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साधना शंकर का कॉलम:अंतरिक्ष पर्यटन का दौर शुरू, रोमांच के साथ चुनौतियां भी हैं

2 महीने पहले
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साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी - Dainik Bhaskar
साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी

कल ‘न्यू शेपर्ड’ नाम की स्पेस प्लाइट में उड़ान भरने वालों में वैली फंक नाम की एक यात्री भी शामिल थी। जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन ने 82 साल की इस महिला को अपना सपना पूरा करने का मौका दिया। चंद दिनों पहले ही 11 जुलाई को रिचर्ड ब्रैनसन की कंपनी की यूनिटी स्पेस प्लाइट भी अंतरिक्ष गई थी, जिसमें भारतीय मूल की एयरोनॉटिकल इंजीनियर सिरिशा बांदला भी थीं।

अंतरिक्ष पर्यटन का युग आ चुका है और प्रतिस्पर्धा कड़ी है। इस नई मंजिल को पहला यात्री काफी पहले 2001 में मिला था। अमेरिकी उद्यमी डेनिस टीटो रूसी सोयुज रॉकेट से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचकर दुनिया के पहले अंतरिक्ष पर्यटक बने थे। अंतरिक्ष में यात्रा करना काफी महंगा है और कुछ लोग इसे एक अंतराल के बाद दोहरा रहे हैं।

अब अंतरिक्ष, इस ब्रह्मांड में पर्यटन की नई सरहद है। दुनिया में सबसे रोमांचक अंतरिक्ष प्रयोगशाला कैलिफोर्निया में मोजावे रेगिस्तान स्थित द्वितीय विश्वयुद्ध के दो हैंगर्स हैं। वहीं अंतरिक्ष पर्यटन से जुड़े तमाम प्रयोग, महत्वाकांक्षाएं और सपने आकार ले रहे हैं। ब्रैनसन-बेजोस जैसे अमीरों से लेकर एक्सकॉर जैसे स्टार्टअप भी अंतरिक्ष पर्यटन में लोगों को आकर्षित करने के लिए जुटे हुए हैं। अंतरिक्ष फ्लाइट में जाने के इच्छुक लोगों की प्रतीक्षा सूची तैयार है। यहां तक कि ब्रैनसन की स्पेस फ्लाइट की वेटिंग लिस्ट में एलन मस्क भी हैं!

उम्मीदें और डर दोनों के साथ अंतरिक्ष पर्यटन एक नया दायरा खुल रहा है। बाहरी अंतरिक्ष पारंपरिक रूप से सरकारों का क्षेत्र रहा है, पर अंतरिक्ष पर्यटन में निजी खिलाड़ी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। कई लोग इसे फायदे के तौर पर देख रहे हैं। चूंकि राष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन में टैक्स देने वालों का पैसा लगा होता है इसलिए उन पर सफलता का दबाव होता है। पर निजी लोगों की मौजूदगी से इस क्षेत्र में फंड आराम से आएगा साथ ही भूल-चूक की गुंजाइश बनी रहेगी। नई तकनीक में शोध-विकास कार्यों से अंतरिक्ष यात्रा में तेजी देखने को मिलेगी।

हाइपरसोनिक यात्रा की बात पहले से हो रही है, जहां सबऑर्बिटल अंतरिक्ष का इस्तेमाल विमान का समय व दूरी कम करने के लिए किया जा सकता है। फिलहाल टिकट महंगी होने के कारण अंतरिक्ष पर्यटन अमीरों की पहुंच में ही है। हालांकि जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती जाएगी, उम्मीद है कि अंतरिक्ष पर्यटन सस्ता और सुलभ होगा।

एक दूसरा पहलू भी है। पर्यावरण की कीमत पर अंतरिक्ष वाहनों की ओर आलोचक ध्यान दिलाते हैं। कई अध्ययन कहते हैं कि अंतरिक्ष वाहनों से निकलने वाला काला कार्बन समतापमंंडल में जमा होता जाएगा, जिससे तापमान बढेगा। यात्रा के दौरान प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन पर भी सवाल हैं।

बाहरी अंतरिक्ष के नियम कायदे समेत निजी खिलाड़ियों की आमद जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जरूरी है। अंतरिक्ष में कदम रखने वाले सभी यात्री काले अंधेरे से घिरे नीले निशान यानी धरती को देखने के बाद एक आश्चर्य और सम्मान की भावना के बारे में बात करते हैं।

अधिकांश लोगों के लिए यह अपने गृह को देखने का नजरिया बदलने वाला अनुभव होता है। उम्मीद है कि भावी अंतरिक्ष यात्री जब वापस लौटें तो धरती के प्रति उनके मन में कृतज्ञता के भाव के साथ, वह इसके सक्रिय संरक्षक बनेंगे। और इस नायाब धरती की रक्षा करने के लिए तत्पर होंगे।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं।)