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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:हनुमानजी के गुण अपने भीतर उतार सुग्रीव की तरह आचरण करें,परमात्मा स्वयं आपके घर आएंगें

11 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

जिम्मेदार लोगों ने बड़ी उम्मीद और ताकत के साथ अनलॉक का निर्णय लिया है। आप बहुत कुछ स्वतंत्र कर दिए गए हैं, पर अब हमारी जिम्मेदारी है कि लापरवाह न हों, लॉकडाउन का पुनर्जन्म न कराएं। मुझे कई लोगों ने कहा कि यह क्या बात हुई? धर्मस्थल बंद हैं, धार्मिक आयोजन नहीं हो पा रहे हैं। लेकिन, इस समय ऐसी कोई भी जिद करना, हठ पर उतरना हमारा अनुचित व्यवहार होगा।

यदि जिद पर उतरे तो हम बालि जैसे हो जाएंगे। श्रीराम पर सवाल उठाया जाता है कि न वे बालि को जानते थे, न सुग्रीव को। फिर सुग्रीव का पक्ष क्यों लिया, बालि को क्यों मारा? राम ने हमेशा कहा कि मैंने बालि को नहीं मारा। मैंने एक गलत बात के लिए किए जा रहे हठ को, बुराई को पनपने देने वाले अहंकार को मारा। न मुझे बालि से कोई बैर था, न सुग्रीव से प्रेम।

मैं ऐसे किसी व्यक्ति के पास नहीं जाता जो मेरी नीतियों का समर्थन न करता हो। राम स्वयं सुग्रीव के पास आए थे, क्योंकि सुग्रीव ने सब खो देने के बाद भी हनुमान बचा लिए थे। हनुमान का अर्थ है एक अनुशासित जीवनशैली, परहित की भावना, बुराई का प्रतिकार। इस समय हनुमानजी के ये गुण अपने भीतर उतारें, सुग्रीव की तरह आचरण करें। फिर न आपको किसी धर्मस्थल में जाना है, न किसी धार्मिक आयोजन में। परमात्मा स्वयं आपके घर, आपके जीवन में चला आएगा।