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संकेत उपाध्याय का कॉलम:सरकार का रुख क्रिप्टो करेंसी को लेकर साफ है, आपको घबराने की जरूरत नहीं है

5 महीने पहले
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संकेत उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार - Dainik Bhaskar
संकेत उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार

इस देश में आज भी करोड़ों ऐसे लोग हैं जो क्रिप्टो करेंसी के बारे में कुछ नहीं जानते। और जब आपको किसी बात की बिल्कुल कम जानकारी हो, तो अक्सर एक धारणा बन जाती है कि उससे बच के ही रहें तो बेहतर। लगभग हर घर की कहानी यह है कि घर के छोटे सदस्य- औसत 20-30 की आयु वाले क्रिप्टो के बारे में सबकुछ जानते हैं। और यही बात अगर आप उनके मां-बाप या घर के बड़ों से पूछें, तो यह बोला जाता है कि इस दुनिया में आसानी से पैसा नहीं बनता। जरूर कुछ तो लफड़ा है। और फिर हंगामा हो ही गया।

पिछले महीने शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र से पहले एक तूफान सा आ गया। सनसनी की तरह यह खबर फैली कि सरकार सारी प्राइवेट क्रिप्टो करेंसी बैन करने जा रही है। यह तब हुआ जब सत्र शुरू होने से पहले कौन-कौन से बिल पास होंगे इसकी एक सूची बाहर आई। इस सूची में क्रिप्टो बिल भी था और साथ में प्राइवेट क्रिप्टो बैन करने की बात भी लिखी थी। .

दरअसल ये एक छोटा सा नोट लिखा जाता है रफ आईडिया देने के लिए। बाद में यह पता चला कि जिस भाव से वो नोट लिखा है शायद बिल वैसा न हो। क्योंकि बिलकुल इसी भाषा के साथ बजट सत्र में भी यह बिल लाने की बात की गई थी, पर बिल आया नहीं। और तब से लेकर अब तक, सरकार ने क्रिप्टो पर बहुत चिंतन और मंथन किया है। लेकिन, नोट का असर भयंकर रहा।

पूरे वर्ल्ड कप के दौरान क्रिप्टो के एड से भरे क्रिप्टो एक्सचेंज जबरदस्त गिरावट देखने लगे। मिनटों में लोगों के पैसे आधे हो गए। बाद में थोड़ा सुधार भी आया। लेकिन वो सदमा क्रिप्टो एक्सचेंज पर आज भी दिखाई देता है। सारे क्रिप्टो जैसे बिटकॉइन, इथीरियम और डोज अपने पीक से काफी नीचे आ गए हैं। ऐसे में क्रिप्टो के भारत में भविष्य को लेकर सवाल उठना लाज़मी हैं।

याद करिए, स्वर्गीय अरुण जेटली के उस बयान को जब उन्होंने क्रिप्टो को चिट फंड बराबर घोषित कर दिया था। क्रिप्टो इस देश में बैन भी हुआ। मामला अदालतों में गया और उच्चतम न्यायालय ने यह साफ किया की क्रिप्टो को बैन नहीं किया जा सकता। क्रिप्टो अब वापस आ गया पर रेगुलेटेड यानी कि विनियमित ढंग से नहीं। अब, सरकार इसी सत्र में क्रिप्टो बिल लाएगी लेकिन जो जानकारी छन कर सामने आ रही है उससे बस यही कह सकते हैं की ‘आपको घबराना नहीं है।’

कुछ चीजेंं पहले स्पष्ट कर दें। सरकार का रुख क्रिप्टो के करेंसी होने पर हमेशा से साफ था, और अभी भी वही मत है। यह रुपए या डॉलर या पौंड की जगह नहीं ले सकती। तो इसको करेंसी न बुलाया जाए। ऐसा कभी नहीं होगा कि आप बाजार जाएं और क्रिप्टो करेंसी देकर ब्रेड, दूध अंडा ले आएं।

यह विशुद्ध रूप से एक एसेट की तरह मान्यता प्राप्त करेगा। इसका मतलब यह है कि अगर आपके पास निवेश के तौर पर घर है, म्यूचुअल फंड है, शेयर है ठीक उसी शृंखला में आप क्रिप्टो को भी अपने पोर्टफोलियो में जोड़ लीजिए। तो सबसे पहला काम आपको यह करना होगा कि क्रिप्टो को करेंसी बुलाना बंद करना होगा।

जानकारी यह मिल रही है कि जो बिल भी आएगा उसका नाम क्रिप्टो एसेट बिल होगा- क्रिप्टो करेंसी नहीं। इस बिल में सरकार ऐसी मंशा बना रही है कि क्रिप्टो को बैन करने के बजाय इस पूरी बाजार को विनियमित- यानी रेगुलेट किया जाए। इसकी जिम्मेदारी संभवतः सेबी के पास जाएगी। ठीक वैसे ही जैसे शेयर बाजार को सेबी रेगुलेट करता है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)
●sanket.u@gmail.com

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