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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:शक्कर भी अजीब चीज है, रक्त में बढ़े तो मधुमेह हो जाता है और वैचारिक तूफान के समय एनेस्थीसिया का भ्रम उत्पन्न करती है

5 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

फिल्मकार अनुभूति कश्यप, ‘जंगली’ नामक प्रसिद्ध फिल्म निर्माण कंपनी के लिए आयुष्मान खुराना और रकुल प्रीत सिंह अभिनीत फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए शेफ़ाली शाह को अनुबंधित करने में सफल हो गए हैं। ज्ञातव्य है कि शेफ़ाली शाह के पति सफल फिल्मकार हैं और शेफ़ाली शाह, पटकथा में अपनी भूमिका का आकलन करने के बाद ही अभिनय करने के लिए रजामंद होती हैं। हमारे यहां फरीदा जलाल, रत्ना पाठक शाह अपने अभिनय से दर्शक के मस्तिष्क को रोशन कर देती हैं।

फरहान अख्तर की एक फिल्म में एक लाभ संचालित स्वार्थी उद्योगपति की पत्नी की भूमिका में अपने असंतोष को दबाने के लिए निरंतर चॉकलेट खाती रहती है। यह शक्कर भी अजीब चीज है, रक्त में बढ़े तो मधुमेह हो जाता है, वैचारिक तूफान के समय एनेस्थीसिया का भ्रम उत्पन्न करती है। फिल्म ‘डॉक्टर जी’ का घटनाक्रम शिक्षा संस्थान के परिसर में घटित होता है।

हॉलीवुड की फिल्म ‘हूज अफ्रेड ऑफ वर्जीनिया वूल्फ’ में शिक्षा संस्थान परिसर में रहने वाले प्रोफेसर पति-पत्नी बेहद शराब पीकर एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। शब्दवाणी का तरकस खाली होने पर हाथ-पैर भी चलाते हैं। फिल्मकार जर्जर, निष्प्रभाव शिक्षा प्रणाली की कमजोरियां उजागर कर रहा है। एलिजाबेथ टेलर और रिचर्ड बर्टन अभिनीत फिल्म, वर्तमान का भी आईना है। फिल्म ‘डॉक्टर जी’ में शेफाली शाह के लिए एलिजाबेथ टेलर अभिनीत भूमिका अपनी तैयारी में काम आ सकती है।

हर अभिनेता अपनी भूमिका के लिए तैयार होते समय रोल मॉडल से सहायता लेता है। एलिजाबेथ का शराब पीने द्वारा पलायन कुछ हद तक शेफ़ाली शाह अभिनीत पात्र के चॉकलेट खाने की तरह ही पलायन की मीठी गली के समान है। शक्कर या गुड़ को ताप देने की प्रक्रिया द्वारा ही शराब बनाई जाती है। अब तो शराब उत्पादन रसायनशाला में तत्वों से होता है। महुआ से शराब बनाई जाती रही है। गुड़ से बनी रम अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाती है।

लोकप्रिय गीत है, रम से भागे गम, जिन से भागे भूत-प्रेत, व्हिस्की पी तो मती खिसकी। यह वहीदा रहमान अभिनीत ‘खामोशी’ का गीत देवेन वर्मा पर फिल्माया गया था। शिक्षा परिसर और प्रणाली के गुण- दोष पर शांताराम जी ने जितेंद्र अभिनीत फिल्म ‘बूंद जो बन गई मोती’ बनाई थी। नया शिक्षक छात्रों को कुदरत के बीच ले जाकर पाठ पढ़ाता है।

फिल्मी गीत की पंक्तियां, हरी-भरी वसुंधरा पर नीला-नीला ये गगन के जिसपे बादलों की पालकी, उड़ा रही पवन, दिशाएं देखो रंग भरी, चमक रहीं उमंग भरी ये किसने फूल से किया श्रृंगार है, ये कौन चित्रकार है। राजकुमार हिरानी की ‘थ्री ईडियट्स’ इसी विषय पर बनाई गई फिल्म अत्यंत प्रभावोत्पादक बनी है। बहरहाल फिल्म ‘डॉक्टर जी’ बीमार प्रणाली के पोस्टमार्टम की रपट जाने क्या दिशा हमें देगी? फिल्मकार जानता है कि छात्र कक्षा में नहीं आते।

बेचारा कर्मचारी, शिक्षा अहाते में लगा घंटा, हर 45 मिनट पश्चात बजाता है। यह आवाज वादियों से लौटकर सभी ओर गूंजती है। कुछ लोग हर 45 मिनट में कान में रुई लगाते हैं। शिक्षा परिसर की पृष्ठभूमि पर कुछ बेहूदा फिल्में भी बनी हैं। कुछ इस तरह की खबरें हैं कि व्यवस्था एक पाठ्यक्रम बना रही है। इस कार्यक्रम के लागू करने के कुछ वर्षों पश्चात सभी छात्र एक सा विचार करेंगे, एक से वस्त्र पहनेंगे। छात्र, नाम से नहीं, नंबर से पहचाना जाएगा। नंबर 12 के बाद नंबर 14 आएगा और नंबर 420 दोहराया जाएगा।

सीधे हाथ पर ही नंबर अंकित किए जाएंगे। बाएं, हाथ को उपयोग में लाने पर प्रतिबंध होगा। वॉश रूम में सीसीटीवी कैमरे होंगे। हबीब फैसल की ऋषि कपूर और नीतू सिंह अभिनीत फिल्म ‘दो दुनी चार’ को निर्माता आदित्य चोपड़ा सहेज कर रखें। यह फिल्म एक गुजरे हुए दौर की विरासत रहेगी। नई व्यवस्था में शिक्षक से बेंत छीनकर छात्रों को दी जा सकती है। परिसर में लगे हुए घंटे के बीच का बजने वाला हिस्सा निकाल दिया जाएगा।