार्मूले को अपनाएं!