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डॉ. भारत अग्रवाल का कॉलम:भूटान में सेना के तख्तापलट करने की साजिश फेल, इसे भारतीय खुफिया सूचना ने कराया विफल

7 दिन पहले
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डॉ. भारत अग्रवाल - Dainik Bhaskar
डॉ. भारत अग्रवाल

टाइट हो गए
टाइट करने मैं चला, मैं भी हो गया टाइट। टाइट होना, टाइट करना, पहले ही टाइट रहना, फुल टाइट होना- आदि सब एक कला है। कहते हैं कि यह कला सिर्फ अनुभव से सीखी जाती है। हाल ही में यह अनुभव उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को हुआ। उनकी इमेज यह है कि वह सबसे काम करवाते हैं और सबको टाइट करके रखते हैं।

उत्तर प्रदेश के कई सांसदों ने इसकी शिकायत ऊपर की हुई है। हाल ही में बीजेपी पदाधिकारियों की बैठक में पीएम ने स्वतंत्र देव सिंह की यह कहकर चुटकी ले ली कि अध्य्क्ष जी आप के राज्य में तो बनारस के सांसद भी हैं, उसे भी टाइट किया कीजिये। स्वतंत्र देव सिंह क्या कहते? यह टाइट होने की उनकी बारी थी।

भूटान का मामला
रायल भूटान सेना के मुख्य ऑपरेशन्स अधिकारी (सेना अध्यक्ष), भूटान के वरिष्ठतम न्यायाधीश कुएंले ताशरिंग, जिला अदालत के न्यायाधीश येशी दोरजी और पूर्व अंगरक्षक कमांडेंट ब्रिगेडियर थिनले टोबगे ने भूटान में तख्तापलट करने की साजिश रची थी। साजिश विफल हो गई और इन सभी को उनके घरों में नजरबंद करने के बाद अदालत में पेश कर दिया गया। खास बात यह है कि तख्तापलट विफल सतर्कता और भारतीय खुफिया सूचना के बूते विफल हुआ।

टू मनकामेश्वर, वाया राजनाथ सिंह
प्रियंका वाड्रा की कुम्भ यात्रा की तस्वीरें आपने देखी हैं, लेकिन कहानी का दूसरा पक्ष हम बताते हैं। वास्तव में कुंभ यात्रा में रक्षा मंत्री ने उनकी मदद की थी। प्रमोद तिवारी ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई थी। प्रयागराज में एक मनकामेश्वर मंदिर है और यहीं स्वामी स्वरूपानंद का आश्रम भी है। मौनी अमावस्या में कुंभ स्नान के बाद प्रियंका को मनकामेश्वर मंदिर जाकर स्वामी स्वरूपानंद जी से आशीर्वाद लेना था।

मनकामेश्वर मंदिर परिसर आश्रम सैनिक छावनी का हिस्सा है और यहां आम नागरिकों की आवाजाही पर पाबंदी रहती है। प्रमोद तिवारी ने राजनाथ सिंह से बात की, तब जाकर रास्ता खोला गया। इसमें एक भूमिका मध्यप्रदेश के एक नेता की भी रही।

रूल इज रूल
केरल में मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक ई. श्रीधरन ने दो टूक कहा है कि वह राज्यपाल नहीं बनेंगे। श्रीधरन ये जानते हैं कि राज्यपाल सिर्फ एक संवैधानिक पद है और पार्टी या सरकार के कामकाज में राज्यपाल प्रभावी नहीं हो सकते हैं। जाहिर है, श्रीधरन अभी राजनीति में नए हैं। लेकिन केरल बीजेपी के एक नेता कहते हैं कि दरअसल श्रीधरन पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टी.एन. शेषन के सहपाठी रहे हैं। लिहाजा, उन पर शेषन का असर ज्यादा है।

मामला 125 जीबी का है!
केंद्रीय जांच एजेंसियों ने एक्टिविस्ट दिशा से करीब 125 जीबी का डाटा बरामद किया है। पता नहीं इसमें किस-किस के मानसिक पर्यावरण की जन्म कुंडली शामिल है।

हर महीने 35 लाख!
एक मुख्यमंत्री के भतीजे द्वारा हर माह विदेश में एक बैंक में 35 लाख रुपये जमा करवाने का मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों की नजर में आ चुका है।

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