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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:आम सड़क गणतंत्र का प्रतीक और हवेलियों का मलबा सामंतवाद के अंत को दर्शाता है

6 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

गौरतलब है कि कुछ लोग हमेशा अपने काम पर समय से पहले ही पहुंच जाते हैं। वहीं कुछ लोग हर जगह देर से पहुंचते हैं और कई लोग तो जानबूझकर देर से पहुंचते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके रुतबे के आधार पर उनको यह हक है कि वे कहीं भी देर से पहुंचें। समय की पाबंदी के मामले में अमिताभ बच्चन बहुत अनुशासित हैं और उनके आने से लोग अपने हाथ की घड़ियों का समय सही कर लेते हैं। फिल्म उद्योग के कुछ कलाकार हमेशा कहीं भी देर से पहुंचते हैं क्योंकि उनको यह लगता है कि देर से आने पर ही उनका महत्व सबको समझ आता है।

फिल्म जगत में किशोर कुमार के किस्से हमेशा मशहूर रहे हैं। वे उनको जरूर सबक सिखाते थे, जो उन्हें परेशान करते थे। वैसे किशोर कुमार जानकर किसी को कष्ट नहीं देते थे परंतु जो उनसे टेढ़ी चाल चलता था या उनका पहले से तय मेहनताना उन्हें नहीं देता था और जहां समय की बात आती थी वे उसे जरूर अपने ढंग से दंडित करते थे। संगीतकार राहुल देव बर्मन से उनकी गहरी मित्रता रही। किशोर कुमार राहुल की धुन को एक बार सुनकर ही गीत रिकॉर्ड करने के लिए तैयार हो जाते थे।

महमूद द्वारा निर्मित फिल्म ‘पड़ोसन’ में किशोर ने केंद्रीय भूमिका अभिनीत की थी। फिल्म के निर्माण से जुड़े होते हुए भी महमूद ने फिल्म में अंत तक नकारात्मक भूमिका निभाई थी। दरअसल समय ही जीवन की नियामक शक्ति है। समय चक्र हमेशा घूमता रहता है। यह जीवन में स्थित परिवर्तन का भी प्रतीक है। कुछ जीवन मूल्यों में कभी परिवर्तन नहीं हो सकता वे शाश्वत सत्य होते हैं। लोकप्रिय कहावत तो यह है कि समय सबसे अधिक बलवान है परंतु यह भी सच है कि मनुष्य सबसे अधिक बलवान है। वह धारा का मुंह तक मोड़ सकता है।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत एक फिल्म ‘मांझी: द माउंटेन मैन’ में एक व्यक्ति पहाड़ काटकर ऐसा रास्ता बनाता है, जो आदमी का समय और परिश्रम बचा सके। जिस आम आदमी के लिए माउंटेन मैन ने अपना जीवन खपा दिया उस आम आदमी ने माउंटेन मैन को धन्यवाद तक भी नहीं दिया। काम लिए जुनून होना आवश्यक है।

राज कपूर 22 वर्ष की उम्र में अपनी फिल्म ‘आग’ बना रहे थे। वे दिन के समय में अन्य निर्माता की फिल्म में काम करते और उसी धन से रात में अपनी फिल्म की शूटिंग करते थे। यह काम सालों चला और उन्हें देर रात में काम करने की आदत भी पड़ गई। यहां तक कि इसी बात का स्पष्टीकरण उन्होंने अपनी फिल्म ‘हिना’ के गीत में प्रस्तुत कर दिया ‘मैं देर करता नहीं देर हो जाती है।’

समय की पाबंदी और अनुशासन जीवन में आवश्यक है। कुछ लोग इत्तेफाक से सितारे हो गए तो देर से आना उनकी पहचान बन गई। एक सितारे ने बताया था कि दरअसल उसे अभिनय करने से डर लगता है इसीलिए वह जानबूझकर देर से पहुंचता है परंतु उसकी फिल्में सफल होती गईं और वह अनिच्छुक कलाकार होते हुए भी इंडस्ट्री में लंबी पारी खेल रहा है।

समय पर फिल्म गीत रचे गए हैं और कहानियां भी समय ही तय करता है। फिल्मकार बिमल राॅय की निर्माण कंपनी का लोगो मुंबई के एक पुराने क्लॉक टावर पर लगी एक घड़ी है। संभवत: बिमल राय समय के महत्व को भली-भांति समझते थे।

गुरु दत्त की ‘साहब बीवी और गुलाम’ में भी घड़ी बाबू का पात्र सामंतवादी हवेली में लगी सभी घड़ियों में चाबी भरता था। वह प्राय: बुदबुदाता रहता है कि एक दिन इन हवेलियों में कोई नहीं रहेगा। इसी हवेली में आश्रय लिया एक व्यक्ति पढ़-लिखकर इंजीनियर बनने के बाद आम रास्ता बनाने के लिए हवेलियों का मलबा हटवाता है। गौरतलब है कि आम सड़क गणतंत्र का प्रतीक है और हवेलियों का मलबा सामंतवाद के अंत को दर्शाता है।