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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से पृथ्वी का अस्तित्व संकट में है

11 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

दिल्ली हाईकोर्ट में जूही चावला द्वारा लगाई गई अर्जी पर सुनवाई चल रही है। जूही चावला का तर्क यह है कि 5जी के प्रसारण के लिए खड़े किए गए टावरों से आणविक विकिरण फैलेगा। पशु-पक्षी और मनुष्यों को आघात पहुंचेगा। ज्ञातव्य है कि फिल्मकार शंकर ने रजनीकांत अभिनीत फिल्म इसी विषय पर बनाई थी।

शंकर-रजनीकांत शैली अतिरेक होता है। जहां एक पिस्टल से काम होता है, वहां वे मशीनगन चलाते हैं। यह समस्या अंतरिक्ष तक विस्तार ले चुकी है। ज्ञातव्य है कि स्टीफन हॉकिंग ने अंतरिक्ष पर शोध करते हुए ब्लैक होल पर प्रकाश डाला था। ‘थ्योरी ऑफ़ आल थिंग्स’ में विवरण प्रस्तुत किया गया है। मेडिकल जांच-पड़ताल के बाद उन्हें बताया गया कि उनकी मांसपेशियां शिथिल होती जा रही हैं परंतु विचार शक्ति सक्रिय है। इसी शक्ति से वे लंबे समय तक बने रहे। 2018 में उनकी मृत्यु हुई। हॉकिंग और जैनेट प्रेम कथा एक स्वतंत्र लेख का विषय है।

ज्ञातव्य है कि कुंदन शाह और अजीज मिर्जा ने नए कलाकार शाहरुख खान को अवसर दिए। उस समय जूही चावला लोकप्रिय सितारा हो चुकी थीं। उन्हें नवोदित कलाकार के साथ काम करने में कोई संकोच नहीं था। शाहरुख खान, जूही चावला और अजीज मिर्जा ने ‘ड्रीम्स अनलिमिटेड’ फिल्म कंपनी की स्थापना मिलकर की थी। सभी सपने साकार नहीं होते।

बहरहाल जूही चावला मेहता ने माधुरी दीक्षित केंद्रित ‘गुलाबी गैंग’ में भ्रष्ट मुख्यमंत्री की भूमिका नए अंदाज में की है। निर्मम फैसले लेते समय वे मुस्कुराती रहती हैं। इस समय पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से पृथ्वी का अस्तित्व संकट में है। जूही चावला के अपने जीवन में सभी चीजें अपने ठिकाने पर जमी हुई हैं। उन्हें किसी व्यक्तिगत चीज की आवश्यकता नहीं है।

सामाजिक चिंता सभी लोग करें तो पृथ्वी को बचाया जा सकता है। जूही चावला मेहता के प्रयास को सराहा जाना चाहिए। विकास के साथ ही विनाश जुड़ा हुआ है। संवेदना की छलनी से ये कंकर हटाए जा सकते हैं। सर्वप्रथम हमें स्वीकार करना होगा कि पेड़ों में प्राण हैं संवेदना है। एक महान कथन है कि मनुष्य चलता-फिरता हुआ वृक्ष और वृक्ष स्थित खड़ा हुआ मनुष्य है। सोलोमन आइलैंड पर किसी वृक्ष को हटाना आवश्यक हो जाता है तो लोग आरी लेकर उसे काटते नहीं हैं। उसके सामने खड़े होकर अपशब्द बोलते हैं। वह मार्ग छोड़ देता है।

शेक्सपियर के एक नाटक में कही गई बात का आशय कि जब दरख्त चलने लगें तो समझना कि अत्याचारी का अन्याय हद से गुजर गया है। उक्त रचना में न्याय के लिए लड़ने वाले वृक्ष की डालियां सिर पर लिए अन्याय करने वाले हुक्मरान के किले की ओर कूच करने लगते हैं। इस बात की जानकारी राजा के पास पहले से है, अत: उसने जंगलों को नष्ट होने दिया।

वृक्ष नहीं होंगे तो डालियां लिए कौन किले की ओर आएगा। आणविक विकिरण सभी देशों की समस्या है। कुछ देश सार्थक कदम उठा रहे हैं। सभी समान रूप से सजग नहीं हैं। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका थी। दूसरी ही नजरअंदाज कर दी गई थी। सोते हुए व्यक्ति को जगाया जा सकता है, जागे हुए को जगाए कौन? हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराया गया था। नागरिकों की पीढ़ियां इसके दुष्प्रभाव भोगती रहीं। इस विषय पर राजेंद्र कुमार अभिनीत फिल्म ‘अमन’ की शूटिंग में महान बर्ट्रेंड रसेल ने आणविक विकिरण के खतरों की भयावहता के प्रति लोगों को सजग रहने का संदेश दिया था।

साहिर लुधियानवी ने अन्य संदर्भ देखकर आगाह किया था, ‘गुज़िश्ता जंग में घर ही जले मगर इस बार, अजब नहीं कि ये तन्हाइयां भी जल जाएं, गुज़िश्ता जंग में पैकर (शरीर) जले मगर इस बार, अजब नहीं कि ये परछाइयां भी जल जाएं।’ अदालत न्याय कर रही हैं। इस क्षेत्र को भी बांटने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुंशी प्रेमचंद की कथा ‘पंच परमेश्वर’ से लेकर फिल्म ‘मुल्क’ में प्रस्तुत अदालतों में वह दिखाया गया है।’