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डॉ. बिंदु अरोरा का कॉलम:बेरोजगारी से निपटने के लिए सॉफ्ट स्किल जरूरी, हमें व्यक्तिगत स्तर पर भी मूलभूत सॉफ्ट स्किल्स पर काम करना चाहिए

2 महीने पहले
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डॉ. बिंदु अरोरा, सीईओ, सेंटरपॉइंट फॉर स्किल्स - Dainik Bhaskar
डॉ. बिंदु अरोरा, सीईओ, सेंटरपॉइंट फॉर स्किल्स

थोड़े समय पहले एक खबर आई थी कि कोविड-19 के असर के कारण लगभग सारे देशों में ऑनलाइन नौकरियों की रिक्तियों की संख्या में 50 फीसदी तक की कमी आई है। इस आंकड़े में साल की शुरुआत की तुलना मई 2021 की शुुरुआत से की गई थी। ज्यादा वक्त नहीं गुजरा, जब हमने देखा कि एक सरकारी चपरासी की नौकरी के लिए 93 हजार लोगों ने आवेदन किया था।

इसमें 3700 पीएचडी धारी थे, तो 2800 पोस्ट ग्रैजुएट थे। यहां तक कि इंजीनियर, वकील और एक सीए ने भी इंटरव्यू दिया था। भारतीय रेलवे की एक लाख नौकरियों के लिए 2 करोड़ से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था। ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं। सार रूप में कहें तो जॉब मार्केट में मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है।

युवा आबादी की संख्या में भारत दुनिया में अव्वल है। एक रिपोर्ट के अनुसार हमारे यहां हर साल एक करोड़ युवा वर्कफोर्स में शामिल हो जाते हैं, पर रोजगार सृजन उस अनुपात में नहीं हो पाता। नतीजतन बेरोजगारी गंभीर समस्या बनती जा रही है। फिक्की की स्किल डेवलपमेंट कमेटी के सलाहकार मोहन दास पई का दावा है कि भारत में खराब कौशल वाले 21-35 आयु वर्ग के 10 करोड़ लोग हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार 25% भारतीय ग्रैजुएट ही संगठित क्षेत्र में रोजगार के योग्य हैं। वहीं दूसरी ओर असंगठित क्षेत्र, जिसमें 93% वर्कफोर्स शमिल है, वह ज्यादातर नौकरी में प्रशिक्षण पर आधारित है।

आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा ज्यादा जटिल है, इसके लिए भारत को न केवल तकनीकी और व्यावसायिक कौशल वाले संसाधनों की जरूरत है, बल्कि मांग में हो रहे लगातार बदलावों के मद्देनजर लचीलेपन की भी आवश्यकता है। एक सर्वे के अनुसार कौशल में कमी के कारण 48% भारतीय फर्म को खाली नौकरियां भरने में दिक्कत हो रही है।

36% भारतीय रोजगार प्रदाता अपनी कंपनी के कर्मचारियों को चुनकर उन्हें प्रशिक्षित करती हैं। आईटी क्षेत्र में सबसे ज्यादा स्किल की कमी सामने आ रही है। आज संचार कौशल के साथ-साथ खुद को अच्छी तरह प्रस्तुत करने पर भी ज्यादा जोर दिया जा रहा है। नौकरी खोजने से लेकर काम के दौरान भी सॉफ्ट स्किल्स को महत्व दिया जा रहा है।

जॉब मार्केट में अंतर को पाटने के लिए हमें स्किल ट्रेनिंग में बदलाव के साथ-साथ ताउम्र सिखाने वाले ऐसे लर्निंग प्रोग्राम बनाने की जरूरत है, जो सर्वसुलभ और प्रभावी हों। चूंकि कामकाज का माहौल लगातार बदल रहा है, ऐसे में सबके मुफीद एक ही स्किल डेवलपमेंट रणनीति नहीं बनाई जा सकती। हमारे यहां औसतन 29 साल की युवा कामकाजी आबादी है। हालांकि युवा वर्कफोर्स के बावजूद औपचारिक रोजगार का कौशल महज 5% के पास है, जबकि दुनिया की आधुनिक अर्थव्यवस्था में यह 60 से 90 फीसदी है।

अपनी युवा आबादी को हुनरमंद बनाकर मानव संसाधन की राजधानी बनने का भारत के पास एक अवसर है। हमारे पारंपरिक पाठ्यक्रम तेजी से बदलती दुनिया के साथ तालमेल बैठाने के हिसाब से होने चाहिए। इसके लिए सॉफ्ट स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम बेहतर करने की जरूरत है। हमें व्यक्तिगत स्तर पर भी मूलभूत सॉफ्ट स्किल्स पर काम करना चाहिए। ताकि बदलती दुनिया के हिसाब से खुद को योग्य बना सकें।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)