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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:अध्यात्म साधना में ज्ञान प्राप्त होने को हीरा मिल जाना कहा जाता है, कबीर काव्य में इसका संकेत दिया गया है

2 वर्ष पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

राधिका आप्टे ने ‘स्लीप वॉकर’ नामक लघुकथा फिल्म का निर्माण किया है। कुछ लोगों को नींद में चलने का रोग हो जाता है। अगली सुबह उन्हें याद भी नहीं आता कि विगत रात उन्होंने क्या किया। 18वीं सदी के सातवें दशक में एक उपन्यास ‘मूनस्टोन’ प्रकाशित हुआ था। उपन्यास का कथा सार था कि एक अंग्रेज अफसर ने भारत के एक पुराने मंदिर में देवी की प्रतिमा से विरल हीरा निकाल लिया था। सेवानिवृत्त होने के पश्चात, वह हीरा लेकर लंदन पहुंचा।

देवी के भक्त उसका पीछा करते हुए लंदन आए। वे अपनी देवी का हीरा वापस ले जाना चाहते थे। उन्हें इसके लिए कानूनी आज्ञा प्राप्त नहीं हो सकी। कोहिनूर भी लंदन संग्रहालय में रखा गया है। एक हिंदुस्तानी राजा ने पड़ोसी देश के आक्रमण के समय अंग्रेजों की सेना की मदद ली थी। इस सेवा के बदले अंग्रेजों को कोहिनूर दिया गया था।

मूनस्टोन उपन्यास में प्रस्तुत किया गया कि अंग्रेज अफसर द्वारा दी गई दावत में मूनस्टोन, सगर्व सबको दिखाया गया। उस रात ‘मूनस्टोन’ चोरी चला गया। उपन्यास में प्रस्तुत किया गया है कि एक ईमानदार मेहमान ने नींद में चलते हुए हीरा उठा लिया और पास के दलदल में फेंक आया। पुलिस सबसे पहले देवी के उपासकों की तलाशी लेती है, परंतु उनके पास हीरा नहीं मिलता। उपन्यास में प्रस्तुत एक कुबड़ी सेविका ने हीरे की चोरी देखी है, परंतु वह मन ही मन अंग्रेज को प्रेम करती है।

वह किसी को कुछ नहीं बताती। ‘महाभारत’ में नितीश भारद्वाज ने श्रीकृष्ण की भूमिका का निर्वाह किया था। भारद्वाज की पत्नी ने खोज के बाद किताब लिखी ‘डायमंड ऑफ इंडिया’ जिसमें हीरों का अलग-अलग व्यक्तियों के हाथ लग जाने का विवरण था। एक हीरे को खरीदने वाला किसी दुर्घटना में मर जाता है। एक-एक करके उसके सारे मालिक मर जाते हैं। उस हीरे को लंदन के संग्रहालय में रखा गया। मान्यता है कि हीरा खरीदते समय व्यक्ति की कुंडली बताती है कि कौन सा हीरा उसके लिए लाभप्रद है।

धरती के गर्भ में विचित्र प्रक्रिया द्वारा हीरे का निर्माण होता है। भारत के गोलकुंडा नामक स्थान पर हीरे निकलते थे। एक दशक पूर्व यह खदान बांझ हो गई। प्रेमनाथ ने ‘प्रिजनर ऑफ गोलकुंडा’ नामक फिल्म बनाई थी, जिसे दर्शकों ने पसंद नहीं किया। हीरा चोरी के विषय पर फिल्म ‘शालीमार’ बनाई थी, जो असफल रही। हीरे के वजन के मापदंड को कैरेट कहते हैं। हीरे के न्यूनतम अंश में खोट होने से उसका मूल्य घट जाता है।

बहरहाल, राधिका आप्टे एक कथा फिल्म को लिखने का प्रयास कर रही हैं। महिला फिल्मकारों ने मनोरंजक फिल्में बनाई हैं। अरुणा राजे की ‘रिहाई’ पुरुष पाखंड को उजागर करती है। उसका संवाद कि ‘पत्नी से सीता जैसे आचरण करने की आशा करने वाले कभी तो राम से आचरण का लघुतम अंश प्रस्तुत करें।’ फिल्म ‘ज्वैलथीफ’ में हीरों की चोरी की कथा प्रस्तुत की थी। जिस पात्र पर चोरी का जरा भी शक नहीं होता, वही पात्र चोर निकलता है।

अमिताभ बच्चन, रेखा अभिनीत फिल्म ‘नटवरलाल’ भी हीरों से प्रेरित फिल्म थी। ‘विक्टोरिया नंबर 203’ भी इसी विषय पर रची रची गई फिल्म थी। राधिका आप्टे ‘डायमंड नेकलेस’ से प्रेरित एक फिल्म बना सकती हैं। हीरा प्रेरित नाम रखे जाते हैं, हीरामन, हीराबाई, हीराचंद इत्यादि। प्राय: हीराचंद मित्रों द्वारा हीरिये कहलाता है। एक लोकप्रिय मान्यता है कि हीरा चाटने से मृत्यु हो जाती है। यह तर्क सम्मत नहीं है कि हीरा निगलने से मृत्यु हो सकती है। हीरे के व्यापार में हीरे की कटिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस काम में जरा सी त्रुटि से लाखों का नुकसान हो जाता है।

लाहौर में तवायफों के रहवासी क्षेत्र का नाम हीरा मंडी हुआ करता था। अध्यात्म साधना में ज्ञान प्राप्त होने को हीरा मिल जाना कहा जाता है। कबीर काव्य में इसका संकेत दिया गया है। ‘हीरा पायो गांठ गठियायो, बार बार बाको क्यों खोले।’