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  • The Closeness To The Soul Increased That Solitude Decreased, And As Soon As The Solitude Is Maintained, All These Three Diseases Will Be Relieved.

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:आत्मा से निकटता बढ़ी कि एकांत घटा, और एकांत सधते ही इन तीनों ही बीमारियों से मुक्ति पा लेंगे

17 दिन पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

पेड़ यदि सुख का तैयार करना है तो बीज सुख के काम नहीं आएंगे, क्योंकि सुख के बीज में दुख का भी हिस्सा है। ऐसे में सुख के साथ दुख भी बढ़ेगा। इसलिए यदि केवल सुख चाहिए तो उस पेड़ के लिए बीज आनंद का बोना पड़ेगा। इस समय कई लोग सुख की तलाश में उदास हो गए हैं। यहां दो तरह की स्थितियां होती हैं। एक डिप्रेशन, दूसरी सीजोफ्रेनिया। कई को तो पता ही नहीं चल पा रहा है कि वे उदास हैं, डिप्रेशन में हैं या सीजोफ्रेनिया में हैं।

उदासी एक थकान है, डिप्रेशन मन का दौड़ना है और सीजोफ्रेनिया है मन का टूटना। अब यह तो तय है कि यदि सुख चाहते हैं तो खूब मेहनत करना पड़ेगी। लेकिन, यह भी ध्यान रखना होगा कि आठ घंटे से अधिक काम करने वाले लोगों में डिप्रेशन के लक्षण जल्दी आएंगे। तो लगातार परिश्रम न करें। बीच-बीच में विश्राम लेते रहें। सप्ताह में चालीस घंटे से ज्यादा काम करें तो हो सकता है अवसाद, विखंडित मानसिकता या उदासी घेर ले।

इन तीनों अवस्था में अकेला न उतर आता है और अकेलेपनरूपी सांप के फन को एकांत की बीन से ही दबाया जा सकता है। यहां एकांत का अर्थ है आत्मा की निकटता। अपनी आत्मा के पास बैठने का प्रयास कीजिए। जैसे ही आत्मा से निकटता बढ़ी कि एकांत घटा, और एकांत सधते ही इन तीनों ही बीमारियों से मुक्ति पा लेंगे।