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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:दया धर्म के धंधे, वे लूटें गौशाला के चंदे, नकली प्रमाण पत्र देकर संपन्न व्यक्ति ही लूट रहा है

3 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

सभी क्षेत्र भावना से प्रेरित और संचालित हैं। चुनाव में भी भावना की लहर काम करती है। कई बार वह नजर नहीं आती। किसी और सतह पर प्रवाहित रहती है। मार्था.सी की किताब पॉलिटिकल इमोशन में इसका विवरण दिया गया है। प्राय: भावना अपनी ऊर्जा से प्रभावित होती है। परंतु इसे बनाया भी जा सकता है।

हिटलर के प्रचार मंत्री गोएबल्स इसके पुरोधा माने जाते हैं परंतु वर्तमान में प्रवाहित लहर देखने पर गोएबल्स समय समुद्र तट पर रेत के घरौंदे बनाने वाला बच्चा सा नजर आता है, जो किनारे की सीपियों में मोती खोजता सा लगता है। यहां तक कि शेयर बाजार भी इसी से संचालित होता है। चाणक्य की राजनीति पर लिखी किताब का नाम भी ‘अर्थशास्त्र’ ही है।

गौरतलब है कि शरीर रचना में भी दिमाग का स्थान दिल के ऊपर ही है। दिल रक्त संचालन का पम्प मात्र है। मस्तिष्क का बांया भाग तर्क प्रधान है। बांए के संकेत पर ही दायां काम करता है। स्त्री को भी वामा कहा गया है। हवन में भी स्त्री, पुरुष के बांए ही बैठती है। हम सीधे हाथ से ही होम करते हैं ताकि बांया झुलसने से बचा सकें। कुछ लेखक कहते हैं कि वे मूड आने पर ही लिखते हैं। यह टाल-मटोल का आजमाया हुआ पैंतरा है। लेखन पर रोजी-रोटी निर्भर हो तो मूड बन जाता है।

गायक मात्रा गिनकर गाता है। संगीतकार द्वारा रचे गए मीटर पर गीत लिखा जाता है। एक बार जावेद अख्तर के घर बिजली की खराबी आई। मैकेनिक ने बताया कि उनके मीटर में खोट थी। जावेद ने मांगे गए मेहनताने से अधिक धन उसे देकर कहा कि और भी एक गीतकार का मीटर दुरुस्त कर देना। सभी जानते हैं कि इशारा किस ओर था।

फिल्म निर्माण में बजट और लागत की वापसी पर भी विचार होता है। बजट की 15% रकम, अचानक बनी दशा के लिए सुरक्षित रखी जाती है। शूटिंग स्थल पर एंबुलेंस सावधानीवश रखते हैं। सभी सदस्यों का बीमा कराया जाता है। एलिजाबेथ टेलर का डॉक्टर शूटिंग के समय मौजूद रहता था। सितारों की मुस्कान और आंसू का भी बीमा निकाला जाता है। सितारे का आंसू टेक्नीशियन के पसीने से कहीं अधिक मोल का होता है।

टी.एस.इलियट की ‘वेस्टलैंड’ की कविता में विवरण दिया गया है कि मानव, दानव और देवता दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए हिमवत गए थे। वहां बादल घिर आए और गरजे। ध्वनि हुई धा धा दा। देवताओं ने अर्थ निकाला कि उन्हें धर्म के मार्ग पर चलना है और मनुष्य को भी इसी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है। दानव ने ‘दा’ से अर्थ निकाला कि उन्हें दमन करना है।

वे आज भी संवैधानिक व्यवस्था के मुखौटे को पहनकर दमन कर रहे हैं। ‘दा’ का अर्थ मनुष्य ने दया करने का निकाला। गौरतलब है कि दया का छलावा मनुष्य से काम करने के अवसर छीनकर निकाला जा रहा है। मनुष्य को अपनी पूरी क्षमता से काम करने का अवसर देने पर उसे दया की दरकार ही नहीं रहेगी। संपत्ति और जमीन लूट ली गई और दया की जा रही है।

दया का उपयोग शोषण के अवसर निकालने के लिए किया जा रहा है, मुफ्त अनाज, सस्ती दवा और गरीब को सहानुभूति जताने के अवसर खोजते रहने से कुछ नहीं होगा। मेहनत करने का मौका देने पर मनुष्य धरती पर ही स्वर्ग रच सकता है। जनजातियों के लिए सुरक्षित रखे गए अवसर, नकली प्रमाण पत्र देकर संपन्न व्यक्ति ही लूट रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम में जेल जाने वाले व्यक्ति के परिवार को सहूलियतें दी जाती हैं। ये सहूलियतें वे लोग प्राप्त कर रहे हैं, जिन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया था।हर क्षेत्र में भावना के नाम पर लूट-खसोट जारी है। जीवन में कुछ लोग तोते की तरह दोहराते हैं ‘आई लव यू’। प्राय: महिलाओं को यही लव लव लव जपते हुए शोषित किया गया है। धन्यवाद और क्षमा शब्द बिना भावना के दोहराए जाते हैं।

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